छत्तीसगढ़ कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में वापसी का जोर शोर से प्रयास कर रही है। इसी रणनीति के तहत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पहले पंजाब का प्रभारी बनाया गया था। उन्हें राज्य से दूर रखकर कांग्रेस संगठन की एकता कायम रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसीलिए पार्टी के 36 मंे से 20 नेताओं का निष्कासन रद्द कर दिया गया। इनमें कुकरेजा डोंगरे भी शामिल हैं। गत 19 सितम्बर को अनुशासन समिति ने यह फैसला डैमेज कंट्रोल के तहत लिया है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने आगामी नगरीय निकाय चुनावों और संगठन को मजबूत करने के लिए अनुशासन समिति की बैठक में 20 बागी नेताओं का निष्कासन रद्द कर दिया। राज्य में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले 15 नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए पार्टी ने राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। नए प्रभारी सुखदेव भगत इस प्रक्रिया और आगामी रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं। संगठन को बूथ और ब्लॉक स्तर पर मजबूत करने के लिए रायपुर में कांग्रेस का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें वरिष्ठ नेता ब्लॉक
अध्यक्षों को प्रशिक्षित कर रहे।
छत्तीसगढ़ में आगामी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले 15 नगरीय निकाय चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान बगावत करने वाले 36 नेताओं की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का विरोधी खेमा भी शामिल है। इस बीच राज्य के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी (जेसीसीजे) के कांग्रेस में विलय को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन के भीतर एक बड़ा धड़ा जोगी कांग्रेस की वापसी के पक्ष में है। यही कारण है कि भूपेश बघेल के तमाम विरोध के बावजूद इस प्रस्ताव पर सहमति बनाने की अंदरूनी कोशिशें चल रही हैं। यदि जोगी कांग्रेस का विलय संभव हुआ तो पार्टी के भीतर भूपेश की कमजोर होती पकड़ के दावों को बल मिल जाएगा। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर पार्टी हाईकमान ही लगाएगा।पार्टी की नेता व पूर्व विधायक डा. रेणु जोगी और अमित जोगी ने कांग्रेस में पार्टी के विलय के लिए आवेदन दिया है।
उल्लेखनीय है कि अमित जोगी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके साथ ही, टीएस सिंहदेव के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी कांग्रेस में वापसी के लिए आवेदन दिया है। भाजपा के कुछ बागी नेताओं के भी कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा है।बता दें कि विधानसभा चुनाव 2018 में जेसीसीजे के पांच विधायकों ने चुनाव जीता था, हालांकि उस समय कांग्रेस सत्ता में आई थी और भाजपा के खिलाफ जनता में रोष था। अब नजरें 27 सितंबर को प्रदेश के नवनियुक्त कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के रायपुर दौरे पर टिकी हैं। उनके दौरे के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि जोगी कांग्रेस का हाथ कांग्रेस के साथ जुड़ेगा या नहीं। सुखदेव भगत को इसी महीने प्रदेश का नया कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किया गया है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



