अपनों ने भी उमर को घेरा

चुनाव घोषणा पत्र एक सनद की तरह होता है जो वक्त आने पर कभी बचाव में तो कभी हमलावर होने मंे काम आता है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए मौजूदा समय मंे उनका चुनाव घोषणा पत्र ही भारी पड़ रहा है। उनके एक सांसद ने याद दिलाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जो वादा किया था, उस पर अमल नहीं हो रहा है। सांसद का यह कटु सत्य फारुख अब्दुल्ला को हजम नहीं हुआ तो उन्हांेने अपने सांसद को इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी।
ध्यान रहे लोकसभा में नेशनल कांफ्रेंस के दो ही सांसद हैं। बहरहाल, पार्टी के अंदर तनातनी चल ही रही थी कि मुख्य विपक्षी भाजपा ने उमर अब्दुल्ला की सरकार पर नाकामी का आरोप लगाते हुए फिर से जनाधार प्राप्त करने की चुनौती दे दी है।
जम्मू एवं कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने गत दिनों को बड़ा राजनीतिक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह आने वाले दिनों में लोकसभा की सदस्यता और नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता, दोनों से इस्तीफा जरूर देंगे। मेहदी ने यह फैसला पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के चलते लिया है। मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। सांसद का आरोप है कि पार्टी अपने चुनावी वादों से पीछे हट रही है। वहीं, हाल ही में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को इस्तीफा देने और नया जनादेश मांगने का चैलेंज दिया था।
मेहंदी ने खास तौर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2024 के घोषणापत्र का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव में अनुच्छेद 370 और 35। की बहाली के लिए प्रयास करने का वादा किया था, लेकिन अब उसका पूरा ध्यान सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने पर रह गया है। मेहदी बार-बार कहते रहे हैं कि सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करना अगस्त 2019 में हटाए गए संवैधानिक संरक्षण का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर पार्टी को लगता था कि अनुच्छेद 370 बहाल नहीं किया जा सकता, तो फिर जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने 2024 के घोषणापत्र में इसकी बहाली को शामिल ही क्यों किया था।
मेहंदी और पार्टी के बीच रिश्ते उस समय और खराब हो गए जब नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में मेहदी ने कहा, श्निश्चिंत रहें, इस्तीफा आएगा। आपके कहने के बिना भी यह इस्तीफा आ जाता, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए।श् यह घटनाक्रम बडगाम विधानसभा उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार के बाद दोनों के बीच बढ़े मतभेदों की पृष्ठभूमि में सामने आया है।सिर्फ 370 ही नहीं, कई मुद्दों पर उठाए सवाल
मेहंदी ने जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों, धार्मिक अधिकारों, परंपराओं, भाषा और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग करना आखिर आपत्तिजनक क्यों हो गया है। मेहंदी ने यह भी याद दिलाया कि जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने स्वायत्तता प्रस्ताव पारित किया था, उस समय फारूक अब्दुल्ला ही मुख्यमंत्री थे। फारूक अब्दुल्ला की ओर से उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर की गई टिप्पणी पर मेहंदी ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह एक शहीद के गौरवान्वित बेटे हैं और शहादत की लंबी परंपरा के उत्तराधिकारी हैं।
मेहंदी के इस्तीफे का असर नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति और संसद में उसकी मौजूदगी पर पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी के लोकसभा में दो सांसद हैं, जिनमें रुहुल्लाह मेहंदी भी शामिल हैं। अगर वह लोकसभा से इस्तीफा देते हैं तो पार्टी की लोकसभा में संख्या घटकर एक रह जाएगी, जब तक उनकी सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी को सफलता नहीं मिलती। हालांकि, मेहंदी का फैसला सिर्फ एक सांसद के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। पार्टी की सदस्यता छोड़ने का उनका ऐलान नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर अनुच्छेद 370, 35ए, राज्य का दर्जा और पार्टी के पुराने चुनावी वादों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है।
दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी ने 2 सितम्बर को नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को उनके गृह विधानसभा क्षेत्र गांदरबल से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी। शर्मा ने कहा कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करना वास्तव में अब्दुल्ला का मुद्दा है, तो उन्हें इसी मुद्दे पर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए। बता दें कि भाजपा नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने श्रीनगर के लाल चैक स्थित घंटाघर के पास प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ नारे लगाए। सुनील शर्मा ने कहा कि लाल चैक से भाजपा कार्यकर्ता सिविल सचिवालय की ओर पहुंचे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुनील शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में आम लोगों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। शर्मा ने कहा, आज आम और गरीब लोगों के लिए जीना मुश्किल हो गया है। पूरे जम्मू-कश्मीर में पानी का संकट है, लेकिन कहीं भी कोई फिटर या कार्यकारी अभियंता नजर नहीं
आता।
शर्मा ने सूबे में अस्पतालों की स्थिति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में जाइए तो डॉक्टर नहीं हैं, मेडिकल स्टाफ नहीं है और गरीबों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। स्कूलों को लेकर उन्होंने कहा, स्कूलों में जाइए तो शिक्षक नहीं हैं, मास्टर नहीं हैं और प्रधानाध्यापक तक नहीं हैं। भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता ने उन्हें राजकुमार की तरह रहने और गुलमर्ग और पहलगाम में स्कीइंग करने के लिए चुना है?
भाजपा नेता ने अब्दुल्ला को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें अभी भी आत्मसम्मान है तो वह अपने गृह क्षेत्र गांदरबल से इस्तीफा दें और जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर फिर से चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा, अगर आपमें जरा भी आत्मसम्मान बचा है तो राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर चुनाव लड़िए तभी हम मानेंगे कि यह वास्तव में आपका मुद्दा है। सुनील शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली का मुद्दा भाजपा का भी है। उन्होंने कहा कि हमने ने लोगों से वादा किया है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। शर्मा ने सरकार पर 25 हजार नौकरियों को आउटसोर्स करने का आरोप भी लगाया।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



