महाराष्ट्र में सियासी खेला

खेला शब्द पश्चिम बंगाल मंे विशेष रूप से चर्चा में आया था लेकिन राजनीति को यह लुभाने लगा है। इसीलिए सियासी खेला पर लोगों की निगाह बड़ी तेजी से चली जाती हैं। इन दिनों महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव चर्चा में हैं, इसलिए वहां सियासी खेला बहुत हो रहा है। नगर निगम के कामकाज पर महायुति के नेता अजीत पवार ने टीका-टिप्पणी कर दी। इसको सीधे भाजपा से जोड़ दिया गया। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को लेकर मनमुटाव की बातें होती ही रहती हैं लेकिन अम्बरनाथ नगर परिषद चुनाव मंे भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया। अम्बरनाथ नगर परिषद मंे 60 सीटें है। शिवसेना यहां सत्ता मंे थी लेकिन भाजपा-कांगेस के कथित गठबंधन ने खेल बिगाड़ दिया है। शिंदे की शिवसेना को सिर्फ 27 सीटें मिल पायीं। भाजपा के पास 14, कांग्रेस 12 एनसीपी 4 और 23 सीटें निर्दलीयों के पास हैं। अम्बरनाथ नगर परिषद के खेल को लेकर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल- दोनों ने स्थानीय स्तर पर हुए गठबंधन को अनधिकृत बताया लेकिन खेला तो हो ही चुका है।
स्थानीय स्तर पर भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। बताया जा रहा शिंदे सेना को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है। भाजपा-कांग्रेस के इस गठबंधन से राजनीति गरमा गई है। इस गठबंधन को अम्बरनाथ विकास अघाड़ी नाम दिया गया है। इससे शिवसेना शिंदे समूह में भारी असंतोष है। शिवसेना शिंदे समूह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए इस गठबंधन को अभद्र युति (गठबंधन) बताया है। शिंदे समूह के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली भाजपा पर कांग्रेस के साथ गठबंधन करके शिवसेना पर हमला करने का आरोप लगाया है। अंबरनाथ शिंदे सेना का गढ़ माना जाता है, एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे यहां से सांसद है। हाल ही में अंबरनाथ नगरपरिषद के चुनाव हुए थे। इस नगर परिषद चुनाव में बीजेपी ने शिंदे सेना को मात दी। यहां बीजेपी का नगराध्यक्ष चुनकर आया। इस चुनाव में शिंदे सेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करने का फैसला लिया गया।
अंबरनाथ में हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर सांसद श्रीकांत शिंदे का बयान सामने आया है। अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस के गठबंधन पर श्रीकांत शिंदे ने कहा- यह सवाल पूरी तरह से हमारी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के लिए है। भाजपा नेता ही इसका जवाब अच्छे से दे पाएंगे। कई सालों से, भाजपा और शिवसेना केंद्र, राज्य और नगर निगम में गठबंधन में हैं। यह गठबंधन अटूट रहना चाहिए। अंबरनाथ में शिवसेना सत्ता में थी और शिवसेना ने अंबरनाथ में अच्छा विकास कार्य किया। अब, वे जो भी फैसला लेना चाहते हैं, शिवसेना विकास की राजनीति करने वाले के साथ होगी। भाजपा और कांग्रेस के इस गठबंधन को शिवसेना ने पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा
उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे समूह पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर वे पिछले पच्चीस वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त शिंदे समूह के साथ सत्ता में होते तो यह एक बेहद ही अनुचित गठबंधन न होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अम्बरनाथ नगर परिषद के लिए शिंदे समूह के साथ महागठबंधन पर कई बार चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन उनके नेताओं से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
एक ओर जहां भाजपा-कांग्रेस गठबंधन अम्बरनाथ नगर परिषद में सत्ता के बंटवारे को स्पष्ट कर रहा है, वहीं, दूसरी ओर इस गठबंधन ने महागठबंधन में तनाव पैदा कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन मंजूर नहीं है। अंबरनाथ में लोकल लेवल पर जो फैसला किया है उसे दुरुस्त किया जाएगा और कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होगा। इधर, महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस घटनाक्रम पर नेताओं को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा- अगर किसी भी
लोकल नेता भी बीजेपी के साथ कोई भी गठबन्धन किया तो कांग्रेस उस नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी..किसी भी कीमत पर कांग्रेस, बीजेपी के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी, चाहे वो कोई भी चुनाव हो।
एक अन्य खेला अजीत दादा ने किया। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिंपरी चिंचवड़ इलाके में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था जिसे लेकर अब वह पलट चुके हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीत पवार से इस सवाल के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा इस बारे में मैं आपसे कितनी बार कहूं, पत्रकार मित्रों। जब आप मेरी बात, दिखाते हैं, तो आपने ऐसा दिखाया जैसे मैंने पूरी बीजेपी के बारे में बोला है। मैं नगर निगम के कामकाज और वहां के जिम्मेदार लोगों के बारे में बात कर रहा था। मैं उनके भ्रष्ट कामकाज के बारे में बोल रहा था और अभी भी उन्हीं के बारे में बोलूंगा। अजीत पवार ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में स्थानीय नगर निगम पदाधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस आरोप को लेकर अजीत पवार से सवाल पूछा गया तब उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम ने जो बयान दिया था, मीडिया ने उसे बढ़ा-चढ़ाकर और अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा कि मीडिया की इस रिपोर्टिंग की वजह से ही अन्य नेताओं ने (जिनका नाम मीडिया ले रहा था) अपनी प्रतिक्रिया दी। इस मौके पर गठबंधन की राजनीति पवार ने याद दिलाई कि जब वे आघाडी (यूपीए और महा विकास अघाड़ी) में थे, तब भी केंद्र और राज्य स्तर पर साथ होने के बावजूद स्थानीय निकाय चुनावों (पुणे और पिंपरी-चिंचवड़) में वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते थे।
चुनावी माहौल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को धमकी मिलने के बाद उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की जिसे लेकर अजीत पवार से सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया
कि अगर चुनाव में खड़े होने के बाद किसी को जान का खतरा है, तो उन्हें सुरक्षा देना पुलिस का काम है। सवाल केवल दस दिनों का है। चाहे वह कोई भी उम्मीदवार हो, अगर वह पुलिस से मांग करता है, तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा देनी चाहिए। अजीत ने कहा मैंने पुलिस अधिकारियों से पूछा है। उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर हम उसकी जांच करेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो हम उन्हें सुरक्षा प्रदान करेंगे।
एक खेला बीजेपी के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने अब पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बारे में की गई अपनी विवादित टिप्पणियों पर सफाई दी है। यह सफाई विलासराव के बेटे और एक्टर रितेश देशमुख की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद आई है। बता दें कि चव्हाण ने लातूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पार्टी की जीत पर भरोसा जताते हुए यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि लातूर में पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश देखकर लगता है कि विलासराव देशमुख की यादें इस शहर से मिटा दी जाएंगी।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



