लेखक की कलम

वचनभंगता का हलाहल

समुद्र मंथन मंे अमृत से पहले हलाहल निकलेगा, यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत अच्छी तरह जानते थे। इसीलिए नई दिल्ली मंे 28 अगस्त को विज्ञान भवन मंे आयोजित संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में भाजपा का वचन भंगता का हलाहल स्वयं पी लिया ताकि भाजपा निश्ंिचत होकर अमृत पान कर सके। बीते 2024 के लोकसभा चुनाव मंे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने एक धमाका किया था। विपक्षी दलों ने केजरीवाल का समर्थन नहीं किया वरना वो धमाका काफी असर दिखा सकता था। अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि आप (मतदाता) पीएम बनने के लिए किसको वोट दे रहे हैं? अपनी बात को स्पष्ट करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि भाजपा मंे श्री मोदी ने ही नियम बनाया है कि 75 वर्ष की उम्र के बाद सक्रिय राजनीति से नेता रिटायर हो जाएंगे। इसी फार्मूले से लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं को मार्गदर्शक मंडल मंे शामिल किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आगामी 17 सितम्बर 2025 को 75 वर्ष के हो जाएंगे। केजरीवाल ने यही कहा था कि मोदी तो मार्गदर्शक मंडल मंे चले जाएंगे और अमित शाह प्रधानमंत्री बन जाएंगे। यह दूर का शिगूफा था लेकिन भारत के मतदाताओं को चैकन्ना तो कर ही सकता था। बहरहाल, लोकसभा चुनाव हो गये। भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना पायी लेकिन नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन से नरेन्द्र मोदी तीसरी बार लगातार प्रधानमंत्री बन गये। अब 17 सितम्बर की तिथि नजदीक आ रही है तो भाजपा के अंदर भी समुद्र मंथन हो सकता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वचन भंगता का हलाहल पीते हुए कहा कि न मैं 75 की उम्र मंे रिटायर होऊंगा और न ही किसी को होना चाहिए। यह इशारा साफतौर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ है। संघ प्रमुख ने इस अवसर पर कई अन्य महत्वपूर्ण बातें कही हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 28 अगस्त को कई अहम मुद्दों पर बयान जारी किए हैं। मोहन भागवत ने काशी और मथुरा को लेकर आंदोलन पर भी बात की है। उन्होंने साफतौर पर कह दिया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी और मथुरा में आंदोलनों का समर्थन नहीं करेगा। हालांकि, मोहन भागवत ने ये भी कहा है कि संघ के स्वयंसेवक इन आंदोलनों में भाग ले सकते हैं। मोहन भागवत ने रिटायरमेंट के मुद्दे पर भी बात की। भागवत ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वह 75 साल की उम्र में पद छोड़ देंगे या किसी को इस आयु में संन्यास ले लेना चाहिए। दरअसल, बार-बार ये कहा जा रहा था कि नरेन्द्र मोदी 75 साल के हो जाएंगे तो उन्हें रिटायरमेंट लेना पड़ेगा, संघ ऐसा चाहता है। इस मामले में संघ प्रमुख ने साफ-साफ कह दिया कि संघ में रिटायरमेंट की कोई परंपरा नहीं है। कोई स्वंयसेवक कभी रिटायर नहीं होता, जिसको जो जिम्मेदारी दी जाती है वो उसे निभाता है। इसका उम्र से कोई संबंध नहीं है। भागवत ने कहा- हम जीवन में किसी भी समय पद छोड़ने को तैयार हैं और जब तक संघ चाहे, तब तक कार्य करने को तैयार हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित अपने तीन दिनों के व्याख्यान के अंतिम दिन सवालों का जवाब दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा- ‘‘राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन रहा जिसका आरएसएस ने समर्थन किया है, वह किसी अन्य आंदोलन में शामिल नहीं होगा, लेकिन हमारे स्वयंसेवक इसमें शामिल हो सकते हैं। काशी-मथुरा में आंदोलनों का संघ समर्थन नहीं करेगा, लेकिन स्वयंसेवक इसमें भाग ले सकते हैं।’’