लेखक की कलम

पंजाब में भी दिल्ली की कहानी

इसे एक संयोग भी कहा जा सकता है और राजनीतिक दांव-पेच भी। पंजाब में पांच महीने बाद विधान सभा के चुनाव होने हैं । वहां आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर सीबीआई का छापा पड़ा। सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। तपिश भगवंत मान तक पहुंच सकती है। इसी तरह दिल्ली में जब विधानसभा के चुनाव होने वाले थे, तभी एलजी ने तत्कालीन आप सरकार की नयी आबकारी नीति में भ्रष्टाचार की दुर्गंध महसूस की। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन जारी किये। मंत्री, उपमुख्य मंत्री से लेकर मुख्य मंत्री तक जेल पहुंच गए थे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जाने का यह भी एक कारण माना जा रहा है। अब पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले वही कहानी शुरू हुई है। नतीजा देखना बाकी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के चंडीगढ़ स्थित आवास पर गत 6 अक्टूबर को सीबीआई ने छापेमारी की। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के एक दिन बाद हुई है, जिसमें कोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपते हुए केस दर्ज करने का निर्देश दिया था। राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि इससे पंजाब के सीएम भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सीबीआई ने पंजाब के सीएम कैंप के ऑफिस में छापेमारी की है। इस कार्रवाई पर सीएम भगवंत मान की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। सीबीआई ने सीएम भगवंत मान के ओएसडी समेत 6 के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। इस प्रकार पंजाब में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई हुई है। इस छापेमारी को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान भी सामने आ गया है । उन्होंने कहा है कि उनको जो लोगों से प्यार मिल रहा है, उससे बीजेपी घबरा गई है। पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जांच के आदेश को चुनौती दी है। कोर्ट से अर्जेंट सुनवाई की मांग करते हुए कहा- राज्य में जल्द चुनाव होने वाले हैं, इसलिए मामले की सुनवाई शीघ्र होनी चाहिए।
मामला क्या है, इस प्रकरण पर भी नजर डाल लें। यह कार्रवाई पंजाब में कथित कैश फॉर पोस्टिंग और टेंडर घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में की जा रही है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। कोर्ट ने सीबीआई को जल्द केस दर्ज करने और दो महीने के अंदर जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे। इसी सिलसिले में चंडीगढ़ के सेक्टर 2 के हाउस नंबर 50 यानी पंजाब सीएम के कैंप ऑफिस में सीबीआई की छापेमारी हुई है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, बीजेपी ने पंजाब चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। मेरे कैंप ऑफिस पर सीबीआई का छापा पड़ा। अब पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए पंजाब में ईडी और सीबीआई का गलत इस्तेमाल किया जाएगा। लोगों से मिल रहे प्यार से बीजेपी घबरा गई है।
पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस, कोठी नंबर 50, सेक्टर-2 में 6 अक्टूबर शाम करीब 6 बजे सीबीआई की टीम पहुंची और छापेमारी शुरू की। सीबीआई की टीम दो गाड़ियों में आई थी। उनके साथ एक बस में सीआरपीएफ के जवान भी मौजूद थे। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए 5 अक्टूबर देर रात करीब 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सरकार ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने से पहले ही सीबीआई ने पंजाब में कार्रवाई शुरू कर दी।
सीबीआई की कार्रवाई सिर्फ चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है। मोहाली के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजवीर घुम्मन के संगरूर जिले के घराचों गांव स्थित घर पर भी सीबीआई की रेड हुई। इस मामले पर आप नेता केजरीवाल ने भी अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा, चुनाव से दो महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई की रेड बीजेपी की बौखलाहट का नतीजा है। जब से सेंटर में बीजेपी की सरकार आई है उसने पंजाबियों के साथ हमेशा ही धक्का किया है चाहें किसान आंदोलन हो, पंजाब के पानी का मुद्दा हो, पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा हो और अब तो उनके चुने हुए मुख्यमंत्री के साथ भी धक्का कर रही। बीजेपी चुनाव लड़के पंजाब में जीत नहीं सकती तो ईडी-सीबीआई के सहारे चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन पंजाबियों ने अपना मन बना लिया है और बीजेपी के सीबीआई रेड का जवाब आने वाले चुनाव में भगवंत मान को 100़ सीटों से जीता कर दोबारा मुख्यमंत्री बनाकर देंगे।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिली रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी और उसके साथियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एफ आई आर दर्ज की है। आरोप है कि आरोपी पैसे के बदले अधिकारियों, जिसमें आईएएस और आईपी एस के अधिकारी भी शामिल हैं, की पोस्टिंग और विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करते थे। सीबीआई का दावा है कि उसके पास कम से कम 21 अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग में लेन देन के सबूत हैं।इसके अलावा नीति बनाने, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तें, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व व जमीन से जुड़े मामलों में भी दखल देने के आरोप हैं।
सीबीआई के मुताबिक, आरोपी सरकारी कर्मचारियों पर यह भी आरोप है कि वे सरकार की ओर से आदेश और नीतियां जारी होने से पहले उनके ड्राफ्ट निजी लोगों को उपलब्ध कराते थे। इस मामले में सीबीआई ने पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुमन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर, आर.एस. नागरा और अज्ञात सरकारी अधिकारियों व निजी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में दो सरकारी कर्मचारियों के अलावा बिचैलियों और अन्य सहयोगियों को भी आरोपी बनाया गया है। एफआईआर करने के बाद सीबीआई ने चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल 8 जगहों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान आरोपियों से जुड़े ठिकानों से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार
और बीजेपी की हताश राजनीतिक कार्रवाई बताया है, जबकि भाजपा
का कहना है कि यह पंजाब एवं
हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश और नियमों के तहत हुई है। पंजाब में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अब सीबीआई करेगी, जिसमें मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुमान समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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