तीज-त्योहार

सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी)

सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी)
यह एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और विघ्नों के नाश के लिए किया जाता है।

🌙 व्रत का महत्व
• इस दिन भगवान गणेश की उपासना की जाती है।
• मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति आती है।
• इसे कई स्थानों पर तिलकुटा चौथ, माघी चौथ भी कहा जाता है।

🌾 व्रत विधि (संक्षेप में)
1. प्रातः स्नान कर संकल्प लें।
2. दिन भर निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है (परंपरा अनुसार)।
3. संध्या को गणेश जी की पूजा—
• दूर्वा, तिल, गुड़, लड्डू अर्पित करें।
4. चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

🌕 चंद्र दर्शन का महत्व
• सकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूर्ण नहीं माना जाता।
• इसलिए चंद्र उदय का समय देखना आवश्यक होता है।

इस साल सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) 2026 की तिथि इस प्रकार है👇
📅 6 जनवरी 2026, मंगलवार को यह व्रत रखा जाएगा। यह दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है।
🕗 तिथि विवरण:
•चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 08:00 बजे के आसपास
•तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2026 को सुबह तक (लगभग 06:50 बजे तक)
•इसी कारण 6 जनवरी को सकट चौथ का व्रत किया जाता है।
🙏 यह व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित है और श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं तथा शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं।पुत्रों की दीर्घायु का व्रत सकट चौथ
🌙 सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) की संपूर्ण कथा
प्राचीन काल में एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। दोनों निःसंतान थे और इस कारण बहुत दुःखी रहते थे। वे रोज़ भगवान से संतान सुख की प्रार्थना करते थे।
एक दिन माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आई। ब्राह्मण की पत्नी ने किसी साध्वी से सकट चौथ व्रत के बारे में सुना। उसने निश्चय किया कि वह इस दिन निर्जल व्रत रखेगी और पूरे मन से भगवान गणेश की पूजा करेगी।
उसने सुबह स्नान कर संकल्प लिया, दिनभर व्रत रखा और संध्या के समय गणेश जी की मूर्ति बनाकर दूर्वा, तिल और गुड़ के लड्डू अर्पित किए। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया और व्रत का पारण किया।
भगवान गणेश उसकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे पुत्र रत्न का वरदान दिया। कुछ समय बाद उसके घर एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया। परिवार में आनंद छा गया।
परंतु एक दिन वह बालक गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। माता-पिता बहुत चिंतित हुए। तब माँ ने फिर से सकट चौथ का व्रत किया और पूरे विश्वास के साथ गणेश जी से पुत्र की रक्षा की प्रार्थना की।पार्थिव गणेश की स्थापना एवं पूजन
भगवान गणेश ने बालक को जीवनदान दिया। वह पूर्णतः स्वस्थ हो गया।
🌼 कथा से शिक्षा
•सकट चौथ का व्रत संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए किया जाता है।
•इस व्रत में चंद्र दर्शन अनिवार्य है।
•श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत हर संकट को दूर करता है।
इसी कारण से तब से लेकर आज तक माताएँ अपने बच्चों की मंगल कामना के लिए सकट चौथ का व्रत करती हैं। 🙏

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