अभिजीत दिपके का सियासी चेहरा

काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कुछ दिनों पहले यह साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी देश की व्यवस्था को बदलने के लिए सक्रिय राजनीति करेगी। उनके मौजूदा रुख से यह पता नहीं चल रहा है कि सीजेपी किस राजनीतिक दल से जुड़ेगी लेकिन यह भी साफ है कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ भी सीजेपी नहीं चल पायेगी। इसलिए अभिजीत दिमके का सियासी चेहरा अभी साफ नहीं है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने गत 4 अक्टूबर को एक वीडियो जारी करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की तारीफ करते हुए उन्हें देश का मस्तिष्क बताया। इसके अलावा उन्होंने महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर की भी तारीफ की। इससे सीजेपी की सियासत का चेहरा अभी साफ नहीं है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी प्रदर्शन कर चुकी है। मशहूर फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज भी 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए निर्देशक ने कहा कि ऐसे मुद्दों का समर्थन करना एक पर्सनल चॉइस है।
विशाल भारद्वाज ने कहा कि उन्हें इस प्रोटेस्ट के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है। वे बस अपना सपोर्ट देने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि किसी के साथ कुछ हुआ है। मैं सिर्फ यहां अपना समर्थन देने आया हूं। बॉलीवुड से शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और सिंगर-कम्पोजर विशाल ददलानी समेत कई और लोग भी 2 अक्टूबर को सीजेपी द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। विशाल भारद्वाज ने कहा, बॉलीवुड को इस मुद्दे का समर्थन करना चाहिए या नहीं, यह हर किसी का निजी मामला है। मैं बॉलीवुड का हिस्सा हूं, लेकिन बाकी लोग सोच सकते हैं कि बड़े सितारों को आगे आना चाहिए। यह हर किसी की अपनी पसंद है। अगर किसी को लगता है कि जो हो रहा है वह गलत है, तो उन्हें सपोर्ट में बाहर आना चाहिए। अगर उन्हें ऐसा नहीं लगता, तो वे न आने का फैसला कर सकते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक भारतीय युवा-आधारित और व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है। इसकी स्थापना 16 मई 2026 को राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की बेरोजगारी पर कटु सत्य टिप्पणी के विरोध में की थी। युवा वर्ग का अप्रत्याशित रूप से इसे समर्थन मिल रहा है।
अभिजीत दिपके की इस टिप्पणी ने सभी का ध्यान खींचा है। दिपके ने लिखा कि महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत की राजनीतिक और सामाजिक विरासत के तीन अलग-अलग स्तंभ थे। उन्होंने महात्मा गांधी को भारत की आत्मा, अंबेडकर को भारत की रीढ़ और जवाहर लाल नेहरू को भारत का मस्तिष्क बताया और कहा कि उनके जैसे बनने की आपकी औकात नहीं है। यहां आपकी के तात्पर्य को को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह बयान तब आया है जब सीजेपी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (विशेष गहन समीक्षा-एसआईआर) में हुई गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। मुंबई पुलिस ने अगले दिन अर्थात 3 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में आयोजकों और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, सरकारी अधिकारी के कानूनी आदेश को जानबूझकर न मानने और अन्य अपराधों के लिए दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि यह मामला शिवाजी पार्क इलाके के एक निवासी की शिकायत पर दर्ज किया गया। इस मामले में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। जांच चल रही थी। सीजेपी ने अपने संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में 2अक्टूबर को शिवाजी पार्क में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। वे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (विशेष गहन संशोधन) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वे वोटर लिस्ट से जुड़ी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया को रोकने की भी मांग कर रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और कहा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मकसद डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य वोटरों को हटाना था।
सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में मशहूर अभिनेत्री शबाना ने कहा, हमारा वोट हमारा अधिकार है। यह हमारी आवाज है। हम बचपन से यही सुनते आ रहे हैं, लेकिन जब हमसे हमारा अधिकार ही छीन लिया जाता है, जब वोटर लिस्ट से हमारे नाम हटा दिए जाते हैं तो हम क्या करेंगे? हम विरोध करेंगे। यह हमारा अधिकार है।
अब कुछ बातें सीजेपी के बारे में। इसके नाम की वजह है मई 2026 में युवाओं और बेरोजगारों के लिए काॅकरोज शब्द के इस्तेमाल की एक टिप्पणी। इसी के विरोध में इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसमें इस अपमानजनक शब्द को युवाओं ने खुद अपना लिया। यह एक गैर-पंजीकृत और प्रतीकात्मक राजनीतिक मंच है। नीट पेपर लीक मामले में प्रेशर बनाया और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। सीजेपी सरकार, न्यायपालिका और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। इसकी प्रमुख मांगें व मुद्दे हैं न्यायिक सुधार, चुनावी अखंडता, मीडिया एकाधिकार और बेरोजगारी दूर करना। इन मुद्दों को उठाना इसका मुख्य उद्देश्य है। नीट पेपर लीक और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे जैसी मांगों को लेकर इस संगठन ने मुंबई (शिवाजी पार्क) और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किए हैं। सोशल मीडिया (विशेषकर इंस्टाग्राम और एक्स) पर इस आंदोलन को युवाओं का भारी समर्थन मिला है और इसके लाखों फॉलोअर्स हैं। इसप्रकार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के युवाओं और कॉकरोच को लेकर दिए गए बयान के बाद एक सोशल मीडिया कैंपेन कॉकरोच जनता पार्टी खासी चर्चा में है। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणियों पर सफाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया। इसके बावजूद इंटरनेट पर इसके नाम से वेबसाइट बन चुकी है और इंस्टाग्राम पर इसके 40 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। और बताया जा रहा है कि दो लाख से अधिक लोगों ने वेबसाइट पर इसकी सदस्यता के लिए खुद को रजिस्टर्ड किया है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



