बीमारी के झटके सहकर मनीषा ने की दमदार वापसी

मनीषा कोइराला ने 1991 की फिल्म सौदागर से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। शाही परिवार में जन्मीं राजकुमारी के दादा बीपी प्रसाद कोइराला नेपाल के पहले प्रधानमंत्री थे। एक्ट्रेस ने राजनीति के गलियारों से दूर अपने लिए एक नई राह तराशी। इस बेहतरीन अदाकारा ने सौदागर के बाद 1942: लव स्टोरी, बॉम्बे, दिल से और मन जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया। 90 के दशक में वह अपनी खूबसूरत, दमदार और बेहद प्रतिभाशाली अदाकारी के लिए दर्शकों की पहली पसंद बन गई थीं। उन्होंने लाखों दिलों पर राज किया, लेकिन गंभीर बीमारी के चलते एक्ट्रेस को पर्दे और सिनेमा की दुनिया से दूर होना पड़ा। कैंसर से लंबी जंग के बाद मनीषा कोइराला ने पर्दे पर वापसी की और ओटीटी पर धाक जमाई। शुरुआती संघर्षों से लेकर दिग्गज फिल्ममेकर्स के साथ काम करने और यादगार गानों व परफॉर्मेंस देने तक, वह हिंदी सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक बन गईं।
16 अगस्त 1970 को काठमांडू, नेपाल में जन्मी मनीषा ने 90 के दशक की शुरुआत में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और जल्दी ही अपनी पहचान बना ली। एक्ट्रेस के सुनहरे दौर में उन्हें अक्सर अंडररेटेड कहा गया, लेकिन क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों ही उनकी दमदार स्क्रीन प्रजेंस के कायल थे। मनीषा कोइराला आखिरी बार 2015 में फिल्म चेहरे में नजर आई थीं। अभिनय के अलावा, मनीषा ने कई यादगार गानों के जरिए भी लोगों के दिलों को छुआ। सन् 2012 में मनीषा कोइराला की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। एक्ट्रेस कैंसर से ग्रस्त थीं जिसके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। उनका इलाज न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में हुआ। करीबन एक साल तक कैंसर से लंबी जंग लड़ने के बाद मनीषा कोइराला साल 2013 में कैंसर से पूरी तरह मुक्त हो गईं। सफल इलाज के बाद, उन्होंने 2018 में हील्ड नाम से एक किताब भी लिखी, जिसमें उन्होंने अपनी जर्नी साझा की। इस किताब के जरिए वह उन महिलाओं को हौसला देना चाहती थीं, जो कैंसर से जूझ रही हैं। करीब पांच साल के ब्रेक के बाद मनीषा कोइराला ने डियर माया, लस्ट स्टोरीज और संजू जैसी फिल्मों से दमदार वापसी की, जो बॉक्स ऑफिस पर भी हिट रहीं और क्रिटिक्स ने भी एक्ट्रेस के अभिनय को खूब सराहा है। (हिफी)



