सम-सामयिक

मछलियां भी लगाती हैं लिपस्टिक

होठों को खूबसूरत बनाने के लिए महिलाएं ही लिपस्टिक नहीं लगातीं बल्कि जल की रानी कही जाने वाली मछलियां भी लिपस्टिक लगाती हैं। यह अलग बात है कि उनके होंठों पर प्रकृति ही लाल लिपस्टिक पोत देती है। इन मछलियों को रेड-लिप्ड बैटफिश कहा जाता है। यह मछली गैलपागोस द्वीप समूह के पास पाई जाती हैं।
यह भी विचित्र है कि क्या आपने कभी ऐसी मछली देखी है जो समंदर के तल पर चलती हो? यकीन मानिए दुनिया में ऐसी मछली भी है जिसकी चाल देखकर एक बार आपको यकीन नहीं होगा। इसका रेंगना डगमगाकर चलने जैसा होता है। इस मछली की सिर्फ चाल अलग नहीं है, इसकी शक्ल भी अपने आप में दिलचस्प। हम बात कर रहे हैं रेड-लिप्ड बैटफिश की। इस मछली को यह नाम इसके लाल रंग के होठों की वजह से मिला है। यह मछली आपको गैलापागोस द्वीपसमूह पर मिलेगी जो प्रशांत महासागर में स्थित ज्वालामुखी द्वीपों का एक समूह है।
रेड-लिप्ड बैटफिश का दूसरा नाम गैलापागोस बैटफिश है। एक अजीब बनावट वाली मछली है, जो गैलापागोस द्वीप समूह के आस-पास 3 से 76 मीटर (10 से 249 फीट) की गहराई में पाई जाती है। यह दूसरी बैटफिश से काफी मिलती-जुलती है लेकिन सिर्फ गैलापागोस में ही पाई जाती है। रेड-लिप्ड बैटफिश समुद्र की तलहटी में रहने वाली मछली है। यह आम तौर पर रीफ की रेतीली जमीन या समुद्र के फर्श पर पाई जाती है।
रेड-लिप्ड बैटफिश का शरीर हल्के भूरे और ग्रे रंग का होता है, और इसका पेट सफेद होता है। इसके ऊपरी हिस्से पर आमतौर पर भूरे रंग के डॉट्स से बनी एक गहरे भूरे रंग की धारी होती है, जो सिर से शुरू होकर पीठ के सहारे पूंछ तक जाती है। रेड-लिप्ड बैटफिश का थूथन और सींग भूरे रंग के होते हैं। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, इस बैटफिश के होंठ चमकीले, लगभग फ्लोरोसेंट लाल रंग के होते हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे इसने अभी-अभी कोई खून वाला खाना खाया हो या बहुत चमकीली लिपस्टिक लगाई हो। रेड-लिप्ड बैटफिश में सबसे अजीब खूबी इसकी चाल होती है। गैलापागोस कंजर्वेशन ट्रस्ट के अनुसार भले यह खाने की तलाश में समुद्र की तलहटी में तैर सकती है, लेकिन इसके फिन (पंख) नकली पैरों की तरह काम करने के लिए ज्यादा बेहतर होते हैं। इन पैरों का इस्तेमाल यह अपने आस-पास की जगह का जायजा लेते समय चलने और कहीं टिककर बैठने के लिए करती है। इसके सिर पर इलिसियम नाम की एक संरचना होती है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसका इस्तेमाल शिकार को लुभाने के लिए किया जाता है। यह मछली और कीड़े-मकोड़े खाने वाली प्रजाति है, जो मुख्य रूप से दूसरी छोटी मछलियों और झींगे व मोलस्क जैसे छोटे क्रस्टेशियन जीवों को खाती है।
इसकी चाल ज्यादातर मेंढक की तरह डगमगाकर चलने जैसी होती है, लेकिन जब थोड़ी ज्यादा रफ्तार की जरूरत होती है, तो बैटफिश अपने शरीर के नीचे मौजूद पेल्विक फिन से जोर लगाकर और अपनी मजबूत पूंछ का इस्तेमाल करके पानी में आगे बढ़ सकती है।
(मोहिता-हिफी फीचर)

 

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