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मुनीर सऊदी अरब की मदद को भेजेंगे सैनिक

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लगातार संघर्ष जारी है। हूती सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, यमनी समूह ने रियाद में किंग खालिद एयरपोर्ट और राबिघ में अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया। सऊदी अरब में आभा एयरपोर्ट, खमीस मुशैत एयरबेस और नज्रान व जाजान प्रांतों में स्थित ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने सऊदी अरब में कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है। इन हमलों में रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राबिघ में अरामको रिफाइनरी भी शामिल हैं। गत 5 अक्टूबर को टेलीग्राम पर जारी एक बयान में, हूती मिलिट्री के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा कि विद्रोही गुट ने बड़ी तादाद में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल करके तीन खास मिलिट्री ऑपरेशन किए। सरी के मुताबिक, पहले ऑपरेशन में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। सऊदी अरब ने यमनी सरकार को अपना पूर्ण राजनीतिक और सैन्य समर्थन दोहराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से समर्थन देने का आह्वान किया।
यमन के हूती विद्रोहियों से लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का कहना है कि उसकी नौसेना ने होदेदाह प्रांत में एक सैन्य अभियान चलाया। हथियारों के गोदाम, विस्फोटक नावों के भंडार और समुद्री बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया गया। तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने आपसी रक्षा समझौते के तहत रोकथाम के उपाय लागू करने और यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों का मुकाबला करने के लिए खाड़ी देश में तेजी से सेना तैनात करने पर सहमति जताई है। रियाद में तीनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों की इमरजेंसी मीटिंग के बाद इस फैसले का ऐलान किया गया। इसी साल 7 अगस्त को हुए समझौते के बाद से यह पहली बार है, जब मक्का अलायंस फॉर डिफेंस को एक्टिव किया गया है। इस समझौते में कहा गया है कि तीनों देशों में से किसी पर भी हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा। यह नाटो की स्थापना संधि के मुख्य प्रावधान जैसा ही है, जिसमे इस्लामिक नाटो ही कहा जाता है। (हिफी)

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