लेखक की कलम

याद आए विद्याचरण शुक्ल

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)
आज से लगभग 13 साल पहले छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा निकल रही थी। उस यात्रा पर माओवादियों ने घातक हमला किया था। हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हो गयी थी। इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया और मुकदमा चलाया गया। इसकी जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अर्थात एनआईए को सौंपी गयी थी। गत 5 सितम्बर को एनआईए ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। इस फैसले से विद्याचरण शुक्ल की यादें ताजा हो गयीं। संयुक्त मध्य प्रदेश में कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने बस्तर क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया था। मध्य प्रदेश से अलग करके जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, तब विद्याचरण शुक्ल मुख्यमंत्री बनने का हक जता रहे थे। उनकी राह में पार्टी के ही प्रतिद्वन्द्वी रोड़ा बन गये और नौकरशाही से राजनीति में आये अजीत जोगी को इस आधार पर मुख्यमंत्री बनाया गया कि वह आदिवासी समुदाय से हैं और छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है। पार्टी का यह फैसला विद्या बाबू को बहुत अखरा और वह अजीत जोगी सरकार के खिलाफ समानांतर सरकार चलाते रहे। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हांेने शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का दामन थामा लेकिन फिर कांगे्रस मंे वापस आये और उसी पार्टी को सत्ता में लाने के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। एनआईए की विशेष अदालत के फैसले ने एक बार छत्तीसगढ़ की सियासत के पन्ने पलट दिये हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 आरोपियों को 5 सितम्बर को दोषी ठहराया। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चैधरी ने बताया कि जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत की अदालत ने दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। विद्याचरण शुक्ल के निधन के बाद छत्तीसगढ़ में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई थी। शुक्ल 9 बार सांसद रहे।इसके अलावा वे केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों में भी मंत्री रहे। इतनी ज्यादा उम्र होने के बावजूद शुक्ल राजनीति मंे सक्रिय थे। वे 1957 से 1962 के बीच तीसरी लोकसभा में पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद वे चैथी, पाचवीं, सातवीं, आठवीं, नौवी, दसवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हिस्सा लेने के लिए बस्तर गए थे। विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में वे बहुत चर्चित हुए थे। यह हमला 25 मई 2013 को हुआ था जब माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल तथा वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। यह रैली 2013 के अंत में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई थी।घटना के बाद राज्य पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन रमन सिंह नीत तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी। राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की
अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया था। (हिफी)

 

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