नेपाल की मदद को गये शांति कुंज के सेवक

नेपाल में तिब्बत से आयी बाढ़ से मची तबाही में मदद के लिए उत्तराखंड के शंाति कुंज के सेवक पहुंच गये हैं। इसके साथ ही नेपाल में मची तबाही का असर उत्तराखण्ड मंे भी दिखने लगा है। उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले चम्पावत मंे सतर्कता बढ़ा दी गयी है। राज्य से नेपाल जाने वाले पर्यटकों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। लोगों से शारदा नदी के तटों से दूर रहने की अपील की गयी है। एसडीआरएफ की टनकपुर टीम को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
शांतिकुंज हरिद्वार आध्यात्मिक जागरण के साथ-साथ समाज सुधार, नैतिकता और जनकल्याण के कई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य करता है। गत 27 अगस्त को पड़ोसी देश नेपाल में फ्लैश फ्लड के रूप में भीषण प्राकृतिक आपदा आई है। वहां के पीड़ितों की मदद के लिए शांतिकुंज हरिद्वार से सेवा दल रवाना हुआ। शांतिकुंज हरिद्वार से राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है। शेल जीजी और डॉ. चिन्मय पंड्या ने बताया कि करीब 50 नेपाली कार्यकर्ताओं और स्थानीय गायत्री परिजनों का सेवा दल प्रभावित इलाकों के लिए गया है। शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आपदा प्रभावित परिवारों तक तिरपाल, राशन, आवश्यक दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरत का सामान पहुंचाया जाएगा। बाढ़ में कई परिवारों के घर और जरूरी सामान तबाह हुए हैं। ऐसे में राहत दल का प्रयास प्रभावित लोगों को तत्काल जरूरत की चीजें उपलब्ध कराना है।
नेपाल की भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के कारण कम से कम 162 लोगों की मौत हो गई और 133 भारतीय नागरिक समेत 750 लापता हैं। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार लापता लोगों में विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। सुबह के समय आई इस अचानक बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई और लोगों, घरों, वाहनों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बहा ले गई। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे घातक आपदाओं में से एक है। मध्य नेपाल में कई कस्बे और गांव तबाह हो गए। जरूरी पुल बह गए और एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गई। बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ इलाकों में आवाजाही बाधित है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह ग्लेशियर से हुआ हिमस्खलन हो सकता है। राहत बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। भारत की ओर से भी मानवीय सहायता और 10 टन आपदा राहत सामग्री भेजी गई है।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बारे में बात करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा, बहुत दुख और अफसोस के साथ मैं आपको बताना चाहता हूँ कि तिब्बत और नेपाल बॉर्डर के बीच भयानक बाढ़ आई है। भारतीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार नेपाल की तरफ लगभग 484 लोग लापता हो गए हैं और हमारी तरफ कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। सुबह मैं खुद वहाँ जाने के लिए निकला था। सभी फोन बंद हैं, टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम ठप है, सड़कें बंद हैं। हम वहाँ नहीं पहुँच पा रहे हैं। हमारा एक ग्रुप वहां फंसा है। जिसमें अमेरिका से 22, कनाडा से 12, ऑस्ट्रेलिया से 11, यूनाइटेड किंगडम से 9, जर्मनी से 4, फ्रांस से 3, नेपाल से 3, नीदरलैंड से 2, न्यूजीलैंड से 2, सिंगापुर से 2, स्पेन से 2 और फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति शामिल है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



