भगवान सूर्य को समर्पित है 2026

साल 2026 में सूर्य देव की मूर्ति या तस्वीर घर लेकर आएं और इसे पूर्व दिशा में रखें। घर में सूर्य देव की तस्वीर रखने से परिवार के सदस्यों की मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। साथ ही उन्हें अपने जीवन में खूब तरक्की मिलेगी।
वर्ष 2026 की शुरुआत शुभ संयोग के साथ हो रही है। 1 जनवरी को ही कई योग बन रहे हैं, जो धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभकारी रहेगा। ऐसे में नए साल के दिन इन कार्यों को करने से पूरे साल सुख, सौभाग्य और समृद्धि की वर्षा होगी। ज्योतिष शास्त्र में साल 2026 को अत्यंत ही महत्वपूर्ण वर्ष माना जा रहा है। अंक ज्योतिष के अनुसार, 2026 सूर्य का साल होगा। हर नया साल किसी न किसी ग्रह से संबंधित होता है। कौनसा साल किस ग्रह का होगा यह अंक योग के जरिए निकाला जाता है। जैसे साल 2026 का अंक योग निकाले तो 2 ़ 0 ़ 2 ़ 6 = 10 फिर 1 ़ 0 = 1। अंक ज्योतिष में अंक 1 के स्वामी सूर्य माने जाते हैं। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रह को मान-सम्मान, नेतृत्व, आत्मविश्वास, ऊर्जा और नई शुरुआत का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में साल 2026 में इन क्षेत्र में कई बड़े प्रभाव देखने के मिलेगा। मूलांक 1 वालों को साल 2026 में अपार सफलता, तरक्की और मान-सम्मान में वृद्धि मिलने के योग हैं।
साल 2026 में सूर्य देव की मूर्ति या तस्वीर घर लेकर आएं और इसे पूर्व दिशा में रखें। घर में सूर्य देव की तस्वीर रखने से परिवार के सदस्यों की मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। साथ ही उन्हें अपने जीवन में खूब तरक्की मिलेगी। तांबे का सूर्य चिन्ह भी लाना बहुत ही शुभ रहेगा। इस सूर्य चिन्ह को आप घर के मुख्य द्वार या पूर्व दिशा की दीवार पर लगा दें। प्रतिदिन इस पर गंगाजल छिड़कें और रोली का टीका लगाएं। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और करियर में कामयाबी भी मिलेगी। अगर आप अपनी कुंडली में सूर्य को मजबूत करना चाहते हैं तो साल 2026 में तांबे की चीजें घर लेकर आएं। तांबे का लोटा, गिलास या तांबे की अन्य चीजें घर लाना शुभ होगा।
साल 2026 सूर्य का साल है। ऐसे में सूर्य देव की सात घोड़े वाले रथ पर सवार वाली तस्वीर घर लेकर आएं। इस तस्वीर को घर की पूर्व दिशा में लगाएं। सूर्य देव की यह तस्वीर ज्ञान और ऊर्जा के प्रतीक माना जाता है। घर में इस तस्वीर को रखने से ज्ञान में वृद्धि होती है। समाज में मान-सम्मान मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अच्छा रहेगा रोजाना स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें।
तांबे के लोटे से ही सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल वाले लोटे में लाल फूल, रोली और अक्षत मिलाएं। रविवार के दिन गुड़, गेहूं, अन्न और धन का दान करें। जल चढ़ाते समय ‘सूर्याय नमः’ या ‘घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें तथा पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इस साल नए साल की शुरुआत गुरुवार के दिन से हो रही है। वहीं इस दिन साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। तो 1 जनवरी 2026 को गुरु प्रदोष है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। नए साल के दिन रोहिणी नक्षत्र और रवि योग का संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा 1 जनवरी को धनु राशि में सूर्य, बुध, मंगल और वैभव के कारक शुक्र मौजूद रहेंगे। इन सभी शुभ संयोग की वजह से ही नया साल बेहद खास और मंगलकारी रहेगा।
नए साल के पहले दिन गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन और वस्त्र समेत अन्य जरूरी चीजों का दान करें। ऐसा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा आपके घर-परिवार पर सदैव बनी रहती है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करें। संभव हो तो मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करें। पूजापाठ के साथ दिन की शुरुआत करने से पूरे वर्ष जीवन खुशहाल रहता है। जनवरी साल का पहला महीना होता है। जनवरी से ही नए साल की शुरुआत होती है। इस माह में कई बड़े व्रत-त्यौहार आते हैं जिनका हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। जनवरी में मकर संक्रांति से लेकर लोहड़ी और बसंत पंचमी जैसे बड़े त्यौहार आते हैं। इसके अलावा जनवरी में ही मौनी अमावस्या भी मनाई जाएगी। जनवरी में ही माघ महीने का आरंभ भी होता है। हिंदू धर्म में माघ माह का विशेष महत्व होता है। माघ में स्नान-दान, पूजा-पाठ और उपवास करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है।
महीने में प्रमुख व्रत देखें तो- 1 जनवरी, गुरुवार प्रदोष व्रत, 3 जनवरी 2026, शनिवार पौष पूर्णिमा, 6 जनवरी 2026, मंगलवार, सकट चैथ, 14 जनवरी 2026, बुधवार, मकर संक्रांति, पोंगल, 14 जनवरी 2026, बुधवार षटतिला एकादशी , 16 जनवरी, शुक्रवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, 18 जनवरी 2026, रविवार, मौनी अमावस्या, 23 जनवरी 2026, शुक्रवार, बसंत पंचमी, 25 जनवरी 2026, रविवार, रथ सप्तमी, 26 जनवरी, 2026, सोमवार भीष्म अष्टमी, 29 जनवरी, 2026, रविवार, जया एकादशी और 30 जनवरी, शुक्रवार प्रदोष व्रत होगा। मौनी अमावस्या को माघ अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही इस दिन व्रत और दान-पुण्य करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति के सारे काम बिना बाधा के पूरे होते हैं। मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का भी विधान है। साल 2026 में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान किया जाएगा। आपको बता दें कि प्रयागराज में हर साल माघ मेले का आयोजन होता है। इस दौरान मौनी के दिन संगम में स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन माता सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी की आराधना करने से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। वहीं कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी माता सरस्वती के आशीर्वाद से अपार सफलता मिलती है। इस बार 23 जनवरी को बसंत पंचमी मनायी जाएगी।
(मोहिता स्वामी-हिफी फीचर)


