चिंताजनक हो रहे सड़क हादसे

देश की सड़कों पर दुर्घटनाओं में रोजाना करीब पांच सौ लोगों का खून बह रहा है। यह हम नहीं कह रहे, खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री लोकसभा में जानकारी देते हैं। उनके शब्दों में इस अक्षम्य अव्यवस्था के लिए कोई शर्मिंदगी भी नही है। वह लोकसभा में प्रश्नोत्तर में बताते हैं कि देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख 80 हजार लोगों की मौतें हो जाती हैं। इन मौतों में 67 प्रतिशत वे लोग हैं, जिनकी उम्र 18 से 34 साल के बीच है। एम्स की एक रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि दुर्घटना का शिकार हुए लोगों को अगर समय से इलाज मिल जाए, तो 50 हजार लोगों की जान बचाई जा सकती है। केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश की सड़कों पर होने वाली यातायात उल्लंघन की घटनाओं के मद्देनजर अपनी हताशा व्यक्त की है। ये बढ़ोत्तरी मोटर वाहन अधिनियम 2019 में किए गए संशोधनों के बाद देखी गयी है। एक तरफ जहां, इस संशोधन से व्यापक यातायात उल्लंघन में वृद्धि पर रोक लगने की उम्मीद थी, वहीं दूसरी तरफ पाया ये गया कि इन सभी बदलावों के बाद भी उल्लंघन की घटनाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं देखी जा रही है। इसके बजाय, 2019 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में निरंतर वृद्धि ही हुई है। बढ़ाए गए जुर्माने की राशि द्वारा मनचाहा परिणाम नहीं मिलने की स्थिति ने परिवहन मंत्री को इस बात से तो पूरी तरह आश्वस्त कर दिया है की मात्र जुर्माने की राशि में इजाफा करने भर से इस मुद्दे को निपटने में आंशिक मदद ही मिल पाएगी।
उन्होंने कहा कि 2022 में, कुल 50,029 लोगों की मौत हेलमेट के इस्तेमाल नहीं करने को वजह से हुयी। दरअसल भारतीय सड़कों पर चलने वाले लोगों में लेन अनुशासन की कमी, नियंत्रित एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा में वृद्धि कहीं न कहीं जिम्मेवार है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 2023-24 में प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट 2022 के कैलेंडर में घटी दुर्घटनाओं के आंकड़े साझा करती है। इस वर्ष के दौरान 461,312 दुर्घटनाओं में 443,366 लोग घायल हुए और कुल 168,491 लोग मारे गए। वर्ष 2005 ने कुल 94,968 मौतें दर्ज की हैं। 17 सालों में सड़क हादसे में होने वाली मौतों में 177 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2022 में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कुल मिलाकर जितनी मौतें हुई हैं, उनमें दुपहिया वाहनों की वजह से कुल 44.5 प्रतिशत मौतें हुई हैं। इनमें जान गंवाने वाले पैदलयात्री 19.5 प्रतिशत, हल्के मोटर वाहन से मरने वाले 12.5 प्रतिशत, भारी वाहनों से मरने वाले लोगों की संख्या 6.3 प्रतिशत, ऑटोरिक्शा से मरने वाले 3.9 प्रतिशत, साइकिल से 2.9 प्रतिशत और बसों से मरने वाले वाले लोगों की संख्या 2.4 प्रतिशत थी, जबकि बाकी अन्य वजहों से मरने वाले कुल 8 प्रतिशत थे।
राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे में ही 39.2 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं और 36.2 प्रतिशत मौतें दर्ज हुई हैं। राज्यमार्गों पर घटी कुल 23.1 प्रतिशत दुर्घटनाओं में 24.3 प्रतिशत मौतें हुई है। बाकी अन्य सड़कों पर हुई 43.9 प्रतिशत दुर्घटनाओं में 39.4 प्रतिशत मौतें हुई है। सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं की संख्या तमिलनाडु में दर्ज की गई है, वहीं उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है और वर्ष 2022 में होने वाली कुल 72.3 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं और 72.1 प्रतिशत के दर से होने वाली कुल मौत के लिए, सड़कों पर ओवर स्पीडिंग चलाने की वजह से 5.4 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती है। गलत दिशा में वाहन चलाने से दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुई हैं। घुमावदार, खड़ी, और गड्डों वाली सड़कों पर महज 13.8 प्रतिशत घटनाएं