लेखक की कलम

पंजाब में सचिन पायलट की परीक्षा

पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसलिए कांग्रेस वहां सत्ता में वापसी के लिए मजबूत किले बंदी कर रही है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब तक पंजाब के प्रभारी थे लेकिन वहां की राजनीतिक गुटबाजी को वह दूर नहीं कर पाये। इसीलिए राजस्थान से सचिन पायलट को पंजाब में कांग्रेस सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। भूपेश बघेल 2025 की शुरुआत में ही पंजाब के प्रभारी बनाए गये थे। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जबर्दस्त खींचतान चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर राजा बडिंग काबिज हैं।
पंजाब प्रभारी के तौर पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी कांग्रेस नेतृत्व ने सौंपी है। पंजाब कांग्रेस में जारी प्रदेश अध्यक्ष को हटाने को लेकर जारी सियासी घमासान और पंजाब में कांग्रेस की जीत की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट के कंधों पर है। लेकिन सचिन पायलट को दी गई यह जिम्मेदारी केवल पंजाब का नतीजा ही नहीं बल्कि आने वाले समय में राजस्थान की सियासी लड़ाई और उनके अपने राजनीतिक दावे पर भी असर डाल सकती है।
दरअसल, बीते दिनों में छत्तीसगढ़ पूर्व सीएम भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस में सियासी घमासान और लड़ाई को रोक और ठीक नहीं कर पाए और चन्नी कैम्प और बाकी नेताओं ने उनका लगातार प्रदेश में भेदभाव से लेकर कई पहलू पर विरोध किया था।
भूपेश बघेल बतौर प्रभारी के तौर पर कोशिश कर रहे थे और कई बार उन्होंने प्रदेश के हालातों को कांग्रेस नेतृत्व को रिपोर्ट के माध्यम से बताया भी था लेकिन बात बनी नहीं जिसके बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी पद से भूपेश बघेल को हटा उनको असम का प्रभार दे दिया गया और उनकी जगह सचिन पायलट को पंजाब के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। सचिन पायलट के प्रभारी बनने के बाद से पंजाब से लेकर राजस्थान तक समर्थकों और नेताओं ने उनको बधाई दी और सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह के ट्वीट भी किए लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा अब यह है कि कैसे पंजाब में जारी गतिरोध को सचिन पायलट दूर करेंगे? क्योंकि आज के वक्त में कांग्रेस के भीतर यह सबसे महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत की चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य नेता पंजाब कांग्रेस के प्रधान को हटाने को लेकर लगातार डटे हुए हैं और दूसरों ओर कुछ दिनों में राहुल गांधी खुद पंजाब जाने वाले हैं। अब सचिन पायलट के सामने चुनावी राज्य पंजाब के प्रभारी बनने के बाद कैसे वहां सभी नेता एक साथ नजर आएंगे बिना किसी झगड़े के यह सबसे अहम टास्क होगा।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

 

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