सम-सामयिक

तीरथ राज प्रयाग सुकरमा…

प्रयागराज की महिमा को कौन नहीं जानता। यहां पर माघ महीने में संतों और श्रद्धालुओं का अध्यात्मिक संगम भी होता है। पतित पावनी गंगा और यमुना के साथ पवित्र सरस्वती का संगम तो यह है ही। यहां पर ही भरद्वाज ऋषि को महर्षि याज्ञ वल्वक्य ने राम कथा सुनाई थी। इस बार 3 जनवरी से माघ मेला प्रारंभ हुआ है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने काफी पहले से इसकी तैयारियां कर ली थीं। यह मेला 15 फरवरी तक चलेगा। यहां श्रद्धालु महीने भर कल्पवास भी करते हैं। नित्य-प्रति आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि संगम के स्नान से मनचाही इच्छा पूर्ण हो जाती है और अनजाने में भी किये गये पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस बार माघ मेले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा और पैरा ग्लाइडिंग की शुरुआत की गई है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के अनुसार, मेले में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए प्रसिद्ध कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है।

माघ मेला 2026 में प्रयागराज आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने ‘मेला रेल सेवा’ नाम से डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर ट्रेनों की पूरी जानकारी, स्टेशन गाइड, यात्री सुविधाएं और मेडिकल और इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यह पोर्टल माघ मेला के दौरान यात्रियों के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन साबित होगा।
पौष पूर्णिमा से कल्पवासियों का व्रत शुरू हो चुका है। करीब 20 लाख कल्पवासी 3 जनवरी से 1 फरवरी तक संगम की रेती यानी प्रयागराज में कल्पवास करेंगे। वहीं पहले स्नान पर्व पर 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। लगभग 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना प्रदेश सरकार ने जताई है। संगम में स्नान के बाद 9 जनवरी को पंचकोशी परिक्रमा और प्रयागराज दर्शन यात्रा का समापन होगा।

कमिश्नर प्रयागराज सौम्या अग्रवाल, मेला अधिकारी ऋषिराज और मेला एसपी नीरज पांडेय व्यवस्था देख रहे हैं। कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा है कि पंचकोशी परिक्रमा को लेकर सभी तैयारियां पूरी हैं। वहीं माघ मेला एसपी नीरज पांडेय ने कहा है कि जिन थाना क्षेत्रों से होकर पंचकोशी परिक्रमा जाएगी। उन मार्गों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
प्राचीन हिंदू वेदों में कल्प को चार युगों – सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग – के कुल वर्षों के बराबर अवधि बताया गया है। यह अवधि कई करोड़ वर्षों की होती है। ऐसा कहा जाता है कि श्रद्धापूर्वक कल्पवास करने से भक्त अपने पिछले जन्म के पापों से मुक्ति पाता है और जन्म-कर्म के चक्र से बाहर आता है। माघ मेले के प्रत्येक दिन, कल्पवासी को सूर्योदय के समय गंगा में स्नान करना होता है और उगते सूरज को प्रणाम करना होता है। अधिकांश कल्पवासी दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं। 12 कल्पवास करने के बाद, कल्पवासी को अपना पलंग और अपनी सभी वस्तुएँ दान करनी होती हैं, इस अनुष्ठान को शय्या दान कहा जाता है।

प्रत्येक बारहवें वर्ष, माघ मेला कुंभ मेले में परिवर्तित हो जाता है। इस दौरान उत्तर प्रदेश में लाखों तीर्थयात्री इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए आते उत्तर भारत में प्रचलित पारंपरिक हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पवित्र मेला हर साल हिंदू महीने माघ में आयोजित किया जाता है (जो ग्रेगोरियन पंचांग के मध्य जनवरी से मध्य फरवरी के बीच पड़ता है) इसीलिए इसका नाम माघ मेला है। हालांकि, माघ मेला केवल माघ महीने तक ही सीमित नहीं है और इसके महत्वपूर्ण स्नान पर्व 45 दिनों तक चलते हैं। माघ मेला वास्तव में कुंभ मेले का एक छोटा रूप है, इसलिए इसे मिनी कुंभ मेला भी कहा जाता है।

पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम की रेती एक बार फिर श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। विश्व प्रसिद्ध माघ मेला 2026 का शुभारंभ प्रयागराज में हो चुका है। पहले ही स्नान पर्व पर 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। हर-हर गंगे और जय मां गंगा के उद्घोष, कड़ी सुरक्षा, आधुनिक सुविधाएं और दिव्य वातावरण ने साफ संकेत दे दिया है कि यह माघ मेला ऐतिहासिक बनने जा रहा है। इस ऐतिहासिक माघ मेले में श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाई। व्हीलचेयर पर संगम स्नान करते बुजुर्ग, घाटों पर पेट्रोलिंग करती सुरक्षा गाड़ियां और चारों ओर श्रद्धालुओं का सैलाब, पहले स्नान पर्व ने माघ मेले की भव्यता का साफ संकेत दे दिया। इस वर्ष माघ मेले में कुल छह महत्वपूर्ण स्नान पर्व होंगे। पहला 3 जनवरी, 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 18 जनवरी, 23 जनवरी, 1 फरवरी और 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) को स्नान पर्व हैं।

प्रशासन के अनुसार, हर स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं के लिए योगी सरकार ने माघ मेले में चिकित्सा की भी समुचित व्यवस्था की है। सरकार की ओर से माघ मेले में 20-20 बेड के दो बड़े अस्पताल बनाए गए हैं। 20 बेड का त्रिवेणी अस्पताल सेक्टर नंबर दो और 20 बेड का गंगा अस्पताल सेक्टर नंबर पांच में बनाया गया है। इसके अलावा 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बनाए गए हैं। पांच होम्योपैथी और पांच आयुर्वेदिक अस्पताल बनाए गए हैं।

इन अस्पतालों में 75 डॉक्टर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 219 पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है, जिसमें फार्मासिस्ट, ओटी टेक्नीशियन, नर्सेज और अन्य स्टाफ शामिल हैं।

मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है। करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेले में 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं। रात के समय संगम क्षेत्र बेहद आकर्षक नजर आ रहा है नावों पर एलईडी लाइट से सजी रंगीन छतरियां, जल में सात रंगों के फव्वारे और घाटों पर कलर-कोडेड चेंजिंग रूम अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं। रात में संगम क्षेत्र स्वर्ग समान नजर आ रहा है।
माघ मेले में इस बार श्रद्धालुओं के लिए 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें, 500़ ई-रिक्शा, हर सेक्टर में हेल्प डेस्क, 17 फायर स्टेशन और 3300 सफाईकर्मी तैनात किये गये हैं।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button