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शालिनी पांडे निभाती हैं बहुआयामी किरदार

शालिनी पांडे उन अभिनेत्रियों में से हैं, जिन्होंने कभी खुद को किसी एक फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रखा। उनके लिए हमेशा कहानी और किरदार सबसे अहम रहे हैं, यही वजह है कि उन्होंने तेलुगु, तमिल, हिंदी और गुजराती प्रोजेक्ट्स में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई। शालिनी पांडे ने 2017 में सुपरहिट फिल्म अर्जुन रेड्डी से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और अपनी पहली फिल्म से ही उन्होंने देशभर में पहचान कायम कर ली।
इसके बाद उन्होंने महानटी (2018), 118 (2019) और इद्दारी लोकम ओकाटे (2019) जैसी फिल्मों में नजर आकर उन्होंने तेलुगु इंडस्ट्री में अपनी मजबूत जगह बनाई। तेलुगु फिल्मों में सफलता के बाद शालिनी ने तमिल सिनेमा की ओर अपने कदम बढ़ाए। 100 फीसद काधल (2019) और निशब्दम (2020) जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया और नए दर्शकों से जुड़ने में सफलता हासिल की। उसके बाद शालिनी पांडे ने बॉलीवुड में न सिर्फ बमफाड़ (2020), जयेशभाई जोरदार (2022) और महाराज (2024) जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई, बल्कि ओटीटी पर डब्बा कार्टेल (2025) और बैंडवाले (2026) जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए एक बहुमुखी कलाकार के रूप में खुद को स्थापित किया। गौरतलब है कि बहुभाषी कलाकार के रूप में शालिनी ने गुजराती प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है। लास्ट चांस (2017) जैसी गुजराती शॉर्ट फिल्म में उनकी भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि वह हमेशा अच्छी कहानियों को भाषा से ऊपर रखती हैं।
अर्जुन रेड्डी की प्रीति से लेकर महाराज की किशोरी तक, शालिनी पांडे ने पर्दे पर कई अलग-अलग किरदारों को अपनी पहचान दी। महानटी, बमफाड़, जयेशभाई जोरदार और डब्बा कार्टेल जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ उन्होंने अपने अभिनय सफर में कई नए रंग जोड़े।
शालिनी ने कहा, जब शुरुआत में मैं आई थी अर्जुन रेड्डी के बाद मेरे लिए मुश्किल ये था कि मैं कुछ भी अगर एड करना चाहती थी फिल्म में तो वो लोग विश्वास ही नहीं करते थे कि मैं इंटेलीजेंट भी हो सकती हूं। (हिफी)

 

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