लेखक की कलम

बांग्लादेश में बर्बरता व दरिंदगी का सिलसिला

बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सोमवार 5 जनवरी को देर रात एक हिंदू दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो पिछले 24घंटों में इस तरह की दूसरी घटना है। इससे पहले राणा प्रताप बैरागी नाम के युवक को जान से मार डाला। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
आपको बता दें चैबीस घंटे में दो हिन्दुओं को कट्टरपंथी मजहबी हत्यारों ने मौत के घाट उतार दिया था। नरसिंग्दी जिले के पोलाश उपजिला के चोर्सिंदूर बाजार में किराना दुकान चलाने वाले हिंदू व्यापारी मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल मोनी की अस्पताल ले जाते समय ही मौत हो गई। परिवार का कहना है कि मोनी का किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था। वह शांत स्वभाव का था। उनकी पत्नी अंतरा मुखर्जी हाउसवाइफ हैं और उनका 12 वर्षीय बेटा अभिक चक्रवर्ती है। इसी दिन जेस्सोर जिले में एक अन्य हिंदू कारोबारी 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जो एक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक भी थे।
इन दिनों बांग्लादेश में कट्टरपंथी उन्मादी हिन्दुओं के खिलाफ खून-खराबा कर रहे हैं। बांग्लादेश में जून, 2024 में शेख हसीना की सरकार के विरुद्ध आरक्षण और नौकरियों आदि में भेदभाव जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के 3 महीनों बाद अंततः 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना को गद्दी छोड़नी पड़ी और तब से उन्होंने भारत में ही शरण ले रखी है।
शेख हसीना के भारत आने के बाद सेना ने जब मोहम्मद यूनुस को देश की सत्ता सौंप दी तो उम्मीद थी कि शायद वह उदारवादी रवैया अपना कर देश में व्याप्त असंतोष दूर करने और वातावरण सामान्य बनाने में सहायता करेंगे। आशा के विपरीत मो. यूनुस ने देश की पाठ्य पुस्तकों से बंगलादेश के मुक्ति संग्राम और बंग बंधु शेख मजीबुर्रहमान से संबंधित अध्याय निकाल देने का आदेश जारी करके देश के मुक्ति संग्राम का इतिहास मिटाने की कोशिशें शुरू कर दीं और सैकड़ों आतंकवादियों को जमानत देकर या उनके विरुद्ध आरोप वापस लेकर उन्हें जेलों से बाहर कर दिया है।
सेना और कट्टरपंथियों के दबाव में आकर यूनुस प्रशासन ने देश में 12 फरवरी, 2026 को चुनाव करवाने की घोषणा की है। इसके साथ ही यूनुस ने शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाकर उसे क्रियात्मक रूप से चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के अगले ही दिन कट्टरपंथी संगठन इन्कलाब मंच के प्रवक्ता और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी ने ढाका-8 सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी परंतु इसके अगले ही दिन सरेआम एक मोटरसाइकिल सवार ने उसकी हत्या कर दी।
दरअसल चुनावों के लिए तय तारीख की घोषणा के साथ ही बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए तथा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो दिसंबर, 2025 से पिछले लगभग 35 दिनों में बांग्लादेश में कम से कम एक दर्जन हिंदुओं की हत्या की गई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद द्वारा आज जारी एक बयान के अनुसार, अकेले दिसंबर में सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, 19 दिसंबर को शरत चक्रवर्ती ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश में हिंसा पर चिंता जताई थी, जिसमें उन्होंने अपनी जन्मभूमि को मौत की घाटी बताया था। एक चश्मदीद और रिश्तेदार प्रदीप चंद्र बर्मन ने इस हमले को सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा, पहले से दुश्मनी थी.. उन्होंने (हमलावरों ने) उनका मोबाइल फोन या मोटरसाइकिल नहीं छीनी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो दिसंबर, 2025 को 42 वर्षीय सोने के हिंदू व्यापारी प्रांतोष कर्मकार की रात के समय बांग्लादेश के नरसिंगदी जिले के रायपुरा उपजिला में गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो दिसंबर, 2025 को 35 वर्षीय हिंदू मछली व्यापारी उत्पल सरकार की सुबह के समय फरीदपुर जिले के साल्था उपजिला में बेरहमी से हत्या कर दी गई। सात दिसंबर, 2025 को 1971 के मुक्ति संग्राम के मुक्तिजोद्धा 75 वर्षीय जोगेश चंद्र राय और उनकी पत्नी सुबोर्ना राय की रंगपुर में गला रेतकर हत्या। 12 दिसंबर, 2025 को 18 वर्षीय हिंदू ऑटो रिक्शा ड्राइवर शांतो चंद्र दास कुमिला जिले में मृत पाए गए। उनका गला रेतकर शव मक्के के खेत में फेंक दिया गया था। 18 दिसंबर, 2025 को मैमनसिंह के भलुका में 27 वर्षीय हिंदू गारमेंट वर्कर दीपू चंद्र दास को इस्लामी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और 24 दिसंबर, 2025 को राजबाड़ी जिले के 30 वर्षीय हिंदू अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज थे।
29 दिसंबर, 2025 को बांग्लादेश के अर्धसैनिक सहायक बल अंसार वाहिनी के हिंदू सदस्य बजेंद्र बिस्वास को मैमनसिंह जिले में फैक्ट्री में साथी नोमान मियां ने गोली मारी। इसके बाद 3 जनवरी, 2026 को शरियतपुर जिले के हिंदू व्यवसायी खोकन चंद्र दास को घर लौटते समय हमलावरों ने रोककर चाकू मारा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। उसी दिन बंगलादेश के झिनाइदह में हिंदू विरोधी तत्वों ने एक विधवा हिंदू महिला से सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे पेड़ से बांध कर बुरी तरह पीटा और उसके बाल भी काट दिए।
5 जनवरी, 2026 का एक अखबार के 38 वर्षीय कार्यवाहक संपादक और बर्फ फैक्ट्री के मालिक राणा प्रताप बैरागी की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी और अब 5 जनवरी की रात सोमवार को देर रात एक हिंदू दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो पिछले 24घंटों में इस तरह की दूसरी घटना थी। कोई गारंटी नहीं है कि यह अमानवीयता, दरिंदगी और बर्बरता का सिलसिला यहीं थमेगा।
आपको बता दें कि ऐसी घटनाओं पर बंगलादेश की अंतरिम सरकार की चुप्पी उसकी नीयत में खोट का संकेत देती है जिस पर विश्व भर में चिंता व्यक्त की जा रही है। बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरवादी ताकतों तथा पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ने से वहां के लोगों में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ गई हैं और सुरक्षा मामलों में सहयोग भी प्रभावित हुआ है। इस समय राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा बांग्लादेश कट्टरपंथियों के दबाव में आकर आज आक्रामकता अराजकता और कानून व्यवस्था के सबसे बुरे दौर में पहुंच रहा है। जहां से लौटना और कानून व्यवस्था अराजकता पर नियंत्रण पाना अस्थिर सरकार के बूते से बाहर की बात होगी। आखिर भारत सरकार कब तक बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ की जा रही बर्बरता को नजरअंदाज कर सकती है? (मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)

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