भारत को मिला जापान का साथ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50 फीसद टैरिफ लगाकर सोचा था कि मोदी को दबाव मंे ले लेंगे लेकिन भारत ने उनको करारा जवाब दिया है। हम अमेरिका को आयात से होने वाले नुकसान को दूसरे देशों से व्यापार बढ़ाकर न सिर्फ पूरा कर लेंगे बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को विश्व की नम्बर एक अर्थव्यवस्था बनाने का प्रयास करेंगे। अभी तो पीएम मोदी ने जापान के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते कर एक नयी दिशा तय की है। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने भारत मंे अगले 10 सालों मंे 10 ट्रिलियन येन (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) निवेश करने की बात कही है। जापान के साथ व्यापारिक रिश्ते काफी पहले से चल रहे हैं। मोदी ने गुजरात के सीएम रहते टोक्यो और क्योटो मंे 2007 मंे रोड शो किया था। उस समय भी गुजरात और जापानी कंपनियों के बीच निवेश के समझौते हुए थे। इसके बाद नरेन्द्र मोदी 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। पहले साल ही जापान गये और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे से दोस्ती भारत-जापान संबंधों का नया चेहरा बनी थी। इसी का नतीजा था कि 2016 में क्योटो और वाराणसी को सिस्टर सिटी घोषित किया गया था। एक साल बाद ही 2017 मंे शिंजो आबे गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे और अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। इसके बाद जापान के साथ हरित ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलाॅजी और रक्षा सहयोग पर कई समझौते हो चुके हैं। अब अमेरिका से टैरिफ वार के बाद पीएम मोदी को जापान का फिर मजबूत साथ मिला है। भारत और जापान के बीच 13 करार हुए हैं। अगले पांच साल मंे ढाई लाख भारतीय कामगार जापान जाएंगे।
जापान के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने 15वें भारत-जापान इकनॉमिक फोरम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान अहम पार्टनर है। उन्होंने जापान के बिजनेस लीडर्स को बताया कि कैसे जापान की टेक्नॉलाजी और भारत के टैलेंट आपस में मिलकर दोनों के विकास में अहम रोल अदा कर सकते हैं। टोक्यो में आयोजित 15वें भारत-जापान समिट में पीएम मोदी और जापानी पीएम इशिबा की मौजूदगी में कई एमओयू एक्सचेंज किए गए।
भारत और जापान ने 30 अगस्त को चंद्रयान-5 मिशन के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र का संयुक्त अन्वेषण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के बीच संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन के संबंध में कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए।
चंद्रयान-5 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्र के आसपास के क्षेत्र में चंद्रमा के पानी समेत अस्थिर पदार्थों का अध्ययन करना है। इस मिशन को जाक्सा द्वारा अपने एच3-24एल प्रक्षेपण यान से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसमें इसरो निर्मित चंद्र लैंडर होगा, जो जापान निर्मित चंद्र रोवर को ले जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत और जापान की वैज्ञानिक टीम अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगी। मोदी ने कहा, ‘‘अंतरिक्ष में हमारी साझेदारी न केवल हमारे क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि हमारे आसपास के जीवन को भी बेहतर बनाएगी।’’ उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा देश के वैज्ञानिकों के दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और नवाचार की कहानी है। मोदी ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक ‘लैंडिंग’ से लेकर अंतरग्रहीय मिशनों में हमारी प्रगति तक, भारत ने लगातार यह प्रदर्शित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं है, यह अगली सीमा है।
इसके साथ ही भारत ने जापान के साथ कई समझौते किये हैं। मोदी-इशिबा वार्ता पर एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्र में जारी सहयोग को स्वीकार किया। बयान के अनुसार, मोदी और इशिबा ने दोनों पक्षों के संबंधित प्राधिकारों को निर्देश दिया कि वे द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से “ठोस परिणाम” हासिल करने के प्रयासों में तेजी लाएं, तथा दोनों पक्षों के परिचालन दृष्टिकोणों को प्रभावी ढंग से समर्थन देने के लिए भविष्य के वास्ते विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करें। रूपरेखा में सामरिक सहयोग में इजाफा करने के व्यापक प्रयासों के एक हिस्से के रूप में आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान पर भारत-जापान समझौते के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी कही गई है। इसमें साझा समुद्री सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण समुद्री वातावरण के लिए नौसेना एवं तटरक्षक सहयोग को बढ़ावा देने के उपाय करने का भी प्रावधान है। भारत और जापान ने खुफिया जानकारी एवं अनुभव साझा करके आतंकवाद, चरमपंथी उग्रवाद तथा संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का भी संकल्प जताया है।
दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, उपग्रह आधारित नौवहन, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष क्षेत्र में पारस्परिक रूप से तय अन्य क्षेत्रों के लिए अपनी-अपनी अंतरिक्ष प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की है। द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी ने मीडिया के लिए जारी बयान में कहा कि रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के साझा हित हैं। उन्होंने कहा, “हमने रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में अपने सहयोग को संयुक्त रूप से और मजबूत करने का फैसला लिया है।” रक्षा सहयोग की नयी रूपरेखा के तहत भारत और जापान ने अपने रक्षा बलों के बीच अंतर-संचालन और तालमेल को बढ़ावा देकर एक-दूसरे की रक्षा क्षमताओं में योगदान देने का निर्णय लिया है।
दोनों पक्षों ने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास की संभावना तलाशने और अपनी विशेष परिचालन इकाइयों के बीच साझेदारी पर विचार करने का फैसला किया है। भारत और जापान के प्रधानमंत्री के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी बयान में, “दोनों नेताओं ने किसी भी ऐसी एकतरफा कार्रवाई के प्रति कड़ा विरोध दोहराया, जो सुरक्षा के साथ-साथ नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता को खतरे में डालती हो, तथा बल या दबाव के जरिये यथास्थिति को बदलने का प्रयास करती हो।” बयान के मुताबिक, “मोदी और इशिबा ने विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से और अंतरराष्ट्रीय कानून, खास तौर पर समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र की संधि के अनुसार किया जाना चाहिए।”
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



