मांगे वारिद देहिं जल…

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जब वनवास की अवधि पूरी करने के बाद अयोध्या मंे सिंहासन पर विराजमान हुए, उसी के बाद रामराज्य प्रारम्भ हुआ था। इस रामराज्य के बारे मंे गोस्वामी तुलसीदास ने अपने लोकप्रिय प्रबंध काव्य रामचरित मानस मंे बताया है कि सभी लोग परस्पर हिलमिलकर रहते थे। किसी से किसी को दुश्मनी नहीं थी। नदी-समुद्र भी अपनी-अपनी सीमा मंे रहते थे। यहां तक कि कृषि प्रधान देश भारत मंे मेघों से जब भी याचना की जाती थी, तब पानी बरसता था। उस युग की प्रगति के बारे मंे आधी-अधूरी जानकारी रखने वाले इन बातों को कपोल कल्पित बताते हैं लेकिन नदियों पर बांध बनाकर उन्हंे नियंत्रित किया गया है और अब कृत्रिम बारिश भी होने लगी है। निश्चित रूप से इसमंे बादलों का संयोग रहता है लेकिन आर्टिफिशियल रेन अब हकीकत बन चुकी है।
प्रदूषण को दूर करने मंे विश्ेष रूप से इसका इस्तेमाल होता है। दिल्ली देश की राजधानी है लेकिन प्रदूषण के मामले मंे सबसे पहला नम्बर उसी का रहता है। पिछली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार को पराजित कर भाजपा ने रेखा गुप्ता के नेतृत्व मंे सरकार बनायी है। रेखा गुप्ता ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार यमुना को स्वच्छ करेगी और दिल्ली को धुंध (प्रदूषण) से भी निजात दिलाएगी दीपावली के बाद दिल्ली मंे प्रदूषण बढ़ गया है। इसलिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में 29 अक्टूबर को कृत्रिम बारिश करायी जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 28, 29 और 30 अक्टूबर को दिल्ली के आसमान पर बादलों के रहने की प्रबल संभावना है। भारत के लिए तकनीकी दृष्टि से यह ऐतिहासिक अवसर होगा। कृत्रिम बारिश का तकनीकी ट्रायल 24 अक्टूबर को किया गया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीते कई दिनों से प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर है। ऐसे में वायु प्रदूषण को काबू में करने के लिए दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के माध्यम से आर्टिफिशियल बारिश कराने की लगातार चर्चा हो रही है। अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बात को कंफर्म कर दिया है कि दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश कराई जाएगी। रेखा गुप्ता ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के माध्यम से आर्टिफिशियल बारिश कराने की तारीख का भी ऐलान कर दिया है। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया- दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग के माध्यम से कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विशेषज्ञों द्वारा बुराड़ी क्षेत्र में इसका सफल परीक्षण किया गया है। मौसम विभाग ने 28, 29 और 30 अक्टूबर को बादलों की उपस्थिति की संभावना जताई है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 29 अक्टूबर को दिल्ली पहली कृत्रिम बारिश का अनुभव करेगी। यह पहल न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने का एक वैज्ञानिक तरीका भी स्थापित करने जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि इस नवाचार के माध्यम से राजधानी की हवा को स्वच्छ और वातावरण को संतुलित बनाया जा सके। इस प्रयास को सफल बनाने में लगे हमारे कैबिनेट सहयोगी मनजिंदर सिरसा और सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं।
दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश की तारीख की घोषणा पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को धन्यवाद देना चाहता हूं। उनके नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद के कारण इस अनूठे प्रयास के लिए सभी अनुमतियां समय पर उपलब्ध हो गईं। आईआईटी कानपुर से मेरठ, खेकड़ा, बुराड़ी, सादकपुर, भोजपुर, अलीगढ़ होते हुए दिल्ली क्षेत्र और वापस आईआईटी कानपुर तक एक ट्रायल सीडिंग फ्लाइट की गई, जिसमें पायरो तकनीक का उपयोग करके खेकड़ा और बुराड़ी के बीच और बादली क्षेत्र के ऊपर क्लाउड सीडिंग फ्लेयर्स को फायर किया गया। यह उड़ान क्लाउड सीडिंग की क्षमताओं, विमान की तैयारी और सहनशक्ति, क्लाउड सीडिंग फिटमेंट और फ्लेयर्स की क्षमता का आकलन और सभी शामिल एजेंसियों के बीच समन्वय की जांच करने के लिए ट्रायल उड़ान थी। जानकारी के मुताबिक, कृत्रिम बारिश के टेक्निकल ट्रायल में आज तकरीबन 4 घंटे का समय लगा जिसमें की सेसना प्लेन का आईआईटी कानपुर से चलकर आईआईटी कानपुर पहुचने का समय शामिल है। दिल्ली के आसमान में ये प्लेन 40 से 50 मिनट रहा। सिर्फ नार्थ दिल्ली के बुराड़ी इलाके में ही ये ट्रायल संभव हो पाया। दिल्ली सरकार ये ट्रायल करोल बाग में भी करना चाहती थी जिसके लिए आईटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से परमिशन नहीं मिल पाया। दिल्ली सरकार के मुताबिक अगर 29 या 30 तारीख को दिल्ली के आसमान में बादल रहे, जैसा कि मौसम विभाग बता रहा है, तो 40 से 50 मिनट के समय में दिल्ली के कई इलाकों में कृत्रिम बारिश कराई जाएगी।
दिल्ली में दीवाली के बाद लगातार वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आनंद विहार और अक्षरधाम समेत कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के अनुसार, 24 अक्टूबर को सुबह आनंद विहार क्षेत्र के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 403 दर्ज किया गया वहीं, अक्षरधाम इलाके में एक्यूआई 403 दर्ज किया गया जोकि गंभीर श्रेणी में है। सीपीसीबी के मुताबिक, आईटीओ क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 316 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में है। इंडिया गेट और आसपास के इलाकों में एक्यूआई 254 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में है। एम्स और आसपास के इलाकों में एक्यूआई 295 दर्ज किया गया जोकि खराब श्रेणी में है। सीपीसीबी द्वारा विकसित एक्यूआई निगरानी मोबाइल एप्लिकेशन, समीर ऐप के अनुसार, अशोक विहार (322), बवाना (348), बुराड़ी क्रॉसिंग (335), आईएचबीएएस दिलशाद गार्डन (307), आईटीओ (316), जहांगीरपुरी (350), नेहरू नगर (314), डीयू नॉर्थ कैंपस (303), पटपड़गंज (324), पंजाबी बाग (313), आरके पुरम (315), शादीपुर (306), सोनिया विहार (306), विवेक विहार (346), और वजीरपुर में एक्यूआई 337 दर्ज किया गया। जोकि बहुत खराब श्रेणी में है।
कई इलाकों में एक्यूआई सुधरकर खराब श्रेणी में पहुंच गया, जिनमें अलीपुर (285), आया नगर (236), सीआरपीआई मथुरा रोड (274), डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज (290), डीटीयू (244), द्वारका सेक्टर-8 (290), आईजीआई एयरपोर्ट (257), जेएलएन स्टेडियम (290), मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम (279), मंदिर मार्ग (285), मुंडका (280), नजफगढ़ (206), नरेला (291), एनएसआईटी द्वारका (238), ओखला फेज-2 (296), पूसा (277), सिरीफोर्ट (295) और श्री अरबिंदो मार्ग (219) शामिल हैं। इससे पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तेज सतही हवाओं की वजह से मामूली सुधार हुआ, लेकिन लगातार चैथे दिन भी यह बहुत खराब श्रेणी में बनी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शाम चार बजे 305 रहा। आनंद विहार में एक्यूआई 410 दर्ज किया गया- जो सभी निगरानी केंद्रों में सबसे अधिक है। सीपीसीबी द्वारा बनाए गए समीर ऐप के अनुसार, शहर भर के 38 निगरानी केंद्रों में से 23 ने ‘‘बहुत खराब’’ वायु गुणवत्ता दर्ज की, जबकि 14 ‘‘खराब’’ श्रेणी में रहे। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