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। मोहन भागवत ने कहा है कि बीजेपी और संघ में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद कभी नहीं। मोहन भागवत ने ये भी कहा है कि केंद्र और राज्य की सभी सरकारों के साथ संघ का समन्वय रहता है। किसी विषय पर संघ सलाह दे सकता है लेकिन निर्णय बीजेपी का है। उन्होंने कहा कि हम तय करते तो इतना समय लगता क्या। माना जा रहा है कि ये बयान उन्होंने भाजपा के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर दिया है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- मैं शाखा चलाने में माहिर हूं, भाजपा सरकार चलाने में माहिर है। हम एक-दूसरे को सिर्फ सुझाव दे सकते हैं। भाजपा के नए अध्यक्ष के फैसले में हो रही देरी पर आरएसएस प्रमुख भागवत ने चुटकी लेते हुए कहा, आप अपना समय लें, हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मोहन भागवत ने शिक्षा के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा- धार्मिक विश्वास कुछ भी हो सकता है लेकिन शिक्षा की सामाजिक मान्यताएं एक होनी चाहिए और मदरसा हो मिशनरी, सब जगह पढ़ाया जाना चाहिए। अंग्रेजी भी पढ़नी चाहिए। हर भाषा की अपनी लंबी परंपरा है जिसमें अच्छे साहित्य हैं। शिक्षा की मुख्य धारा को गुरुकुल पद्धति की तरफ मोड़ना चाहिए। इसी तरह की पढ़ाई फिनलैंड में होती है जो शिक्षा की व्यवस्था में दुनिया में सबसे अच्छी है और आठवीं तक मातृभाषा में पढ़ाई होती है। संस्कृत का कामचलाऊ ज्ञान भारत को समझने वाले सभी व्यक्ति को होना चाहिए। लेकिन अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है वरना रिएक्शन होता है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सामाजिक समरसता का कार्य कठिन होते हुए भी करना ही होगा, उसके अलावा कोई उपाय नहीं है। मोहन भागवत ने अपने आसपास के वंचित वर्ग में मित्रता करने, मंदिर, पानी और श्मशान में कोई भेद न रहे, किसी को कोई रोक न हो, ऐसी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता सब बातों की कुंजी है। अपना देश आत्मनिर्भर होना चाहिए। आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी के उपयोग को प्राथमिकता दें।
मोहन भागवत ने महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा संघ के प्रति अनुकूलता है, समाज की मान्यता है, विरोध बहुत कम हो गया है। जो विरोध है उसकी धार कम हो गई है। इसमें संघ की यही सोच है, अनुकूलता मिली है तो सुविधा भोगी नहीं होना है। अनुकूलता मिली है तो आराम नहीं करना है। तो संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करने का लक्ष्य प्राप्त करने तक सतत चलते रहना है। किस तरीके से यह भी बताया,चार शब्दों में उसका वर्णन हुआ है। मैत्री, करुणा, मुदिता, उपेक्षा इस तरह काम चलता है संघ का। इसमें इंसेंटिव नहीं है। भागवत ने कहा हिंदुत्व क्या है? हिंदू की विचारधारा क्या है? सारांश कहना है तो दो शब्द सत्य और प्रेम, दुनिया इस पर चलती है। कॉन्ट्रैक्ट पर नहीं चलती, सौदे पर नहीं चलती। प्राचीन देश होने के नाते, दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति आये और जीवन की विद्या भारत के लोगों से सीखें। सर्वत्र का भला हो, सब सुखी हो, ऐसे चलना है तो, एक समन्वय स्थापित करना पड़ेगा। मनुष्य को धर्म को रखना पड़ता है, उसके लिए त्याग रखना पड़ता है। धर्म की रक्षा करने से सब की रक्षा होती है। दुनिया में कलह दिखता है, कट्टरपन बढ़ गया है। धर्म यानी रिलिजन नहीं, धर्म यह बैलेंस है, धर्म को हमारे यहां कहते हैं मध्यम मार्ग। आर्थिक उन्नति पर्यावरण के लिए नासक बनती जा रही है। अमीर और गरीब के बीच दूरी बढ़ रही है। इन पर चर्चा बहुत हो रही, उपाय भी बहुत सुझाए जा रहे हैं, परंतु रिजल्ट इज फार अवे अर्थात् नतीजा अभी दूर है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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