अखिलेश की यात्रा पर सियासत

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गये हैं। अनुमान है कि मार्च 2027 तक चुनाव होंगे इसीलिए राजनीतिक सरगर्मी कुछ ज्यादा ही बढ गयी है। भाजपा के धुरंधर नेता आये दिन लखनऊ का दौरा कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों से मुखातिब हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव प्रचार की शुरुआत जोर-शोर से करते हुए रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा शुरू कर दी है। इसके चलते यूपी राजनीति में सबकी निगाहें सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे पर टिक गयी हैं। खासकर भाजपा की नजरें दोनों के सीट बंटवारे पर हैं। अभी तक सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारा नहीं हुआ है। अखिलेश यादव ने भी अपनी पीडीए रथ यात्रा का मकसद भाजपा को चुनाव में हराना बताया है लेकिन उसकी शुरुआत कांग्रेस के गढ रायबरेली से क्यों की गयी, समझ में नहीं आ रहा है।
यह बात कांग्रेस की समझ में तो बिलकुल नहीं आयी। अजय राय ने तो तुरंत प्रतिक्रिया दे दी। उस पर अखिलेश यादव ने डेमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है। इसलिए राजनीतिक गलियारे में चर्चा ज्यादा हो रही है।
यूपी चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी प्रचार गाड़ी यानी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत कर दी है। रथयात्रा रायबरेली से शुरू हुई। सपा-कांग्रेस में अभी भी सीट बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं बनी है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद और अजय राय लगातार बयान दे रहे हैं। वहीं, अब अखिलेश यादव ने सपा-कांग्रेस नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों को रणनीति का हिस्सा बताया। दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से समाजवादी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की थी। इस पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया था कि हम भी सैफई और इटावा में कांग्रेस की रैली करेंगे। इस पर जब अखिलेश यादव से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि तुम लोग बात नहीं समझे। कभी-कभी हम लोग, तो विरोधियों से सीखते हैं। सत्ता पक्ष के जो लोग हैं, वो लोग भी ऊपर-ऊपर ही लड़ रहे हैं। अंदर ही अंदर मिले हुए हैं। कम से कम हमें भी विरोधियों से सीखना चाहिए। दूसरे दलों में ये जो ऊपर ही ऊपर लड़ाई चल रही है, वो दिखावा है। हमारी लड़ाई भी स्ट्रैटेजी का पार्ट है। इसके बाद अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने भी कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय के एक बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। शिवपाल ने जसवंतनगर में कहा था कि यह सच है कि कोई भी कहीं भी जा सकता है, तो वे जाएं। अगर वे (कांग्रेस) कोशिश भी करेंगे तो उन्हें पूरे जसवंतनगर में कुछ हासिल नहीं होगा, कोई वोट नहीं मिलेगा।
इससे एक बात तो साफ है कि अखिलेश यादव की रथयात्रा कांग्रेस को बिल्कुल रास नही आई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि अखिलेश की ये यात्रा योगी सरकार के खिलाफ कम हमें ताकत दिखाने की कोशिश ज्यादा थी। अजय राय ने कहा कि अगर अखिलेश अमेठी-रायबरेली आएंगे तो हम भी कन्नौज-इटावा और मैनपुरी जा सकते हैं। अजय राय ने कहा कि लगता है ये यात्रा राहुल गांधी को ताकत दिखाने के लिए निकाली गई है।
अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने 24 में उन्हें हराया था, 27 में भी हराएंगे। अखिलेश यादव नने गठबंधन की बात भी दोहराई लेकिन रायबरेली से रथयात्रा की शुरुआत पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। इस पर जब अजय राय से पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि चुनावी समय में कोई कहीं भी जा सकता है। अखिलेश रायबरेली, अमेठी जा सकते हैं, तो हम भी सैफई, इटावा और मैनपुरी जा सकते हैं। इसमें कोई असामान्य बात नहीं है।
उधर, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा पर हमला बोल रहे हैं। यात्रा वाले दिन ही उन्होंने कहा था कि हमारा काम अपनी पार्टी को खड़ा करना है। किसी दूसरे की चमचागिरी करना नहीं है। बाकी ढोल बजाने वाले ढोल बजाते रहें, उनसे क्या फर्क पड़ रहा है? इससे पहले भी उन्होंने कहा कि था, श्इकरा छोटी हैं और मेरे लिए भांजी जैसी हैं। उनसे जो बुलवाया गया, उन्होंने वह बोल दिया।
माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के प्रभाव वाले रायबरेली से पीडीए रथ अभियान की शुरुआत कर कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। राहुल गांधी की लोकसभा सीट वाले जिले में जनशक्ति जुटाकर सपा ने सीट बंटवारे को लेकर संभावित बातचीत से पहले कांग्रेस को विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत का अहसास कराने और संगठन में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया है। साथ ही मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह जैसे बागी नेताओं के अलग होने के बाद पार्टी के मजबूत रहने का संदेश दिया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली की छह में से चार सीटें जीती थीं। इनमें ऊंचाहार से जीते मनोज पांडेय अब भाजपा में हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में मनोज, गौरीगंज के विधायक राकेश और गोसाईंगंज के अभय ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।
वहीं, हाल में फिरोज गांधी डिग्री कालेज में सपा के सदस्यता अभियान के दौरान सपा छात्रसभा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी। उसके बाद सपा प्रमुख का विधायक राहुल लोधी के साथ पहुंचना, संगठन में उत्साह भरने का प्रयास भी है। रायबरेली से रथ की शुरुआत सबसे ज्यादा गठबंधन की राजनीति के लिहाज से अहम है। सपा का शक्ति प्रदर्शन संभावित सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी ताकत सामने रखने का संदेश देता है।
कांग्रेस वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर विधानसभा सीटों पर दावेदारी मजबूत करना चाहेगी, जबकि सपा 2022 में मिली 111 सीटों और संगठन को आधार बना रही है। सपा का संकेत है कि विधानसभा सीटों का बंटवारा केवल लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए।
रायबरेली में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में गरमागरम बहस छिड़ गई है। इस बहस में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बीजेपी समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव की यह रैली केवल दबाव की राजनीति का हिस्सा है और कांग्रेस को ब्लैकमेल करने के लिए की गई है। बीजेपी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा परिवारवाद और अपराधियों को
बढ़ावा दिया है, जिसे उत्तर प्रदेश की जनता अब कभी स्वीकार नहीं करेगी। इस प्रकार भाजपा ने भी सपा और कांग्रेस के बीच गलतफहमी को हवा देदी है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



