गजब के कलाकार थे धर्मेन्द्र

अचानक विश्वास नहीं हुआ क्योंकि कुछ दिन पहले ही धर्मेन्द्र को लेकर बुरी अफवाह उड़ी थी लेकिन 24 नवम्बर को हिन्दी फिल्मों के दीवाने धर्मेन्द्र की यादों में खो गये। उनका ‘वीरू’ चला गया। गजब के कलाकार थे धर्मेन्द्र। यहां हम उनकी कुछ फिल्मों का जिक्र करेंगे। धर्मेन्द्र जैसे कलाकार कभी मरते नहीं हैं। वे हम सभी की यादों में जीवित रहेंगे।
हिंदी सिनेमा के ही मैन धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने 89 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है और इसी के साथ हिंदी सिनेमा के एक युग का भी अंत हो गया। अभिनेता लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें कुछ दिनों पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अभिनेता को सांस लेने में तकलीफ के चलते वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया था। इस दौरान पूरा देओल परिवार मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में मौजूद रहा और कई स्टार भी उनका हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचे। सलमान खान से लेकर शाहरुख खान तक धर्मेंद्र से मिलने अस्पताल पहुंचे। लेकिन, बाद में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था, हालांकि घर में भी अभिनेता लगातार डॉक्टर्स की निगरानी में थे। लेकिन, कई कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका।
धर्मेंद्र का 65 साल लंबा फिल्मी सफर रहा है। धर्मेंद्र ने 1960 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। उनकी पहली फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” थी, जिसके बाद वे 1961 में आई फिल्म “बॉय फ्रेंड” में सपोर्टिंग रोल में नजर आए। पूरे 65 साल तक एक्टिव रहते हुए धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा को कई हिट, सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। अपने करियर में उन्होंने शोले (1975), चुपके-चुपके (1975), सीता और गीता (1972), धरमवीर (1977), फूल और पत्थर (1966), जुगनू (1973) और यादों की बारात (1973) जैसी यादगार फिल्मों में काम किया, जो आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। धर्मेन्द की यादगार फिल्मों में सत्यकाम है। धर्मेंद्र की यह फिल्म साल 1969 में रिलीज हुई थी। इसमें उन्होंने सत्यप्रकाश का किरदार निभाया है, जो अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष करता है। फिल्म की दमदार कहानी और धर्मेंद्र की शानदार एक्टिंग ने फिल्म को क्लासिक बना दिया था। इसी प्रकार चुपके-चुपके एक हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म है, जिसमें धर्मेंद्र ने अपनी एक्टिंग से ऑडियंस के दिलों को जीत लिया था। फिल्म की मजेदार कहानी और धर्मेंद्र की एक्टिंग को दर्शकों ने खूब सराहा था।
फिल्म शोले के वीरू को कौन भूल पाएगा। साल 1975 में रिलीज हुई यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में एक मानी जाती है। इसमें धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया है, जो जय (अमिताभ बच्चन) के साथ मिलकर डाकू गब्बर सिंह (अमजद खान) से बदला लेता है।
धर्मेंन्द्र की हकीकत एक एक्शन-ड्रामा फिल्म साल 1964 में रिलीज हुई थी। इसे चेतन आनंद ने लिखा और डायरेक्ट किया था। इसमें धर्मेंद्र ने कैप्टन बहादुर सिंह का रोल निभाया था। मेरा गांव मेरा देश, रोमांटिक ड्रामा फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी। इसमें विलेन के रोल में विनोद खन्ना नजर आए थे। द बर्निंग ट्रेन धर्मेंद्र की फिल्म साल 1980 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यह बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म थी जिसमें जीतेंद्र, विनोद खन्ना, विनोद मेहरा, हेमा मालिनी और परवीन बाबी जैसे सितारे नजर आए थे। द बर्निंग ट्रेन की रेटिंग 7 है। सीता और गीता फिल्म दो बहनों की कहानी है, जिनमें से एक सीधी-सादी और दूसरी निडर रहती है। धर्मेंद्र ने गीता के प्रेमी का किरदार निभाया था और उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया।
धर्मेंद्र और मीना कुमारी का रिश्ता एक प्रशंसक और स्टार के रिश्ते से ज्यादा था, जिसमें मीना कुमारी ने धर्मेंद्र को उनके शुरुआती करियर में समर्थन दिया और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक संबंध था। हालांकि, दोनों ने कभी भी सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को प्रेम या शादी के रूप में स्वीकार नहीं किया। मीना कुमारी की शादीशुदा जिंदगी की परेशानियों और शराब की लत के बीच धर्मेंद्र को इमोशनल सपोर्ट मिला। फिल्म जगत में शूटिंग के दौरान कई जोड़ियां बनी है जिसमें से कुछ शादी के मुकाम तक पहुंचने के बाद सालों तक कायम रहे तो वहीं कई वक्त के साथ इतिहास के पन्नों तक ही सिमट कर रह गए। एक समय में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर बॉलीवुड की लीजेंडरी एक्ट्रेस मीना कुमारी और एक्टर धर्मेंद्र कुमार के अफेयर की खूब चर्चा हुई। हालांकि, दोनों में से किसी ने भी अफेयर की खबरों पर मुहर नहीं लगाया। दोनों के बीच प्यार की चिंगारी तब उठी थी जब मीना कुमारी अपने करियर के शिखर पर थी तो वहीं धर्मेंद्र कुमार अपने करियर के शुरूआती दौर में ही थे। मीना कुमारी ने 1951 में मशहूर निर्देशक कमाल अमरोही से निकाह किया था लेकिन शादी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। रिश्तों में खटास कुछ इस तरह आई की बात तलाक तक पहुंच गई। 1964 में पति से अलग होने के बाद मीना कुमारी तनहाई में जीने लगी। कहा जाता है कि इसके कुछ समय बाद वह धर्मेंद्र के करीब आ गई। यह वह दौर था जब मीना कुमारी अपने करियर के पीक पर थी, वहीं धर्मेंद्र शुरूआती दौर में थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफेयर के दौरान मीना कुमारी ने धर्मेंद्र को कई फिल्में दिलाई। करियर की बुलंदी पर एक्ट्रेस ने कई निर्देशकों के सामने धर्मेंद्र को फिल्म में लेने की शर्त रखी थी। धर्मेंद्र ने जब बॉलीवुड में कदम रखा था तो वह शादीशुदा थे।
कम उम्र में ही उनकी शादी प्रकाश कौर से हो गई थी और चार बच्चे भी थे। कहा जाता है कि मीना कुमारी के करीब रहते हुए धर्मेंद्र को कई फिल्में मिली और सफल भी हुई। काम में ज्यादा व्यस्त रहने की वजह से दोनों के बीच दूरी आ गई, खासतौर पर फिल्म फूल और कांटों की सफलता के बाद धर्मेंद्र के तेवर काफी बदल गए। मीना कुमारी और धर्मेंद्र ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया था। 1964 में आई फिल्म मैं भी लड़की हूं में दोनों पहली बार एक साथ दिखाई दिए थे। इसके बाद भी दोनों पूर्णिमा, मंझली दीदी, फूल और पत्थर, चंदन का पालना और बहारों की मंजिल जैसे फिल्मों में भी एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आए।
(हिफी डेस्क-हिफी फीचर)



