लेखक की कलम

स्मृति ईरानी संभालेंगी छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की राजनीति में सितम्बर 2026 के अंतिम सप्ताह में संगठनात्मक बदलाव किये गये हैं। राज्यसभा सांसद स्मृति ईरानी को राज्य का प्रभारी तैनात किया गया है। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ के साथ ही हरियाणा का भी प्रभार संभालेंगी। सिद्धार्थ शंभू उनकी सहायता करेंगे। भाजपा ने उन्हंे सहप्रभारी बनाया है। माना जा रहा है कि
भाजपा छत्तीसगढ़ में चुनावी रणनीति अभी से बना रही है। राज्य में आरोप-प्रत्यारोप की गतिविधियां भी
तेज हो गयी हैं। पंजाब से अवकाश मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोल ब्लाक आवंटन और खदानों
की नीलामी का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को खुली चुनौती
दी है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य के विकास कार्यों और विभिन्न विभागांे की समीक्षा बैठकों पर ज्यादा
ध्यान दे रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने स्मृति ईरानी को एक महीने के अंदर ही दूसरी बार बड़ी जिम्मेदारी दी है। एक महीने पहले यानी अगस्त 2026 में स्मृति ईरानी को बीजेपी ने बड़ी जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय महासचिव बनाया था। इसके एक महीने बाद आज उन्हें दो बेहद अहम राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्मृति ईरानी को फिर बड़ी जिम्मेदारी दी है। संगठन में गत दिनों हुए बड़े बदलाव के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यानी स्मृति को दोहरी जिम्मेदारी मिली है। एक महीने पहले (अगस्त 2026) ही उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था और अब दो राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। ये बताता है कि किस तरह स्मृति का कद एक बार फिर बीजेपी में बढ़ता जा रहा है।
पिछले (2024) लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को अमेठी में कांग्रेस के प्रत्याशी किशोरी लाल से हार का सामना करना पड़ा था। स्मृति को 372032 वोट मिले थे और वह दूसरे नंबर पर रही थीं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल ने 539228 वोट हासिल करके स्मृति को पटखनी दे दी थी। इसके बाद उन्हें सरकार की जगह संगठन में एक्टिव किया गया था। एक महीने पहले यानी अगस्त 2026 को स्मृति ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए बीजेपी ने नेशनल जनरल सेक्रेट्री बनाया था। इसके एक महीने बाद ही उन्हें दो बेहद अहम
राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है।बीजेपी के लिए छत्तीसगढ़ और हरियाणा दोनों ही सियासत की दृष्टि से बेहद अहम राज्य हैं। दोनों ही राज्यों में इस वक्त बीजेपी की सरकार है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी दोनों राज्यों में स्मृति ईरानी की रणनीति और राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है। आने वाले चुनावों में स्मृति के चुनावी कौशल का फायदा बीजेपी को मिलने की पूरी उम्मीद है। अमेठी में मिली करारी हार के दो साल बाद बीजेपी ने स्मृति को बड़ी जिम्मेदारी दी है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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