यूपी में चुनाव तैयारी पर शाह की मुहर

उत्तर प्रदेश मंे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी सत्तारूढ़ भाजपा बहुत ही पुख्ता कर रही है। इसीलिए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और कुशल रणनीतिकार बीएल संतोष के बाद अब केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ आ रहे हैं। दरअसल, भाजपा इस बात को पूरी तरह सुनिश्चित करना चाहती है कि 2024 के समीकरण न दोहराए जा सकें। इन चुनावों मंे भाजपा को कांग्रेस और सपा के गठबंधन शिकस्त दे दी थी।
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को भारतीय जनता पार्टी ने संगठन स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी विनोद तावडे के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह भी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के लिए लखनऊ पहुंचेंगे। ये बैठक 30 और 31 अक्टूबर को होगी। बैठक में मिशन-2027 की रणनीति के साथ उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर भी चर्चा होने की संभावना है। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटें घटने के बाद पार्टी संगठन और बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है। मिशन-2027 के तहत पार्टी की नजर उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी है, जहां पिछले चुनावों में उसे नुकसान हुआ था। अमित शाह के दौरे को इसी तैयारी के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर तैयारियों, क्षेत्रवार चुनावी समीकरण और पिछले चुनावों में कमजोर प्रदर्शन वाली सीटों की समीक्षा पर जोर रह सकता है।
विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में लाने के साथ सरकार और संगठन के बीच तालमेल मजबूत करने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। अमित शाह के दौरे से पहले बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लगातार संगठनात्मक बैठकें कर चुके है। उन्होंने सह प्रभारियों को भी जिम्मेदारी सौंप दी है। उनके दौरों में प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ चुनावी तैयारियों का फीडबैक लेने, बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति और कमजोर सीटों की समीक्षा पर जोर रहा है। पार्टी का प्रयास है कि चुनाव से पहले संगठन की कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के चयन के मानकों, मौजूदा विधायकों के कामकाज और सीटवार राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हो सकती है। जिन सीटों पर पार्टी को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहां नए चेहरों को मौका देने या मौजूदा विधायकों को दोबारा उतारने या टिकट बदलने पर भी विचार होगा। बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार हो रहे प्रदर्शन और जेन -जी प्रोटेस्ट के प्रभाव को कम करने और सरकारी योजनाओं के लाभ को प्रचार का जरिया बनाया जाएगा। इसके साथ-साथ उन नाराज वोटरों को भी अपने पक्ष में करने पर काम किया जाएगा जो 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी से दूर चले गए थे।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



