मार्शल आफ इंडियन एयरफोर्स अर्जन सिंह

पाकिस्तान के राजनेता और सैन्य अधिकारी अक्सर भारत के खिलाफ डींगें हांकते रहते हैं। कभी अपने परमाणु सम्पन्न होने का रौब दिखाते हैं। इतना ही नहीं अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर पाक परमाणु युद्ध की धमकी देता है। पांच-पांच किलो के बम जैसे शब्दों का प्रयोग कर बड़बोलेपन और अपरिपक्व कूटनीति का परिचय देता है। अभी पिछले दिनों ही ख्वाजा आसिफ ने कुछ ऐसा कह दिया था जिससे उनका मजाक उड़ा था। ख्वाजा आसिफ ने जिस 1965 की जंग का जिक्र किया था, उसी के एक हमारे महानायक थे अर्जन सिंह। अर्जन ंिसंह पहले और इकलौते मार्शल आफ इंडियन एयर फोर्स हैं जिनको पांच स्टार मिले। एक समय था जब पाकिस्तान मार्शल आफ इंडियन एयरफोर्स अर्जन सिंह के नाम से कांप उठता था। हमारी नई पीढ़ी ऐसे जांबाज वायुसैनिक को भूल न जाए, इसलिए मार्शल आफ इंडियन एयर लाइंस अर्जन सिंह के बारे मंे संक्षेप में बात करेंगे।
एक ऐसा जाबांज, जो सिर्फ एक नाम नहीं, भारतीय आसमान की सुरक्षा का दूसरा नाम था। हम बात कर रहे हैं देश के इकलौते मार्शल ऑफ द इंडियन एयरफोर्स, अर्जन सिंह की। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। उनका जन्म एक ऐसे नामी सैन्य परिवार हुआ, जिसने पीढ़ियों से वतन की सेवा को ही अपना धरम माना था। जब खून में ही देशप्रेम बह रहा हो, तो राह कैसे जुदा हो सकती थी। अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को पंजाब के लायलपुर (आज पाकिस्तान में) में हुआ था। पिता रिसालदार थे, दादा रिसालदार मेजर हुकुम सिंह ने दशकों तक सेना में रहकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे और परदादा सुल्तान सिंह भी जांबाज घुड़सवार सेना का हिस्सा थे। यानी अर्जन सिंह को अपनी मिट्टी और विरासत से देश प्रेम मिला था। लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय वायुसेना का दामन थाम लिया। जब उम्र खेलने-कूदने की होती है, महज 19 साल की उस उम्र में अर्जन सिंह को एम्पायर पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चुन लिया गया। साल 1939 में वे बतौर पायलट ऑफिसर देश की सेवा में तैनात हो गए। साल 1964 में उन्हें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ की कमान सौंपी गई। लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी। तारीख थी 1 सितंबर 1965। दोपहर के ठीक 4 बज रहे थे। रक्षा मंत्रालय का कमरा नंबर 108, साउथ ब्लॉक। उस वक्त वहां एक बेहद संवेदनशील और गुप्त बैठक चल रही थी। माहौल में भारी तनाव था। रक्षा मंत्री यशवंतराव चव्हाण, सेना प्रमुख जनरल कुमारमंगलम और एयर मार्शल अर्जन सिंह के बीच गंभीर सलाह-मशविरा चल रहा था। अर्जन सिंह ने बिना एक पल गंवाए कहा, सर, सिर्फ एक घंटे में। इतिहास गवाह है कि ठीक एक घंटे के भीतर पठानकोट से भारतीय लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और पाकिस्तानी सेना के हौसले पस्त कर दिए।
असल में, पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरू कर दिया था। उसकी सेना छंब सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रही थी। रक्षा मंत्री चैहान ने अर्जन सिंह की आंखों में देखते हुए पूछा, क्या वायुसेना तुरंत मदद भेज सकती है? साल 1965 की जंग शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले का एक ऐसा वाकया है, जो बहुत कम लोग जानते हैं। पाकिस्तान के एयर मार्शल असगर खान और अर्जन सिंह कभी गहरे दोस्त हुआ करते थे और दोनों ने इम्फाल की जंग में साथ काम किया था। जब रन ऑफ कच्छ की लड़ाई शुरू हुई, तो असगर खान ने अर्जन सिंह को एक गुप्त फोन कॉल कर जंग में भारतीय वायुसेना न उतारने की गुहार लगाई थी। बदले में असगर खान ने भी पाकिस्तानी वायुसेना न उतारने का भरोसा दिलाया। अर्जन सिंह ने भारतीय सरकार से बात कर इस पर सहमति जताई और दोनों देशों की वायुसेनाएं उस समय पीछे रहीं। हालांकि बाद में पाकिस्तान की सरकार ने असगर खान के इस कदम पर नाराजगी जताई थी, लेकिन यह दो सैनिकों के बीच के आपसी भरोसे की मिसाल थी।
