
उत्तराखण्ड को रोपवे हब बना रहे धामी
उत्तराखण्ड मंे तीर्थस्थल के साथ ही पर्यटन स्थल भी प्रचुर संख्या में हैं। इसके चलते देश-विदेश से लोग यहां आते हैं और स्थानीय लोगों को इससे रोजगार भी मिलता है। इसीलिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य मंे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आवागमन की सुविधा देने के लिए रोपवे के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। धामी सरकार की दूरगामी सोच है कि राज्य में 51 रोपवे के साथ 160 किमी. लम्बा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। राज्य मंे पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष 2025-26 मंे 6 करोड़ 3 लाख से ज्यादा पर्यटक और तीर्थयात्री उत्तराखण्ड पहुंचे। इसको देखते हुए सुगम और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था की जा रही है। ऊंची पहाड़ियों पर जहां सड़क मार्ग संभव नहीं है, वहां रोपवे बहुत कारगर साबित हो रहे हंै। ध्यान रहे उत्तर भारत की प्रमुख सिद्ध पीठ पूर्णागिरि धाम चम्पावत जिले मंे स्थित है और गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ की चारधाम यात्रा करना भी हिन्दू धर्मावलम्बी अपना कर्तव्य मानते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं गत दिनों 21 सितम्बर बदरी बिशाल के दर्शन करने पहुंचे थे और वहां उन्होंने प्रदेश की सुख-सुविधा समृद्धि की कामना की थी।
अब उत्तराखण्ड को देश का रोपवे हब बनाने की बड़ी तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेज कर दिया गया है। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में प्रदेश में लगभग 160 किमी लंबाई के 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन कनेक्टिविटी का विकास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प है। इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई सेवाओं के साथ ही अब रोपवे कनेक्टिविटी को रफ्तार दी जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन साधन है। इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी 09 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के कड़े रुख को देखते हुए अब परियोजनाओं का काम रफ्तार पकड़ रहा है।
उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते वर्ष 2025 में 06 करोड़ 03 लाख से अधिक पर्यटक/तीर्थयात्री यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था जरूरी है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम व पर्यटन विभाग ने रोपवे परियोजनाओं की जिम्मेदारी ली है। प्राथमिकता में छह परियोजनाएं हैं। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ (रुद्रप्रयाग), गोविंदघाट- हेमकुंड साहिब (चमोली), रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैची धाम (नैनीताल), कनकचैरी-कार्तिक स्वामी (रुद्रप्रयाग), जोशीमठ-औली-गोरसों (चमोली) और रैथल-दयारा बुग्याल (उत्तरकाशी) शामिल हैं।
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस रोपवे के बनने से देहरादून से मसूरी तक का एक से डेढ़ घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। इसके अलावा यमुनोत्री रोपवे बन रहा है। इस रोपवे के बनने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक की करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिल जाएगी। ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे से उत्तर भारत का प्रमुख सिद्धपीठ पूर्णागिरि धाम। यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 01 अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। यह यात्रा भी कठिन पहाड़ी मार्ग से गुजरती है। रोपवे बनने से यात्रियों को राहत मिलेगी।
इसके साथ ही फिजिबिलिटी स्टडी के लिए उत्तराखण्ड मैट्रो को हस्तांतरित रोपवे परियोजनाएं बन रही हैं। इनमें जनपद अल्मोड़ा में रानीखेत-चैबटिया (4 किमी.) कसारदेवी-अल्मोड़ा (2.76 किमी.) अल्मोड़ा-द्वाराहाट दूनागिरी मोटर मार्ग 14 किमी (हनुमान मंदिर)-दूनागिरी मंदिर (.63 किमी.) शामिल है।
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के मुताबिक सबसे पहले ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से पौड़ी जनपद में स्थित नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर फोकस किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की लंबाई छह किमी होगी। पहले चरण में 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश में यातायात का दबाव काफी कम हो सकेगा। चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुँच आसान होगी बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गत 20 सितम्बर को श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। सीएम धामी ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आस्था पथ सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जा रही सुविधाओं से धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और
आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



