हरीश रावत के बागी तेवर

उत्तराखण्ड में आगामी पांच महीने के अंदर ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। सत्ता पक्ष भाजपा अभी पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने की बात कह रही है लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में सीएम चेहरा घोषित करने से परहेज किया जा रहा है। राज्य की प्रभारी कुमारी शैलजा नहीं चाहतीं कि चुनाव से पहले मतभेद उभरे लेकिन तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके वरिष्ठ नेता हरीश रावत चाहते हैं कि मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया जाए। वह अपनी बात दूसरे तरीके से कह रहे हैं और कांग्रेस हाईकमान को यह पसंद नहीं आया। हरीश रावत ने प्रदेश कांगे्रस कमेटी से बिना सलाह मशविरा किये ही धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाल दी है। पार्टी नेतृत्व को इस पर आपत्ति है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को बाकायदा पत्र लिखकर यात्रा और अन्य कार्यक्रमों को आगे न बढ़ाने के लिए कहा था। इसके बावजूद हरीश रावत अपनी यात्रा जारी रखे
हुए हैं। कांग्रेस नेतृत्व चाहता हे कि हरीश रावत राज्य मंे अपने स्तर से कार्यक्रम करने के बजाय संगठन के साथ मिलकर काम करें। हरीश रावत के बागी तेवर देखकर कुमारी शैलजा ने साफतौर पर कहा कि वे व्यक्तिगत सियासी गतिविधियों पर लगाम लगाएं। यहां पर ध्यान रखना होगा कि
हरीश रावत का अपना मजबूत सियासी वजूद है। वे जमीन से जुड़े नेता हैं और अपने संधर्ष के दम पर कांग्रेस की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। मौजूदा समय मंे जन संवाद यात्रा से पहले केसी वेणुगोपाल ने भी यही सलाह दी थी कि हरीश रावत संगठन के साथ मिलकर काम करें लेकिन हरीश रावत ने किसी की नहीं सुनी है।
उत्तराखण्ड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने हाईकमान के मना करने पर भी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को जारी रखने का ऐलान कर दिया है। साफ है कि हरदा फिलहाल यात्रा नहीं रोकने जा रहे हैं और इस तरह प्रदेश प्रभारी शैलजा को भी चुनौती दे दी है। शैलजा ने हरीश रावत की यात्रा पर आपत्ति दर्ज करते हुए नाराजगी दर्ज की थी।
उत्तराखंड की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को चिट्ठी लिखी, जिसमें कहा गया कि आप जो यात्रा निकाल रहे हैं, उसको लेकर आपने पीसीसी से कोई चर्चा नहीं की है। कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि अगले कुछ महीनो में विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए पार्टी में एकजुटता की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि इस समय प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई यात्रा निकालना पार्टी के लिए हितकारी नहीं होगा, इसलिए आप अपनी यात्रा को आगे ना बढ़ाएं। पार्टी ने कहा कि आपने कई विवादित बयान भी दिए हैं।चिट्ठी सोशल मीडिया के जरिए भी सामने आ चुकी है, लेकिन इसके बाद भी इन पंक्तियों के लिखे जाने तक हरदा ने अपनी यात्रा का कार्यक्रम जारी करते हुए लिखा कि साथियों, चुनौती बड़ी है, लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए हमारा संकल्प भी दृढ़ है। धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के इस दौर में अब रुकना नहीं है। उठो, चलो, राज्य में बदलाव लाना है और कांग्रेस को वापस लाना है। जसपुर से हल्द्वानी तक, आइए साथ मिलते हैं, संवाद करते हैं और देवभूमि के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार से धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा शुरू की है। हरदा हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जता चुके हैं। इस बीच वे हरिद्वार के क्षेत्रों में यात्रा के जरिए रोड शो और जनसंवाद कर रहे हैं। अब हरदा ने यात्रा के जरिए अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दी है और हाईकमान के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। हरीश रावत एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में हैं। बीमारी के बाद लोगों से मुलाकात, लगातार जनसंपर्क और बेटे आनंद रावत के चुनाव लड़ने की पैरवी के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पार्टी के तय कार्यक्रमों के साथ चलने की सलाह दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 2027 से पहले हरीश रावत आखिर किस राजनीतिक भूमिका की तैयारी कर रहे हैं?
हरीश रावत का कहना है कि वह कोई अलग यात्रा निकाल ही नहीं रहे थे। दिल्ली में इलाज के दौरान और उसके बाद कई समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनसे मिलने की इच्छा जताई थी। उन्हीं लोगों से मिलने के लिए वह अलग-अलग जगह जा रहे हैं लेकिन चुनाव से ठीक पहले उनकी बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। हरीश रावत का हालिया चुनावी रिकॉर्ड उनके लिए अच्छा नहीं रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह दोनों सीटों से हार गए थे, 2019 का लोकसभा चुनाव भी नहीं जीत पाए और 2022 में लालकुआं विधानसभा सीट से उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में उनकी सक्रियता कम नहीं हुई। अब 2027 का चुनाव करीब है और हरीश रावत फिर जनता के बीच दिखाई दे रहे हैं। इसलिए सवाल स्वाभाविक है कि क्या यह केवल पार्टी के लिए जनसंपर्क है या इसके पीछे उनकी अपनी अगली राजनीतिक पारी की तैयारी भी है?
हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से कांग्रेस विधायक हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनके बड़े बेटे वीरेंद्र रावत को हरिद्वार से उम्मीदवार बनाया था, हालांकि वह चुनाव हार गए। अब छोटे बेटे आनंद रावत को लेकर हरीश रावत खुलकर अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। उनका कहना है कि आनंद लंबे समय से काम कर रहे हैं और पार्टी को उचित सीट पर उनके नाम पर विचार करना चाहिए। यहीं से हरीश रावत की मौजूदा सक्रियता के राजनीतिक मायने बढ़ जाते हैं। क्या 2027 से पहले हरदा अपनी राजनीतिक विरासत के साथ आनंद रावत के लिए भी जमीन तैयार कर रहे हैं? इसी दौरान हरीश रावत ईडी की पूछताछ का भी सामना कर चुके हैं। 2016 की वीपीडीओ भर्ती से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके मुख्यमंत्री रहते ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर ईडी ने कार्रवाई की और बाद में रावत को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया। रावत ने एजेंसी की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगाया है। ईडी के सामने पेश होने पहुंचे हरीश रावत अपनी दिवंगत मां की तस्वीर गले में डालकर पहुंचे थे। इस तस्वीर ने भी खूब राजनीतिक चर्चा बटोरी।
रावत लंबे समय से अपनी राजनीति में सीधे संवाद और प्रतीकों का इस्तेमाल करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने जांच एजेंसी के सामने अपनी पेशी को सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी रखी। यहीं इस पूरी कहानी का सबसे अहम राजनीतिक सवाल है। हरीश रावत का भाजपा के साथ किसी अंदरूनी राजनीतिक तालमेल का कोई प्रमाण सामने नहीं है। लेकिन उनकी अलग राजनीतिक सक्रियता को लेकर कांग्रेस की असहजता अब सार्वजनिक जरूर हो चुकी है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि 2027 से पहले प्रदेश में कांग्रेस के आधिकारिक अभियान के समानांतर किसी बड़े नेता का अलग अभियान दिखाई दे।
सवाल भाजपा से किसी अंदरूनी रिश्ते का नहीं, बल्कि यह है कि हरीश रावत की अपनी राजनीतिक राह कहीं अनजाने में कांग्रेस की चुनावी राह मुश्किल तो नहीं कर रही? (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



