
आकाश को ‘बुआ’ ने किया माफ
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के महासमर मंे सशक्त महारथी बनाने के लिए मायावती अभी उधेड़बुन की स्थिति से उबर नहीं पायी हैं। पार्टी की कमान वह स्वयं संभाल रही हैं लेकिन किसी ऐसे ‘अपने’ की भी तलाश है जो पूरी तरह वफादार और राजनीति में पटु भी हो। उनके दो भतीजे इस मामले मंे बार-बार परीक्षा दे रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही बसपा प्रमुख ने बड़े भतीजे आकाश आनंद को यह कहते हुए पार्टी की जिम्मेदारियों से हटा दिया था कि आकाश आनंद अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहा है। मायावती का इशारा आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की तरफ था जिनको बसपा ने पहले राज्यसभा मंे भेजा और फिर पार्टी से ही निकाल फेंका। अब उन्हांेने राजनीतिक संन्यास की घोषणा कर दी है और आकाश आनंद ने भी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए बसपा मंे सेवा करने का अनुरोध किया था। आकाश ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह बसपा छोड़कर भी किसी अन्य दल में नहीं जाएंगे। आकाश आनंद के इस माफीनामे को बुआ मायावती ने गत 5 अक्टूबर को स्वीकार कर लिया और उन्हंे पुराना दायित्व सौंप दिया है। इतना ही नहंी बसपा सुप्रीमों ने आकाश आनंद के पिता और उनके छोटे भाई ईशान प्यार और आशीर्वाद दिया है।
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद की फिर से बसपा में वापसी हो गई है। उन्हें बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके कहा, जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु जबरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बीएसपी ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब खघसकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण जबरदस्त तैयारी भी की जा रही है। मायावती ने कहा, यहां यह भी कहना है कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा बहुजन समाज ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनजर रखते हुये व खासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिए ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेक सख्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-जाहिर हैं। मायावती ने कहा, वैसे तो आकाश आनंद का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहे हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ जरूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है। इसके बाद से आकाश आनंद के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका खास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया एक्स पर किया गया।
मायावती ने कहा, इसको लेकर पार्टी के अधिकांश लोगों का यही कहना है कि आकाश आनंद के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई जिम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौका दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई ईशान आनंद ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में ईशान आनंद ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुए यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में माँ बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से जरूर निभायेंगे।
मायावती ने कहा, ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आकाश आनंद को पुनः बीएसपी का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर फिर से पार्टी में कार्य करने का मौका दे रही है। मायावती ने कहा, इन्हीं कुछ जरूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही आकाश आनंद के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई ईशान आनंद को तथा इनके पिता आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूं। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए खासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूं।
बसपा से निष्कासन के बाद आकाश आनंद ने चुप्पी तोड़ते हुए मायावती से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी। आकाश आनंद ने कहा कि मेरी चुप्पी को गलत समझा गया। मैं किसी भी पार्टी में नहीं जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर से बसपा में काम करना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में आकाश आनंद ने मायावती से कहा कि आप मेरी राजनीतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं और मेरी बुआ मां भी हैं। राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूं। उन्होंने लिखा पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की खबरें और अफवाहें चल रही हैं। मैं साफ कर
देना चाहता हूं कि मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। बसपा मेरे लिए सिर्फ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है। अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फैसला पूरी तरह उचित है और मैं उस फैसले के साथ खड़ा हूं। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी जिम्मेदारी है। इसी के बाद बुआ का आशीर्वाद मिला है।
मायावती ने पिछले दिनों आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। मायावती ने यह भी कहा था कि आकाश और उनकी बहन को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपेगी। उन्होंने आकाश के छोटे भाई पर भरोसा जताते हुए पार्टी में काम करने का मौका दिया।
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पार्टी में अपने भाई आनंद कुमार के परिवार की भूमिका को लेकर बड़ा ऐलान भी किया था। मायावती ने कहा है कि अब परिवार में से केवल ईशान आनंद को पार्टी में आगे किया जाएगा। वहीं, आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से दूर रखने की बात कही गई है। आकाश आनंद को अब फिर से जिम्मेदारी दे दी गयी है।
मायावती ने कहा था कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के आग्रह पर उन्होंने उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे किया था।
हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों का हवाला देते हुए मायावती ने कहा कि उन्हें कुछ दिन पहले पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने आकाश के अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आने का भी आरोप लगाया और कहा कि उन्हें पार्टी में वापस लेना पार्टी के लिए विश्वासघात होगा। बहरहाल, मायावती को कोई अपना फिर मिला है। (हिफी)



