लेखक की कलम

शुभेन्दु का जलवा कायम

पश्चिम बंगाल में कुछ महीनों पहले ही विधानसभा के चुनाव हुए थे। विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा और उसके सहयोगी दलों के दिग्गज नेताओं ने जमकर प्रचार किया था। भाजपा की प्रचंड बहुमत से सरकार बनी। राजनीति में जीत की समीक्षा नहीं होती लेकिन कहा यही गया कि मोदी और शाह के चलते ही पश्चिम बंगाल में भाजपा को यह अवसर उपलब्ध हुआ है। इसके बावजूद शुभेंदु अधिकारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सका। उन्होंने ही ममता बनर्जी को दोनों सीटों से हराया था। शुभेंदु का जलवा अभी कायम है। यह राज्य में हुए दो उपचुनावों ने साबित कर दिया है। पूर्व मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार हसीरानी रथ ने शुभेंदु अधिकारी की जीत का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1,22,753 वोट से पराजित कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 17 राउंड की गिनती खत्म होने के बाद हसीरानी रथ को 1,64,427 वोट मिले। मिलन प्रधान को 41,674 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के शांति गोपाल गिरि को 5,779 वोट मिले। भाकपा नेता की जमानत जब्त हो गयी। इसी प्रकार भाजपा ने रेजीनगर विधान सभा उपचुनाव भी जीत लिया है। कांग्रेस ने धांधली का आरोप लगाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर में फिर से मतदान कराने की मांग की है। शुभंकर सरकार और कांग्रेस उम्मीदवारों ने बूथ एजेंटों को बाहर करने और मतदाताओं को धमकाने के आरोप लगाये हैं।
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव में ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ), डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार उतारे थे। एआईएसएफ के टिकट पर अली मोहम्मद सब-ए-मिराज खान और रीतब्रत बनर्जी की पार्टी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर एहतेशामुल हक चुनाव लड़ रहे थे। दोनों की जमानत जब्त हो गयी। मिराज खान को 1,607 और एहतेशामुल हक को महज 853 वोट मिले।
नंदीग्राम विधानसभा सीट से 4 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। इनके नाम सईद मोहम्मद, शेख हसीबुल, अब्दुल रफीक साहा और शेख मुजीबर रहमान अली हैं। इनमें सईद मोहम्मद को सबसे ज्यादा 723 वोट मिले। शेख हसीबुल को 325, अब्दुल रफीक साहा को 257 और शेख मुजीबर रहमान अली को 227 वोट मिले। नंदीग्राम के उपचुनाव में महज 643 लोगों ने नोटा (नान आफ द अबव यानी इनमें से कोई नहीं) का बटन दबाया।
दूसरी तरफ, रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा ने आम जनता उन्नयन पार्टी को 75816 वोटों से हराया। कांग्रेस और अन्य दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी। मुस्लिम बहुल रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) को 75,816 वोटों से हरा दिया है। मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 15 राउंड की काउंटिंग के बाद भाजपा प्रत्याशी शंखारभ सरकार विजयी घोषित किये गये। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद उर्फ रॉबिन को पराजित किया ।
कांग्रेस के अब्दुल्लाहिल कैफी की जमानत जब्त हो गयी। उन्हें महज 6,168 वोट मिले। ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी रबीउल आलम चैधरी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मोहम्मद सईद, रीतब्रत बनर्जी की पार्टी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के सफीउज्जमान शेख, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), जातीय उन्नयन पार्टी, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों के अलावा 6 उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गयी है। दूसरे नंबर पर रहे गुलाम नबी आजाद उर्फ रॉबिन को 54,098 वोट मिले हैं। कांग्रेस के कैफी को 6,168, रबीउल आलम चैधरी को 3,847, सीपीएम के मो सईद को 3,797, डीटीसी के सफीउज्जमान शेख को 2,044, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) को 597, जातीय उन्नयन पार्टी के साहीन साहा को 376 और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के विकास चंद्र मिश्रा को 329 वोट मिले हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों में महबूब आलम को सबसे ज्यादा 1,374 वोट मिले हैं. गोलक बनर्जी को 1,227, मजीफुल हक को 657, जलालुद्दीन मिद्दर को 291, सैफुल इस्लाम को 223 और तुषार पांडेय को 211 वोट मिले हैं। रेजीनगर विधानसभा सीट पर 594 मतदाताओं ने नोटा यानी इनमें से कोई नहीं का बटन दबाया।
कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान के दौरान कथित धांधली और ‘वोट लूट’ के आरोप लगाये हैं। पार्टी ने दोनों सीटों पर फिर से मतदान कराने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कोलकाता में पार्टी मुख्यालय विधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी के 100 से अधिक एजेंटों को जबरन बाहर निकाल दिया गया। बाद में लगभग सभी मतदान केंद्रों पर कांग्रेस एजेंटों के साथ मारपीट की गयी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने नंदीग्राम प्रखंड-2 के सभी मतदान केंद्रों और प्रखंड-1 के कई बूथों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा कथित कब्जे का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि इस वजह से मतदाताओं में डर का माहौल बना और आम लोग स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर सके।
इसी तरह नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने मतदान के दौरान ‘वोट लूट’, मतदाताओं को धमकाने और पुलिस तथा सुरक्षा बलों की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि उनके एजेंटों और समर्थकों को धमकाया गया तथा उनके मतदान एजेंटों के पहचान पत्र भी छीन लिये गये।
प्रधान ने दावा किया कि राजाराम चैक इलाके की करीब 100 महिलाएं उनके पास आयीं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के बाहर कुछ लोगों ने उनसे मतदान पर्चियां छीन लीं। कांग्रेस उम्मीदवार के मुताबिक, महिलाओं से कहा गया कि उनका वोट पड़ चुका है। मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें निर्वाचन क्षेत्र में घूमने से रोका। उन्होंने यह भी दावा किया कि वरिष्ठ अधिकारियों के सामने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने उन्हें लाठियों से पीटा। प्रधान के मुताबिक, उन्होंने निर्वाचन आयोग के सामने कई शिकायतें भी दर्ज करायी हैं। बहरहाल, अब यह प्रलाप कोई मायने नहीं रखता।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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