
भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का रिश्ता सखा भाव यानी मित्रता का था। पुराणों मंे इन दोनों के प्रेम भाव के अनेक प्रसंग मिलते हैं। पुराणों मंे इन दोनों के प्रेम भाव के अनेक प्रसंग मिलते हैं। पुराणों में प्राप्त कथा के अनुसार एक बार युद्ध में भगवान कृष्ण जब अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध करते समय उनकी उंगली कट गई और उससे खून बहने लगा। द्रौपदी दुःखी हो गईं। उनसे यह नहीं देखा गया। द्रौपदी ने अपनी साड़ी को फाड़कर एक कपड़ा श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया जिससे कृष्ण भगवान को राहत मिल गयी। द्रौपदी के इस स्नेहपूर्ण व्यवहार से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें हमेशा सुरक्षा का वचन दिया।
रक्षा सूत्र परम्परा, महत्व और कुछ कहानियाँ
इसी वचन को उन्होंने चीर हरण के समय भरी सभा में कौरवों से द्रौपदी की रक्षा करके निभाया था। कहते हैं तभी से रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है और यह माना भी जाता है कि सिर्फ बहन ही भाई को नहीं बल्कि मित्र भी अपने मित्र को रक्षा के वचन के साथ रखी बांध सकता है। तो इस रक्षाबंधन पर एक राखी अपने मित्र के लिये भी बांध आइये।
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं



