फिर चर्चा में अंकिता काण्ड

उत्तराखण्ड में अंकिता भंडारी की संदिग्ध मौत का मामला दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने के बाद फिर चर्चा में आया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम को 12 अक्टूबर 2026 को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता भंडारी की 2022 में हुई कथित हत्या में भी जोड़ा गया था। उत्तराखण्ड के एक रिसोर्ट में 19 वर्षीय अंकिता रिसेप्सनिस्ट थी। सितंबर 2022 मंे उसका शव नहर में बरामद हुआ था। हालांकि इस मामले में तीन युवक जेल में हैं लेकिन अंकिता के माता-पिता ने गत दिनों दिल्ली में इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस भी शामिल थी। अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के वनंतरा रिसोर्ट से लापता हुई। अगले दिन ही उसके लापता होने की रिपोर्ट राजस्व पुलिस में दर्ज हुई। हत्या के आरोप में तीन लोग 21 सितंबर को गिरफ्तार किये गये। कोर्ट के आदेश पर आरोपित पुलकित, सौरभ व अंकित को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। घटना के 6 दिन बाद 24 सितंबर को चीला नहर बैराज से अंकिता का शव बरामद हुआ था। उसी दिन तत्कालीन डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन हुआ। पुलकित, सौरभ और अंकित के खिलाफ ही लम्बी चार्ज शीट पेश की गयी थी और 30 मई 2025 को इन तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दिल्ली में गत प्रदर्शन हुआ, जिसमें इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता ने पूरे देश में आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में न्याय दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को मई 2025 में दोषी ठहराया गया और अब वे जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। हालांकि इस मामले की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शेखर सुयाल ने एक बार फिर से दावा किया है कि इस मामले में किसी वीआईपी की कोई भूमिका नहीं थी।
अंकिता हत्याकांड के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। सुयाल उस वक्त पौड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और एसआईटी के सदस्य भी थे। सुयाल ने जनवरी 2026 में मीडिया से बातचीत में कहा, 18 से 22 सितंबर, 2022 के बीच रिसॉर्ट में ठहरने या बुकिंग कराने वाले हर व्यक्ति की हर पहलू से जांच की गई, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली कि कोई व्यक्ति वास्तव में वीआईपी था।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रातभर चले प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत कई लोगों को इंडिया गेट पर हिरासत में ले लिया था। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कुछ देर हिरासत में रखे जाने के बाद उन्हें सुबह पांच बजे छोड़ दिया गया। अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को कांग्रेस ने बेबस मां-बाप के साथ बेरहमी से किया गया एक्शन बताया है। अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि बेटी की हत्या के मामले में चल रही सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर क्षेत्र स्थित वनंतरा टूरिस्ट रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। इस मामले में अपना नाम सामने आने के बाद बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने आरोप लगाया था कि हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सुनियोजित आपराधिक साजिश रची थी। दुष्यंत गौतम को केंद्र सरकार ने 12 अक्तूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया है।
अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, क्या एक्शन है यह? एक बेरहमी से किया हुआ बेबस मां-बाप के साथ एक्शन जो चार साल से न्याय मांग रहे थे। उनको न्याय देने के बजाय जो मुख्य आरोपी है उसको राज्यपाल बना रहे हैं और उसके बाद मां-बाप के साथ बेरहमी कर रहे हैं। कायर की तरह आकर सुबह 6.00 बजे से पहले लड़कियों को उठा रहे हैं यहां से। क्या ढंग है यह दिल्ली पुलिस का? अंकिता भंडारी की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक वे विरोध करती रहेंगीं।
उन्होंने कहा, हम ऐसे बैठे रहेंगे। चाहे हम अपने घर में रहेंगे। अगर हमें नहीं बैठने देंगे तो हम अपने घर में भूख हड़ताल में बैठ जाएंगे। हम सरकार को दुष्यंत की नियुक्ति निरस्त करनी पड़ेगी। अगर निरस्त नहीं करेगी तो पूरे भारतवर्ष में जनता सड़कों पर उतर जाएगी। इसकी जवाबदेही सरकार की होगी। इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना की निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पीड़ितों की आवाज दबाती है और सवाल करने वालों को हटा देती है।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, सुबह के 4 बजे जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे- बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ इतना मांग रहे थे कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। राहुल ने कहा कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे। जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया। इस सरकार की पहचान यही है- पीड़ितों की आवाज दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो। अंकिता भंडारी मामले में आरोप लगाया गया था कि उन्हें भाजपा के पूर्व नेता के बेटे पुलकित आर्य द्वारा संचालित एक रिसॉर्ट में मेहमानों को यौन सेवाएं प्रदान करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
जनवरी 2026 में एक अज्ञात वीआईपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले ने फिर से ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि वीआईपी की संलिप्तता का जिक्र करने वाले आरोप और वायरल ऑडियो और वीडियो क्लिप सामने आए थे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 9 जनवरी, 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी विशेष अपराध शाखा के माध्यम से मामला दर्ज किया। सीबीआई ने तब से इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिये हैं, जिनमें विशेष जांच दल की रिपोर्ट, पुलिस एफआईआर और अन्य दस्तावेज शामिल हैं।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



