भगवंत मान पर कांग्रेस का आरोप

राजनीति मंे आरोप-प्रत्यारोप की शालीन परम्परा रही है लेकिन अब मतभेद रखने वाले नेता बाल की खाल निकालने का प्रयास करने लगे हैं। यह बहुत कुछ वैसा ही है जैसे क्रिकेट मंे हर बाल को कैच करने के बाद गेंदबाजी करने वाली टीम आऊट-आऊट का शोर मचाने लगती है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले दिनों अपने कालेज के दिनों को याद करते हुए एक लड़की के बारे मंे बताया। उसको कोई विशेष वस्त्र पहनने पर सहपाठी चिढ़ाते थे तो यह कोई महिलाओं का अपमान नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने इसी बयान को लेकर भगवंत मान को कठघरे मंे खड़ा कर दिया। यहां पर ध्यान देने की बात है कि देश भर मंे कई राजनीतिक दल मिलकर भाजपा को चुनाव मंे पराजित करना चाहते हैं और इसके लिए इंडिया नाम से एक गठबंधन भी बनाया गया है। कांगे्रस अघोषित रूप से उसकी अगुवाई कर रही है और आम आदमी पार्टी (आप) उस गठबंधन का एक हिस्सा भी है। इसलिए गठबंधन धर्म को निभाते हुए कम से कम कांग्रेस को इस तरह के आरोप नहीं लगाने चाहिए। आरोपों का एक स्तर होता है। हालांकि राजनेताओं ने महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणियां की हैं और फिर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। हालात ये रहे कि महिलाओं ने ही महिला का अपमान किया है। सन् 2019 की एक घटना याद आती है जब भाजपा विधायक ने बसपा प्रमुख मायावती को अपमानित किया था।
कांग्रेस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर महिलाओं के बारे में अपमानजनक और घटिया भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। पंजाब कांग्रेस ने राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन को शिकायत भेजी है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने 8 मार्च को मनाए गए ‘इंटरनेशनल विमेंस डे’ के मौके पर सुनाम में हुए एक सरकारी फंक्शन के दौरान महिलाओं के बारे में अपमानजनक और घटिया भाषा का इस्तेमाल किया। पार्टी ने अपने लेटर में मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई की जाए। कांग्रेस की तरफ से भेजे गए लेटर में कहा गया है कि 8 मार्च को संगरूर जिले के सुनाम में इंटरनेशनल विमेंस डे के मौके पर सरकार की तरफ से एक फंक्शन ऑर्गनाइज किया गया था। इस फंक्शन में मुख्यमंत्री भगवंत मान चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए थे। लेटर में आरोप है कि मुख्यमंत्री मान ने अपने भाषण के दौरान अपने कॉलेज के दिनों से जुड़ी एक घटना बताते हुए महिलाओं की इज्जत को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने अपनी शिकायत में ये भी लिखा है कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लड़की पीला सूट पहनती थी, तो वह उसे ‘भिरंड’ कहते थे। पार्टी का दावा है कि ये भी एक ऐसा कमेंट है जो एक महिला को सिर्फ उसके रूप-रंग तक सीमित करता है। इसके अलावा, लेटर में यह भी कहा गया है कि जब लड़की ने हरा सूट पहना था, तो उससे कहा गया कि वह ‘पाकिस्तान के कपड़े पहनकर आई है’। कांग्रेस ने इसे न सिर्फ महिलाओं के लिए अपमानजनक बल्कि सामाजिक रूप से भड़काने वाला कमेंट भी बताया है। कांग्रेस ने अपने लेटर में कहा है कि भारत के संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 21 हर नागरिक को बराबरी, भेदभाव से आजादी और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देते हैं।
पार्टी ने शिकायत में लिखा है कि एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते भगवंत मान की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं की गरिमा बनाए रखें, न कि ऐसी टिप्पणी करके उसे कम करें। लेटर के मुताबिक, इस मामले में सेक्शन 79 (किसी महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द या इशारे), सेक्शन 75 (यौन उत्पीड़न या यौन टिप्पणी) और सेक्शन 356 के तहत मानहानि से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं। पंजाब कांग्रेस ने मांग की है कि नेशनल कमीशन फॉर विमेन तुरंत मामले की जांच करे और जरूरी कानूनी कार्रवाई करे। पार्टी ने कहा कि अगर सरकारी मंच से मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे समाज में गलत मैसेज जाएगा और महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर असर पड़ेगा।
नेताओं ने महिलाओं का अपमान तो किया है। सन् 2019 में उत्तर प्रदेश में मुगलसराय से भारतीय जनता पार्टी की विधायक साधना सिंह ने बसपा प्रमुख मायावती को लेकर चंदौली में विवादित बयान दिया था। गेस्ट हाउस कांड की बात करते हुए साधना सिंह ने कहा, हमको पूर्व मुख्यमंत्री न तो महिला लगती हैं और न ही पुरुष। इनको अपना सम्मान ही समझ में नहीं आता। एक चीरहरण हुआ था द्रौपदी का, तो उन्होंने दुशासन से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली। वो एक स्वाभिमानी महिला थी और एक आज की महिला है, सब कुछ लुट गया और फिर भी कुर्सी पाने के लिए अपने सारे सम्मान को बेच दिया। ऐसी महिला मायावती जी का हम इस कार्यक्रम के माध्यम से तिरस्कार करते हैं, जो नारी जात पर कलंक है।
साधना सिंह यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने और भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लुटने से बचाया, उस महिला ने सुख-सुविधा, अपने वर्चस्व को बचाने के लिए अपमान को पी लिया। जिस दिन महिला का चीरहरण होता है, उसका ब्लाउज फट जाए, पेटीकोट फट जाए, साड़ी फट जाए, वो महिला सत्ता के लिए आगे आती है तो वो कलंकित है। उसे महिला कहने में भी संकोच लगता है। वो किन्नर से भी ज्यादा बदतर है क्योंकि वो तो न नर है, न महिला है। साधना सिंह के इस बयान को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोर निंदनीय बताया था।
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने गत वर्ष (2025) एक मुस्लिम महिला को नियुक्ति पत्र देते समय उनके चेहरे से नकाब खींच लिया था। किसी भी व्यक्ति के धर्म, आस्था, संस्कृति और सभ्यता के साथ इस प्रकार का व्यवहार न तो मानवीय है और न ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप। भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की थी। महिला एक्टिविस्ट और सामाजिक संगठनों ने भी अपना विरोध जताया था। राजनीतिक हमलों में उन्हें कुर्सी कुमार और पलटूराम जैसे शब्दों से निशाना बनाया गया था। आलोचना करते हुए उन पर महिलाओं के प्रति संवेदनशील न होने के आरोप लगाए गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2012 (गुजरात चुनाव के दौरान) में एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा था।
इस टिप्पणी का उद्देश्य उनके
विदेशी मूल (इतालवी) पर निशाना साधना था। इसी संदर्भ में उन्होंने राहुल गांधी को हाइब्रिड बछड़ा भी कहा था। कांग्रेस ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया था और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक
बताया था।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



