
राजनीति मंे आमने-सामने की कम, साजिश की लडाई ज्यादा होती है। राष्ट्रीय दलों से लेकर क्षेत्रीय दल तक इस रोग से ग्रस्त हैं। पंजाब में सरकार चला रहे आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान भी साजिश की लड़ाई मंे उलझ गये हैं। इस साजिश ने उन्हें अकाल तख्त की बेअदबी के शिकंजे मंे फंसा दिया है और अब अकाल तख्त ने भगवंत मान को गुरु ग्रंथ साहिब का दोषी और पंथ विरोधी करार दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान इसे एक साजिश बता रहे हैं।
दरअसल कुछ महीने पहले की बात है जब एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में एक व्यक्ति श्री गुरु साहिबान की बेअदबी करता दिखाया गया था। उस शख्स का हुलिया हूबहू भगवंत मान से मिलता था। कद-काठी ही नहीं पहनावा तक मान का ही पता चलता था। इस वीडियो ने पूरे राज्य में तहलका मचा दिया था और अकाल तख्त ने भगवंत मान को 15 जनवरी 2026 को अपने सामने पेश होने का हुक्म जारी किया। मान अकाल तख्त के सामने पेश भी हुए और कथित वीडियो को कूट रचित बताया। इस पर अकाल तख्त ने मान से पूछा था कि वीडियो के असली या नकली होने की जांच किस प्रयोगशाला से करायी जाए?
भगवंत मान ने कोई जवाब नहीं दिया तो अकाल तख्त ने दो अलग-अलग सेंट्रल फोरेंसिक लैब से जांच करायी। जांच मंे वह वीडियो असली पाया गया। यह मामला अब चुनावी मुद्दा बन गया है क्योंकि अगले साल ही पंजाब मंे भी विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से प्रारम्भ होगा और भगवंत मान का गुरु दोषी और पंथ विरोधी मुद्दा भी उठेगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनकी आपत्तिजनक वीडियो के लिए श्री अकाल तख्त साहिब ने गुरु का दोषी और पंथ विरोधी करार दिया है। पांच सिंह साहिबानों की मीटिंग में ये फैसला लिया गया।
अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सिख संगत मुख्यमंत्री का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वीडियो के बारे में अकाल तख्त साहिब पर आकर झूठ बोला कि ये वीडियो एआई द्वारा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो शख्स अकाल तख्त साहिब पर आकर झूठ बोल सकता है और वीडियो जैसा दिख रहा है वैसी हरकत कर सकता है उससे सिख पंथ हितैषी फैसलों की उम्मीद नहीं की जा सकती।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की दो फोरेंसिक लैब में जांच कराई गई और वीडियो असली पाया, जिसमें कथित तौर पर भगवंत मान जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वीडियो से न तो छेड़छाड़ की गई है और न ही यह एआई से बनाया गया था। कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि जब मान ने घोषणा की थी कि वे वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए तैयार हैं,
जिसके बाद जनवरी में अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। साथ ही पंजाब सरकार द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिलाने के लिए बनाए गए कानून जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल पर जिन भी सिख विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं उन्हें और सारी कैबिनेट को 29 जून को अकाल तख्त पर समन किया गया है।
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क्योंकि इस बिल को बनाने के लिए सरकार ने सिख स्कॉलर्स और संस्थाओं से सही विमर्श नहीं किया।
हालांकि गुरुग्राम पुलिस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो की फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने और डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिया था।
इस मामले में गुरुग्राम के सेक्टर 29 स्थित डीएलएफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। यह एफआईआर जसप्रीत उर्फ जस्सी नाम के एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। उनका आरोप है कि उन पर विवादित वीडियो की फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था।
पुलिस ने अरुण महेंद्रू और अंकित नाम के दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान जारी कर कहा है कि उन्हें फंसाने के लिए फर्जी वीडियो वायरल कराया गया। दरअसल, 15 जून को अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने गुरु दोखी और पंथ विरोधी कहा था।
यह फैसला मुख्यमंत्री मान के कथित विवादित वीडियो से जुड़े केस में लिया गया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी और खुद भगवंत मान ने इस वीडियो को गलत बताया था और इसमें मान के होने से इनकार किया था। इसके बाद 18 जून को पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दो अलग-अलग फॉरेंसिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए वायरल वीडियो पर सफाई दी थी। मंत्री ने दावा किया था कि लैब में तकनीकी जांच की गई थी।
इसके बाद यह साफ हो गया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं।
भगवंत मान ने अब कहा है, कुछ दिन पहले एक नकली वीडियो फैलाया गया जिसमें दावा किया गया कि वो मैं हूं। मुझे फंसाने के लिए उस वीडियो को वायरल किया गया। बाद में हमने उसे फॉरेंसिक लैब में चेक कराया, और अब लैब मालिकों पर भी बीजेपी हमला कर रही है, क्योंकि पंजाब में अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है।
इस पूरे मामले को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ झूठे वीडियो फैलाए जा रहे हैं, लेकिन वे मुझे तोड़ नहीं सकते। मैं लोगों के लिए काम करता रहूंगा शिकायतकर्ता जसप्रीत उर्फ जस्सी का आरोप है कि उन पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वीडियो की फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके लिए उन्हें 10 लाख रुपये की रिश्वत भी दी गई थी और जब उन्होंने आपत्ति जताई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
जसप्रीत ने गुरुग्राम पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि खुद को पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था। उसने उन्हें गुरुग्राम के एक होटल में मिलने के लिए बुलाया था। उसने उनसे मुख्यमंत्री से जुड़े वीडियो पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था। जसप्रीत के मुताबिक , दो लैब की रिपोर्ट दबाव में तैयार की गई थीं। उन्हें इन रिपोर्टों की सच्चाई की कोई जानकारी नहीं थी।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)