नेपाल में रुक नहीं रही प्रकृति की तबाही, बेस कैम्प पर हिमस्खलन

नेपाल में इस साल प्रकृति ने जो कहर ढाहा है, वैसा दशकों में देखने को नहीं मिला है। पहले तो 26 अगस्त को आई प्रलयकारी बाढ़ के कारण भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 5000 लोग लापता हो गए। लगा कि अब जीवन फिर से पटरी पर लौटेगा, नेपाल अपने पैरों पर खड़ा होगा। लेकिन एक बार फिर यहां प्राकृतिक आपदाओं ने अपना क्रूर रूप दिखाया है। पिछले 5 दिनों से लगातार बारिश के कारण आई बाढ़, जमीन खिसकने (लैंड स्लाइड), जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने जैसी आपदाओं से नेपाल में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 7 लोग घायल हो गए। ताबाही सिर्फ जमीन पर नहीं है, पहाड़ों पर एवलांच (हिमस्खलन) आया है, बर्फ बाढ़ की तरह पहाड़ों पर टूटकर नीचे आ रहा और लोगों की जान ले रहा है। गत 27 सितम्बर को नेपाल के मनांग जिले के नार फू इलाके में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर हिमस्खलन हुआ। सामने आए वीडियो में ऐसा लगा जैसे बर्फीली बाढ़ पहाड़ से नीचे आ रही है। हिमस्खलन वाली जगह से दो और शव बरामद किए गए, जिससे मरने वालों की संख्या चार हो गई है, जबकि आठ लोग अभी भी लापता हैं। इस हिमस्खलन से वे टेंट दब गए जिनमें सपोर्ट स्टाफ और माउंटेन गाइड रुके हुए थे। कुल मिलाकर 22 लोग लापता हो गए थे और ये सभी नेपाली थे। अधिकारियों ने बताया कि बचाव दल ने अब तक 10 लोगों से संपर्क कर लिया है। अब तक बरामद किए गए चार शवों की पहचान छेबी भोटे, पासांग भोटे, बीरेंद्र गुरुंग और घन श्याम राय के तौर पर की गई है।
नेपाल के मनांग जिले में ही जबरदस्त भूस्खलन हुआ, जिससे मलबा मर्स्यांगडी नदी में जा गिरा और नदी का कुछ हिस्सा कुछ समय के लिए रुक गया। बारिश के कारण हुए इस भूस्खलन के बाद अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने की अपील की है। नेपाल से एक और खौफनाक वीडियो आया जिसमें कुछ ही सेकंड में पूरी चट्टान ढह गई और पेड़-मकान आंखों के सामने गायब हो गए। यह वीडियो भी मनांग जिले के चामे का बताया जा रहा है।



