लेखक की कलम
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संवैधानिक पदों की गरिमा
लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाएं अति महत्वपूर्ण होती हैं। राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा और विधानसभाओं के अध्यक्ष भले ही सीधे-सीधे जनता के…
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सुप्रीम कोर्ट का एक दुर्लभ फैसला
मौत के बाद इंसान का क्या होता-यह हम लोग नहीं जानते। कुछ लोग ऐसा ज्ञान भले ही बताएं जो अंध…
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भगवंत मान पर कांग्रेस का आरोप
राजनीति मंे आरोप-प्रत्यारोप की शालीन परम्परा रही है लेकिन अब मतभेद रखने वाले नेता बाल की खाल निकालने का प्रयास…
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सुक्खू के सामने भाजपा चित
सियासत की दुनिया में भाजपा देश भर मंे कांग्रेस को नचा रही है लेकिन हिमाचल मंे कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुखविन्दर…
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प्रोटोकॉल और पॉलिटिक्स
प्रोटोकाॅल अर्थात बड़ों का सम्मान हमारी भारतीय परम्परा है। राजनीति और नौकरशाही में इसे प्रोटोकाल कहा जाता है। इन दिनों…
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नफरत भरी बर्बरता का इलाज जरूरी
देश में कुछ लोगों में मजहबी कट्टरता तालिबानी हद तक बढ़ रही है। कभी कन्हैया लाल के कत्ल तो कभी…
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नीतीश ने भी अपनाया परिवारवाद
राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी नीतीश कुमार ने भी अंततः परिवारवाद को अपना ही लिया। यह बात कुछ अटपटी लगती है…
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राज्यसभा के रास्ते नीतीश का वानप्रस्थ गमन!
नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा का पर्चा भर कर वानप्रस्थ गमन का रास्ता चुन लिया है। पिछले करीब 20 सालों…
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रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल
कहते हैं, समझने वाले समझ गये और न समझे वो अनाड़ी है…। राजनीति में ऐसे ही कारनामे होते रहते हैं।…
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नीतीश की मजबूरी या मर्जी
बिहार में होली के रंग में सराबोर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का चेहरा कितना सच बोल रहा है और कितना छिपा…
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