सम-सामयिक

सामयिक सीख देती योगी की पाती

महीने के अंतिम रविवार को जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मन की बात सामयिक संदर्भ से प्रेरणा देती है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पाती भी लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगी है। यह पाती बहुत छोटी होती है, इसीलिए नजर पड़ते ही इसे लोग पढ़ते हैं। गत 4 जनवरी को योगी आदित्यनाथ ने साइबर अपराध पर लोगों को जागरूक किया है। संयोग से उसी दिन राजधानी में महिला समेत दो लोगों से साइबर जालसाजों ने 2.58 लाख रुपये ठग लिये। पुराने लखनऊ में ठाकुरगंज के राधा बिहार कालोनी निवासी अपर्णा तिवारी साइबर ठगी का शिकार बनीं। अपर्णा के अनुसार जालसाज ने टेलीग्राम पर एक लिंक भेजा। आनलाइन टास्क का झांसा देकर कई बार मंे 82800 रुपये ऐंठ लिये। इसी प्रकार लखनऊ के कृष्णा नगर थाना क्षेत्र के सावित्री इन्क्लेव निवासी अतुल सिंह से कथित डिजिटल अरेस्ट करके अलग-अलग खातों से 2.15 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिये। योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में ऐसी ठगी से सावधान किया है। यह पाती आमतौर पर हर महीने के पहले रविवार को लिखी जाती है।
योगी ने गत 4 जनवरी को प्रदेशवासियांे से इस पाती क माध्यम से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज मोबाइल और कम्प्यूटर ने हमारी जिन्दगी को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। आपकी सरकार (योगी की सरकार) इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि 2017 से पूर्व प्रदेश मंे केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे लेकिन आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील हैं। साथ ही सभी जनपदीय थानों मंे साइबर हेल्प डेस्क बनाई गयी है। साइबर ठगों के विरुद्ध सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा अस्त्र है। योगी ने अपनी पाती में सामान्य जनों को जागरूक किया है कि यह अपराधी डिजिटल अरेस्ट जैसे झूठे भ्रामक शब्दों का प्रयोग करते हैं और निर्दोषों को डराते-धमकाते हैं। लोग डर जाते हैं और ठगों के बताये खातांे में पैसा भेज देते हैं। योगी ने अपनी पाती में साफ-साफ कहा कि देश के किसी भी कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हांेने कहा कि पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो काल्स, वाट्स ऐप या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती है और न ही पैसे की मांग करती है।
योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर सावधान किया है। उन्हांेने कहा आप जो तस्वीरें वीडियो या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उसके माध्यम से अपराधी पहले आपके बारे मंे सूचनाएं जुटाते हैं और फिर उन्हीं सूचनाओं को आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं। योगी ने जोर देकर यह बात कही है कि अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। योगी ने पाती में लिखा कि पूरी सावधानी के बावजूद यदि आपके साथ साइबर अपराध हो जाता है तो सर्वप्रथम हेल्प लाइन नम्बर 1930 पर रिपोर्ट करें। आप जितना शीघ्र पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। योगी ने कहा है कि साइबर अपराधों के बारे में जागरूक बनें और अपने आस पास के लोगों को भी जागरूक करें।
साइबर क्राइम की समस्या देश भर में है। उत्तर प्रदेश में भी साइबर क्राइम काफी बढ़ गया है, जिसमें ऑनलाइन ठगी, ब्लैकमेलिंग और डेटा चोरी मुख्य हैं, जिनसे बचने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से सतर्क रहने और 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करने की अपील की है, क्योंकि पुलिस वीडियो कॉल या सोशल मीडिया से गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट जैसी झूठी बातों से डराते हैं, जबकि जागरूकता और तुरंत शिकायत ही बचाव के तरीके हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार में 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी राजीव कृष्ण ने अपना एक्शन मोड चालू कर दिया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि कुल अपराधों में जितनी रकम लोगों ने खोई, उससे तीन गुना से ज्यादा रकम साइबर फ्रॉड में गई है।
उन्होंने कहा कि दुर्दांत अपराधियों से निपटने के लिए हमारी दूसरी रणनीति है और अन्य अपराधों के लिए अलग है। लोभ, लत और भय के कारण लोग तेजी से साइबर फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं। कम समय में पैसा दोगुना या अधिक लाभ का लालच देकर साइबर ठगी की जा रही है। कई लोग ऑनलाइन गेम्स की लत के चलते भी साइबर ठगी के जाल में फंस जाते हैं। आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और पेंशनर्स साइबर ठगी का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश में कुल 1581 थाने हैं और प्रत्येक थाने पर साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा हर जिले में एक साइबर थाना कार्यरत है। साइबर अपराध से निपटने के लिए अब तक 65 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
डीजीपी ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से फंसाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 72 फीसदी साइबर अपराध लालच के कारण होते हैं। अब तक एक लाख से अधिक साइबर जागरूकता बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही शॉर्ट फिल्मों के जरिए भी साइबर जागरूकता फैलाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी संस्था जैसे पुलिस, सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने के लिए कभी नहीं कहती है। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को सबसे पहले 1930 नंबर पर कॉल कर जानकारी देनी चाहिए। इस नंबर के माध्यम से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। एक साल पहले तक केवल 9 फीसदी ठगी की रकम ही फ्रीज हो पाती थी, जो अब बढ़कर 26 से 27 फीसदी तक पहुंच गई है।
वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि पूरे वर्ष में 52 हजार 976 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड सामने आए। देश के टाप फाइव में उत्तर प्रदेश का चैथा स्थान है।
नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के अनुसार अकेले बाराबंकी जिले में वर्ष 2025 में 3253 लोग साइबर फ्राड के शिकार बन चुके हैं। पीड़ितों ने अपने 10 करोड़ 30 लाख रुपये गंवाए हैं।
समय से मिली सूचना देने वालों को साइबर सेल ने एक करोड़ 20 लाख रुपये साइबर अपराधियों के शिकंजे से वापस दिलाई गई है। साथ ही करीब ढाई करोड़ रुपये अलग-अलग बैंकों में होल्ड भी करा रखा है, जिनकी वापसी के लिए न्यायालय में प्रक्रिया चल रही हैसिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्राड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के अनुसार वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के कुल दो लाख 75 हजार 264 लोगों से साइबर फ्राड किए गए हैं। पीड़ितों की दर्ज शिकायतों में कुल 1443 करोड़ रुपये धानराशि के फ्राड सामने आए हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता सबसे प्रमुख हथियार है। किसी भी अनजान लिंक, मैसेज पर क्लिक न करें, इंटरनेट बैंकिंग अथवा इ-मेल आइडी व अन्य प्लेटफॉर्म पर बनाया जाने वाला पासवर्ड थोड़ा जटिल, मजबूत व अलग बनाएं। सॉफ्टवेयर अपडेट रखें और सार्वजनिक वाई-फाई से बचें, किसी को भी ओटीपी न बताएं, एपीके फाइल न खोले और किसी भी धोखे में न फंसे।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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