बाॅलीवुड ने भी फिल्मों में सजाई राधा-कृष्ण की झांकी

देश ही नहीं विदेश में भी कृष्ण जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। आम लोगों के अलावा बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी भगवान श्री कृष्ण के काफी भक्त हैं और इस दिन को बहुत ही खास अंदाज से मनाते हैं। बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी मटकी फोड़ प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह साल भर का एक ऐसा दिन है, जब हर कोई भगवान श्री कृष्णा की भक्ति में लीन नजर आता है। वैसे तो बॉलीवुड में काफी फिल्में और शोज बन चुके हैं जिनमें श्री कृष्णा के जीवन की लीला दिखाई गई है लेकिन साल 1993 में जब दर्शकों के बीच शो श्री कृष्णा आया था, तब यह शो हर किसी का पसंदीदा सीरियल हो गया। इस सीरियल में सर्वदमन बनर्जी ने भगवान श्री कृष्ण का किरदार निभाया था। उनके इस किरदार को दर्शक आज भी पसंद करते हैं। सीरियल श्री कृष्णा में भगवान कान्हा के जीवन की सारी लीला दिखाई गई थी। जिसमें श्री कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध तक की सारी कहानी दर्शकों के बीच में आई थी। साल 1998 में आई महाभारत में एक्टर नितेश भारद्वाज ने भगवान श्री कृष्ण का किरदार निभाया था। शो से नितीश भारद्वाज को काफी लोकप्रियता मिली। जिसके बाद एक्टर को हर घर में पसंद किया जाने लगा। इन दिनों नितीश भारद्वाज काफी चुनिंदा प्रोजेक्ट में नजर आ रहे हैं। उनको बीते सालों रिलीज हुई फिल्में मोहनजोदड़ो और केदारनाथ में देखा गया है। लेकिन दर्शकों उनको महाभारत में निभाई हुए श्री कृष्ण के किरदार को सबसे ज्यादा याद करते हैं। इसके साथ ही फिल्मों में राधा-कृष्ण से जुड़े गीत भी काफी लोकप्रिय हुए।
साल 1972 में आई फिल्म अमर प्रेम का यह सदाबहार कृष्ण भक्ति गीत बड़ा नटखट है… आज भी जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और प्रेम के साथ सुना जाता है, 28 जनवरी 1972 को रिलीज हुई इस फिल्म के इस गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी रूहानी आवाज में गया । था। गीत के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत आर।डी। बर्मन ने तैयार किया था। इसमें यशोदा मैया का प्यार, ममता और नटखट बालक कृष्ण की मनमोहक लीलाओं का वर्णन है।
मच गया शोर सारी नगरी में (फिल्म: खुद्दार, 1984) – किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना दही-हांडी और जन्माष्टमी उत्सव का सबसे बड़ा एंथम माना जाता है।मैया यशोदा (फिल्मरू हम साथ-साथ हैं, 1999) – मैया यशोदा गीत को अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और अनुराधा पौडवाल ने गाया है, जो बच्चों के कार्यक्रमों और आयोजनों में बहुत लोकप्रिय है। राधा कैसे ना जले (फिल्म: लगान, 2001) – आशा और उदित नारायण का यह शास्त्रीय धुनों पर सजा सुंदर गीत कान्हा और राधा की नोकझोंक को दर्शाता है। गो गो गोविंदा (फिल्म: ओह माय गॉड!, 2012)- दही-हांडी और मटकी फोड़ने के जोश से भरपूर यह एक बेहद एनर्जेटिक डांस गाना है।राधे राधे (फिल्म: ड्रीम गर्ल, 2019) – युवाओं के बीच जन्माष्टमी का रंग जमाने वाला एक आधुनिक और झूमने पर मजबूर करने वाला गीत। बड़ा नटखट है ये कृष्ण कन्हैया (फिल्म: अमर प्रेम, 1972) – लता मंगेशकर का गाया यह प्यारा गीत कान्हा की बाल-लीलाओं को समर्पित है। मोहे पाघट पे नन्दलाल (फिल्म: मुगल-ए-आजम, 1960)- लता मंगेशकर की आवाज में जन्माष्टमी के प्रसंग पर फिल्माया गया ऐतिहासिक और बेहतरीन गीत है। याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 1 जुलाई 1975 को रिवीज हुई फिल्म ‘गीत गाता चल’ का यह लोकप्रिय भक्ति गीत ‘श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम’ आज भी