रक्षा विशेषज्ञ पुष्पिंदर सिंह जब एक बार पाकिस्तान की रिसालपुर फ्लाइंग एकेडमी गए, तो मार्शल असगर खान ने अर्जन सिंह से उनकी एक तस्वीर मांगवाई थी। अर्जन सिंह ने अपनी तस्वीर पर दस्तखत करके उन्हें दी। आज भी वो तस्वीर सरहद पार पाकिस्तान की रिसालपुर एकेडमी में पूरे सम्मान के साथ लगी हुई है अर्जन सिंह की सबसे बड़ी खासियत थी उनकी चुंबकीय शख्सियत। लंबा-चैड़ा कद्दावर शरीर, हमेशा चेहरे पर एक रोबीली मुस्कान और बात करने का बेहद शानदार अंदाज। उनके करीबी रहे एयर वाइस मार्शल कपिल काक बताते हैं कि अर्जन सिंह को गोल्फ खेलने और बागवानी का बेहद शौक था। वे इतने मिलनसार थे कि एक अदने से फौजी को भी कभी यह महसूस नहीं होने देते थे कि वे वायुसेना के सबसे बड़े अफसर से बात कर रहे हैं। उनके दिमाग में घमंड नाम की कोई चीज नहीं थी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अर्जन सिंह देश के पहले एयर चीफ मार्शल बने। उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी निस्वार्थ सेवा को सलाम करते हुए भारत सरकार ने साल 2002 में उन्हें मार्शल ऑफ द इंडियन एयरफोर्स (फाइव-स्टार रैंक) के सर्वोच्च खिताब से नवाजा। वे भारतीय वायुसेना के इतिहास में इस मुकाम तक पहुंचने वाले इकलौते अधिकारी बने। मार्शल अर्जन सिंह की याद हर हिंदुस्तानी के दिल में ताजा रहेगी। हमारे नीले आसमान को सुरक्षित रखने वाले इस महान सेनानायक के हम हमेशा ऋणी रहेंगे।
अब पाक का बड़बोलापन देखें। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने बड़बोले, बेतुके और अनापशनाप बयानों के लिए कुख्यात हैं। ऐसे लोगों के साथ दिक्कत ये होती है कि उनकी पोल फौरन खुल जाती है। शायद इसीलिए भारत ने उन्हें श्मानसिक तौर पर बीमार बताया था। ख्वाजा आसिफ अब अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बुरी तरह घिर गए। दरअसल साल 2006 में दिए एक बयान में ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया था कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया था लेकिन अब 2026 में वह दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तान ने 1965 में भारत को हराया था। उनके इस 180-डिग्री यू-टर्न का वीडियो और पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग उनसे पूछ रहे हैं कि कौन सा ख्वाजा आसिफ सच बोल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें पहले वो 2025 में मई संघर्ष की बात कर रहे हैं। वो कह रहे हैं भारत ने हमें ललकारा था और जो जवाब मिला वो पूरी दुनिया ने देखा। इसके बाद कार्यक्रम के होस्ट ने अयूब खान का जिक्र करते हुए 1965 की जंग की याद दिला थी। इस पर ख्वाजा आसिफ कहते हैं अयूब खान राष्ट्रपति भी लेकिन वो भी पाकिस्तान की तारीख में सुनहरा अध्याय है। हमने एक बहुत बड़े आक्रमण का मुकाबला किया। बल्कि हमने दुश्मन के क्षेत्र में जाकर हमने युद्ध लड़ा। यानि ख्वाजा आसिफ जीत का दावा कर रहे हैं। लेकिन ख्वाजा आसिफ का एक और वीडियो भी है जो वो खुद
देश की संसद में बोल रहे हैं। ख्वाजा आसिफ देश की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए 2006 में कह रहे थे हमने 1965 की जंग में सरेंडर किया था। वो कह रहे हैं 1965 की जंग में पाकिस्तान की फौज ने आजाद कश्मीर में जाने से इनकार कर दिया था।
तो ये कबीले लश्कर लेकर गये
और ये जो आजाद कश्मीर है आपके पास वो इन कबीलों ने दिलवाई थी आपको। ये पाकिस्तानी फौज का तोहफा नहीं है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



