सपा की बिहार से बढ़ती दूरी

एक समय था जब बिहार में समाजवादी पार्टी को बहुत महत्व दिया जा रहा था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्षी दलों का एक दशक पहले 2015 में जब पहला गठबंधन बना था तो उसका संयोजक मुलामय सिंह यादव को ही बनाया गया था। हालांकि ठीक चुनाव के पहले ही नेताजी ने धोबी पाट खेला और महागठबंधन से अलग हो गये थे। इसके बाद बिहार से समाजवादी पार्टी की दूरी लगातार बढ़ती गयी है। मौजूदा समय मंे विपक्षी दलों का महागठबंधन इंडिया विधानसभा चुनाव में राजद नेता तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर साथ-साथ लड़ रहा है। सपा ने पहले बिहार मंे विधानसभा की सीटें मांगी थीं लेकिन अब पार्टी गठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन के लिए तैयार हो गयी है। समाजवादी पार्टी ने बिहार में चुनाव प्रचार के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी है। इसमंे वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान का नाम भी शामिल है। आजम खान ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव में प्रचार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि आजम खान ने जिस तरह से इनकार किया है, उससे उनकी नाराजगी के कयास भी लगाये जा रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों के बीच किसी प्रकार की नाराजगी से इनकार किया है लेकिन यह अध्याय रामपुर की यात्रा के बाद भी बंद नहीं हुआ है।
बिहार चुनाव में सीधे लड़ने के बजाय इंडी गठबंधन को समर्थन दे रही सपा अब प्रचार युद्ध में भागीदारी को भी तैयार है। पार्टी गठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। सूची में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, उनकी पत्नी मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के साथ हाल ही जेल से रिहा हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां का नाम भी शामिल है। नवंबर की शुरुआत में सपा प्रमुख की जनसभा का कार्यक्रम भी तय किया जा रहा है। सपा की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव का नाम शामिल नही है। परिवार के सदस्यों के मामले में अखिलेश व डिंपल के साथ केवल पूर्व सांसद एवं विधायक तेज प्रताप सिंह यादव को ही जगह दी गई है। सूची में ज्यादातर सांसदों को जगह दी गई है और जातीय समीकरणों के हिसाब से नाम तय किए गए हैं। सूची में दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा का नाम है। उनके अलावा सांसद अफजाल अंसारी, अवधेश प्रसाद, बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रमाशंकर विद्यार्थी राजभर, लाल जी वर्मा, छोटेलाल खरवार, राजीव राय, सनातन पांडेय, इकरा हसन, प्रिया सरोज व लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, विधायक ओम प्रकाश सिंह, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव और प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सोलंकी का नाम भी शामिल हैं।
सपा प्रमुख ने बिहार में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए गठबंधन को बधाई दी। अजमेर में उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि बिहार की जनता तेजस्वी यादव और इंडी गठबंधन को बिहार का विकास करने और युवाओं का भविष्य संवारने का मौका देगी।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है। अखिलेश यादव नवंबर के पहले हफ्ते में ताबड़तोड़ रैली कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान ने गत दिनों एक बड़ा बयान दिया है। बिहार चुनावों के लिए सपा के स्टार प्रचारकों में शामिल आजम खान ने कहा है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। आजम के बयान को इस बात का इशारा माना जा रहा है कि वह बिहार में शायद ही प्रचार कर पाएं, क्योंकि चुनावों में बहुत ही कम वक्त रह गया है। पिछले कई महीनों से आजम खान की अखिलेश यादव से नाराजगी की खबरें भी चलती रही हैं, लेकिन दोनों ही नेताओं ने इन्हें खारिज किया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरपरस्ती वाली समाजवादी पार्टी ने बिहार चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की जो लिस्ट जारी की है उसमें आजम खान का नाम भी शामिल है। अखिलेश यादव के इस बयान पर कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, आजम खान ने कहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष के तजुर्बे मुझसे कहीं ज्यादा हैं। हमें तो ऐसी खबरों से इत्मीनान मिलता है। वहीं, तेजस्वी यादव को महागठबंधन की तरफ से बिहार में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने पर आजम खान ने कहा कि अगर यह अलायंस का फैसला है तो सभी को मान्य है। आजम खान ने चिराग पासवान के बयान मुस्लिम वोट बैंक के लिए तेजस्वी को सीएम फेस बनाया गया है पर पूछा कि क्या मुसलमानों को समंदर में फेंक देना चाहिए।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पूर्व मंत्री आजम खान से मिलने उनके घर रामपुर भी गए थे। इस दौरान रामपुर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी नहीं दिखे। आजम खान अखिलेश यादव को रिसीव करने खुद गए। आजम खान ने रामपुर सांसद से मिलने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ही मिलेंगे। लगभग दो साल जेल में बिताने के बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से आजम के रिहा होने के बाद दोनों के बीच यह पहली मुलाकात है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को आजम खान से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद अखिलेश ने कहा कि आजम खान पर झूठे मुकदमे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आजम खान समाजवादी पार्टी की बुनियाद हैं और सबसे पुराने नेता हैं।
अब लगभग एक दशक पहले की चर्चा करें। जनता परिवार को एक करने के लिए जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौडा की जनता दल (सेकुलर), इंडियन नेशनल लोकदल और कमल मोरारका की समाजवादी जनता पार्टी का एक महागठबंधन बनाया गया था। महागठबन्धन का संयोजक सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को बनाया गया था। यादव के दिल्ली आवास पर देेवेगौडा, नितीश कुमार, शरद यादव, चैटाला और कमल मोरारका की तीन बार बैठके भी हुई। सभी ने प्रान्तवार मिलजुल कर चुनाव लडने का निर्णय लिया था, लेकिन महागठबन्धन से सपा अलग हो गयी।
उत्तर प्रदेश में तब सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी(सपा) ने बिहार में बने महागठबंधन से अलग होने का एलान कर दिया था। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो रामगोपाल यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यू), पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के महागठबंधन से हम अलग हो रहे हैं। यादव ने कहा कि पार्टी बिहार में अपने बलबूते पर चुनाव लडेगी। पार्टी बिहार के लिए अलग से लिस्ट जारी करेगी। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा के चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर सपा की बिहार इकाई में असंतोष था। टिकट बंटवारे में सपा के हिस्से में महज पांच सीटें ही आई थीं। पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी महज 5 सीटें मिलने से नाराज थे। यादव ने कहा कि सीटो के बंटवारे के समय जनता दल (यूनाइटेड), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने सपा से कोई रायशुमारी ही नहीं की। सीटो को अपने अपने में बांट लिया। अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने समन्वय का रुख अपनाया है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