कृष्ण भक्तों के दिलों में जगह बनाए हुए है। इस गीत को जसपाल सिंह और आरती मुखर्जी ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया था, जबकि इसके गीत और संगीत दोनों रवींद्र जैन ने तैयार किए थे। इस गाने में कृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम को दिखाया गया है।
फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ 24 मार्च 1978 को बड़े पर्दे पर रीलीज हुई थी। इसके कृष्ण पर बने लोकप्रिय भक्ति गीत ‘यशोमती मैया से बोले नंदलाला आज भी लोगों की जुबान पर बसा हुआ है। इस गीत को लता मंगेशकर और मन्ना डे ने अपनी आवाज से सजाया, जबकि इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था । इसके खूबसूरत बोल पंडित नरेंद्र शर्मा ने लिखे थे। इसमें कान्हा के जरिए यशोदा मां से अपने सांवरे रंग और राधा के गोरे रंग को लेकर सवाल पूछा जाता है। जिसे सुनकर आज भी चेहरे पर मुस्कान छा जाती है। इसी प्रकार सुभाष घई के जरिए निर्देशित बॉलीवुड फिल्म किसना: द वॉरियर पोएट 21 जनवरी 2005 को रिलीज हुई थी। इसका कृष्ण भक्ति पर आधारित गाना वो किसना हैश् भगवान श्रीकृष्ण की सुदर रूप का वर्णन करता है। इस गीत को सुखविंदर सिंह, इस्माइल दरबार और आयशा दरबार ने अपनी आवाज दी थी। इसके बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
कहा जाता है कि श्री कृष्ण का नाम लेने से ही जीवन से सारे दुःख और कष्ट मिट जाते हैं और व्यक्ति को शांति तथा परम् आनंद की प्राप्ति होती है। हिंदू दर्शनशास्त्र के अनुसार प्रत्येक देवी-देवता के साथ कुछ विशेष गुण जुड़े होते हैं। जब भी हम भगवान शिव के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में ध्यान में बैठे हुए भगवान शिव का शांत, सौम्य चेहरा, जिनके माथे पर अर्द्धचन्द्राकार शशि सुशोभित है, की छवि ही दिखाई देती है। जब हम भगवान राम के विषय में सोचते हैं तो उनके विशेष गुणों, विनम्रता, कर्त्तव्यपरायणता तथा न्याय पराण्यता पर ही ध्यान जाता है। इसी प्रकार देवी दुर्गा की छवि देवी माँ की ही तरह दिखती है किंतु, भगवान कृष्ण का व्यक्तित्व ऐसा है जिनके साथ अनेकों गुण जुड़े हैं।
वे ऐसे देवता हैं जिन्होंने अपने शैशवकाल में ही पूतना जैसी राक्षसी का वध किया तथा अपनी माँ यशोदा को अपने मुँह में संपूर्ण ब्रह्मांड, समष्टि के दर्शन करा दिए। उनको एक नटखट, चंचल बालक के रूप में भी जाना जाता है, जो बचपन में माखन चुरा कर खाता था, जिसने विशाल नाग कालिया को हराया तथा गोपियों संग मस्ती और लीलाएँ करी और बाद में कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में गीता के रूप में अर्जुन को परम ज्ञान दिया।श्रीमद् भागवत् में कृष्ण जन्म से जुड़ी अनेक कथाएँ हैं। ऐसी मान्यता है कि किसी देवता, किसी भगवान को उनके बालपन वाले रूप में दर्शन करना अपने आप में एक अत्यंत दुर्लभ घटना है, जिसके लिए देवता लोग भी युगों तक राह देखते हैं। एक लोकप्रिय कहानी के अनुसार, एक बार भगवान शिव भी योगी का रूप धारण कर गोकुल आए थे, ताकि भगवान कृष्ण को बाल रूप में देख सकें। इस पूरे दृष्टांत पर अनेक भजन गाए गए हैं। इसी प्रकार की तमाम कथाएं हैं जो नटखट कान्हा से योगेश्वर कृष्ण तक की झांकी दिखाती हैं।(हिफी डेस्क-हिफी फीचर)



