
पुराणों में रक्षाबंधन से जुड़ी एक और कहानी मिलती है। भविष्य पुराण के अनुसार देवताओं और राक्षसों के बीच बारह वर्षों तक युद्ध चला। समुद्र मंथन के रूप मंे यह युद्ध देवासुर संग्राम के रूप मंे जाना जाता है। लम्बे समय तक चले इस युद्ध मंे एक बार असुर देवताओं पर हावी होने लगे और देवता हारने लगे तब देवताओं की हार से चिंतित होकर देवराज इन्द्र की पत्नी इन्द्राणी जिन्हे शची भी कहा जाता है वे वृहस्पति देवगुरू के पास गईं और उनसे देवताओं की विजय का उपाय पूछा। अभिमंत्रित यानि कहते हैं तब देवगुरु वृहस्पति ने मंत्रों द्वारा शुद्ध किया हुआ और शक्ति प्रदान किया हुआ रक्षा सूत्र अर्थात् धागा इन्द्राणी को दिया और उसे युद्ध में जो समय इन्द्र की कलाई पर बांधने के लिये कहा।
कहते हैं, इन्द्राणीा ने श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन इस धागे को इन्द्र की कलाई पर बांधा था, जिससे उन्हंे ईश्वरीय शक्ति और सुरक्षा मिली जिससे उन्हांेने युद्ध मंे दानवों को हराकर जीत हासिल की थी। ऐसा माना जाता है कि इसी पौराणिक घटना के बाद से ही रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत हुई थी।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं।