घटी हैं। दुर्भाग्यवश, 66.5 प्रतिशत घटी दुर्घटनाओं में 18-45 वर्षों की उम्र सीमा के बीच के लोग शिकार रहे हैं और वे लोग जो 18-60 वर्ष के कामकाजी समूह से संबंधित है, उनका इन सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने का प्रतिशत 83.4 रहा है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जो सड़क दुर्घटनाएं होती हैं उनमें से कुल 16.6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं और कुल 10.1 प्रतिशत सड़क पर होने वाली मौतें इन्हीं 10 मिलियन प्लस की आबादी वाले शहरों में होती है। पिछले वर्षों की तुलना में ये उल्लेखनीय रूप से कुछ ज्यादा ही थे। इसके अलावा, सभी मिलियन प्लस (लाखों की आबादी) वाले शहरों में सड़क दुर्घटनाओं का योगदान 46 प्रतिशत है। इंदौर और जबलपुर को पीछे छोड़ते हुए, दिल्ली ने सड़क दुर्घटनाओं की सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। अमृतसर, धनबाद और जमशेदपुर ने सबसे कम सड़क दुर्घटनाओं को सूचीबद्ध किया है। इन दुर्घटनाओं की वजह व्यापक तौर पर देशभर में कमोबेश एक जैसी प्रवृत्ति से मेल खाती है। हालांकि, देश की कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोग इन मिलियन प्लस शहरों में ही बसे हैं, इस कारण शहरी सड़कें ज्यादा सुरक्षित बन कर उभर रहीं हैं।
प्रति वर्ष विश्व स्वास्थ्य संस्थान वैश्विक स्थिति रिपोर्ट जारी करती है। ताजा रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं के लिए प्रमुख रूप से तीव्र गति से वाहन चालन, शराब या फिर अन्य साइको एक्टिव पदार्थों के सेवन, बगैर हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाना, सीट बेल्ट और बच्चों पर प्रतिबंध, गाड़ी चलाने के वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल, सड़कों का असुरक्षित ढांचा, असुरक्षित वाहन, दुर्घटना के बाद अपर्याप्त देखभाल एवं ट्रैफिक नियमों को सही तरीके लागू न किया जाना शामिल है। समस्त वैश्विक वजहें भारतीय संदर्भ में सटीक हैं। जैसे कि ऊपर कहा गया है, होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह तीव्र गति से वाहन चलाना है, उसके बाद शराब के नशे में गाड़ी चलाना और गाड़ी चलाने के दौरान एकाग्रता की कमी भी प्रमुख वजह है। सड़क इंजीनियरिंग में त्रुटियाँ, अचानक से सामने आ जाने वाले पॉटहोल अथवा खडे, अधिक पुराने पड़ चुके वाहन एवं ओवरलोडिंग आदि भी कुछ अन्य कारक हैं। हालांकि, स्थानीयता से जुड़े
लोगों की कुछ विशेष आदतें भी हैं जो इसकी वजह है। लिस्ट किए गए प्रमुख कारण जो दुर्घटना को अंजाम देती है उसमें, सड़क की गलत दिशा में गाड़ी चलाने से होने होने वाली सड़क दुर्घटनाओं (4.9 प्रतिशत), लाल बत्ती की अनदेखी (0.9 प्रतिशत दुर्घटनाएं) करना भी एक कारण है। इसके अलावा अफरा तफरी के माहौल में लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाना आदि शामिल है। इस वजह से परिवहन मंत्री द्वारा भारत की सड़कों पर व्याप्त अनियमितताओं पर की गई टिप्पणी काफी हद तक सही है।
इन मुद्दों को देखते हुए जरूरी है कि एक जनजागरण अभियान चलाया जाये। इससे लोगों को उनके ऐसे व्यवहारों की वजह से पैदा होने वाले खतरों के बारे में शिक्षित किया जा सकेगा एवं उन्हें जिम्मेदार एवं अनुशासित सड़क व्यवहार के लिये प्रोत्साहित किया जा सकेगा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी वाहनों की गुणवता में काफी सुधार हुए हैं। हल्के मोटर वाहन अब आवश्यक सुरक्षा एयरबैग से लैस हैं। हालांकि, सड़क, बढ़ते बाहन और बढ़ती आबादी, सड़कों पर लोग एवं वाहनों की भारी उपस्थिति के परिणामस्वरूप काफी अधिक संख्या में दुर्घटनाओं के घटने की संभावना रहती है। उच्चस्तरीय सड़क अपराध की घटनाओं के साथ मिलकर, सड़कों पर होने वाले विविध दुर्घटनाओं के लिए एक बेहद मजबूत संयोजन का निर्माण करती है। सड़क दुर्घटनाएं न केवल जान-माल की हानि करती है, बल्कि अर्थव्यवस्था को बर्बाद करती है। आवश्यकता इस बात की है कि बढते सड़क हादसे रोकने के लिए सख्त नीति बनायी जाए।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)


