पहली फिल्म के बाद विवेक मुशरान की किस्म रूठी

90 के दशक की शुरुआत बॉलीवुड के लिए एक बड़े बदलाव का समय था। इसी दौर में एक ऐसे युवा सितारे का उदय हुआ, जिसने अपनी पहली ही फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला दी थी। फिल्म की तगड़ी कमाई ने इस नए नवेले एक्टर को स्टार बना दिया। हम बात कर रहे हैं अभिनेता विवेक मुशरान की। साल 1991 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म सौदागर से विवेक ने जो मुकाम हासिल किया, वह किसी भी नए कलाकार के लिए एक सपने जैसा होता है। इस फिल्म के बाद उनकी किस्मत चमक कई और उनकी तुलना उस दौर के लीडिंग स्टार्स शाहरुख खान और आमिर जैसे सितारों से होने लगी।
1991 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी फिल्म सौदागर रिलीज हुई। यह फिल्म मुख्य रूप से दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार और राज कुमार के बीच के टकराव पर आधारित थी, लेकिन इस फिल्म के युवा प्रेमी जोड़े यानी विवेक मुशरान और मनीषा कोइराला ने अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल जीत लिया। विवेक ने फिल्म में दिलीप कुमार के पोते की भूमिका निभाई थी। फिल्म के गाने, विशेषकर श्इलू-इलूश्, उस समय की सबसे बड़ी म्यूजिकल हिट साबित हुई। इस फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विवेक मुशरान उस दौर के बड़े-बड़े सुपरस्टार्स को टक्कर देने लगे थे। लोग उनमें दिग्गज अभिनेता देव आनंद की छवि देखने लगे थे। उनकी हेयरस्टाइल और हाव-भाव काफी हद तक देव आनंद से प्रेरित लगते थे, जिसके कारण उन्हें बॉलीवुड का अगला सुपरस्टार माना जाने लगा था।शुरुआती सफलता के बाद ऐसा लग रहा था कि विवेक मुशरान का करियर सातवें आसमान पर होगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सौदागर के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, जिनमें राम जाने, प्रथम और इंसानियत के देवता जैसी फिल्में शामिल थीं। हालांकि, इनमें से कोई भी फिल्म सौदागर वाला जादू दोबारा नहीं चला पाई। बॉलीवुड में अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा के साथ-साथ सही समय पर सही फिल्म और किस्मत का होना बहुत जरूरी है। विवेक मुशरान के साथ यही हुआ, उनकी मेहनत में कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनकी फिल्मों के चुनाव या शायद समय ने उनका साथ नहीं दिया। धीरे-धीरे वे मुख्य अभिनेता के तौर पर बड़े पर्दे से ओझल होने लगे। (हिफी)



