महाराष्ट्र में अब चाचा-भतीजे एक

विपदा में अलगाव दूर हो जाता है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। राजय की सबसे बड़ी और ताकतवर समझी जाने वाली शिवसेना से उद्धव ठाकरे के बड़े भाई राजठाकरे अलग हो गये थे। इसके बाद शिवसेना लगातार कमजोर होती गयी। नौबत यहां तक आ गयी कि 2020 में उद्धव ठाकरे को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की मदद से सरकार बनानी पड़ी। यह सरकार भी बमुश्किल दो साल चल पायी और एकनाथ शिंदे ने लगभग 2 दर्जन विधायकों को तोड़कर नयी पार्टी बनायी और भाजपा के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बन गये। इसी तरह एनसीपी में भी अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग हो गये थे। बिखराव के नतीजे विपदा ग्रस्त रहते हैं। महाराष्ट्र में वही हुआ। इससे सबक लेकर पहले राजठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ मंच पर आये और अब शरद पवार और अजित पवार एक होने जा रहे हैं। अजित पवार ने भाजपा की आलोचना की है। इस पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस कहते हैं अजित दादा का संयम टूट गया है। बहरहाल, इस राजनीतिक समीकरण का प्रभाव 15 जनवरी को बीएमसी और अन्य महानगर निगम के चुनाव में दिखाई पड़ेगा।
अजित पवार एक बार फिर अपने चाचा शरद पवार के साथ आने वाले हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने एक इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं और पवार परिवार में अब सभी तनाव दूर हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार ने पुणे में संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया है। संयुक्त घोषणापत्र जारी करते समय मंच पर अजित पवार, सुप्रिया सुले और लोकसभा सांसद अमोल कोल्हे मौजूद थे। इस संयुक्त घोषणापत्र के माध्यम से पुणे शहर के विकास की दिशा, नागरिकों से जुड़े अहम मुद्दे, बुनियादी ढांचे, सामाजिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ आगामी चुनावों को लेकर दोनों दलों का साझा रुख सामने रखा गया है। राजनीतिक दृष्टि से इस घोषणापत्र को काफी अहम माना जा रहा है। दोनों राष्ट्रवादी गुटों के एक मंच पर आने से महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गयी है। संयुक्त घोषणापत्र के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पुणे शहर से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्ष मिलकर अपनी भूमिका तय कर रहे हैं।
अजित पवार ने कहा, देखिए, दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं। दोनों एनसीपी अब एक हैं। हमारे परिवार में सभी तनाव समाप्त हो गए हैं। लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले, जो शरद पवार की बेटी और अजित पवार की चचेरी बहन हैं, उन्होंने भी बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग पर एनसीपी के दोनों गुट पिंपरी-चिंचवड चुनाव के लिए एक साथ आए हैं। बता दें कि दोनों गुटों ने पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव के लिए गठबंधन करने का फैसला किया है और हाल ही में संयुक्त घोषणा पत्र भी लॉन्च किया गया।
इस समीकरण पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अजित दादा सिर्फ बातें करते हैं, लेकिन मेरा काम खुद बोलता है। मैंने अब तक संयम बनाए रखा है, लेकिन उनका संयम टूट गया है। अजित दादा 15 तारीख के बाद नहीं बोलेंगे। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर मेरी वजह से कोई परिवार एक साथ आ रहा है, तो मुझे खुशी है। राज ठाकरे ने मुझे क्रेडिट दिया, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं, मुझे उनका आशीर्वाद मिलेगा। अगर भाई-बहन एक साथ आते हैं, तो क्या वे मुझे धन्यवाद देंगे? य ह हमें 15 तारीख के बाद पता चलेगा। इसी के साथ सीएम फडणवीस ने कहा कि हम पुणे की महिलाओं को मुफ्त फ्लाइट देंगे ऐसे ऐलान करने में क्या लगता है? अगर वे जीतने वाले नहीं हैं, तो वे किसी भी तरह का घोषणापत्र बनाते हैं। कम से कम कुछ ऐसा कहें जो भरोसेमंद लगे। पुणे के लोग भरोसेमंद और विश्वसनीय सेवाएं चाहते हैं। पुणे के लोग जानते हैं कि पीएमपीएमएल मुफ्त नहीं होगा क्योंकि उन्हें पता है कि वे जीतने वाले नहीं हैं। फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए पेड़ काटने पर आपत्ति जताई थी। मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की, हम सुप्रीम कोर्ट गए, फिर सरकार बदल गई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने स्टे ऑर्डर दे दिया। फिर से सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया और स्टे हटा दिया। उस एक कार शेड की वजह से मुंबई मेट्रो की लागत 10,000 करोड़ रुपये बढ़ गई।
फडणवीस ने कहा कि यहां हमारे लिए सब कुछ ठीक चल रहा है, अन्ना यहां हैं, चंद्रकांत दादा यहां हैं। मैं पुणे के लिए अपना प्यार बनाए रखना चाहता हूं। लेकिन मैं नागपुर से चुनाव लड़ना चाहता हूं। कुछ पुलों का निर्माण बिना सोचे-समझे किया गया था। पुणे के कुछ हिस्सों में एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का फैसला किया गया है। नीचे सड़क होगी, उसके ऊपर कॉरिडोर होगा और उसके ऊपर मेट्रो चलेगी।
शरद पवार द्वारा बनाई गई एनसीपी दो साल पहले उनके भतीजे अजित पवार के विद्रोह के बाद बंट गई थी। अजित पवार अपने गुट के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए और उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाला। अजित पवार ने एनसीपी के पार्टी नाम और घड़ी चिन्ह पर अपना दावा जताया, जबकि शरद पवार के गुट को नया नाम, एनसीपी (शरदचंद्र पवार), और नया चिन्ह, तुरही मिला। अजित पवार ने अपने बेटे पार्थ पवार से जुड़े एक जमीन सौदे के विवाद जैसे अन्य मामलों पर कहा, उन्होंने एक रुपया भी नहीं दिया। हमने भी कोई जमीन नहीं खरीदी।
इसी प्रकार उद्धव ठाकरे के बीच सुलह के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री ने किसी भी राजनीतिक खतरे की चिंता नहीं जताई। उन्होंने राज ठाकरे के मुद्दे को आगामी मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए बेअसर बताया। उन्होंने कहा कि अब ये मुद्दे कोई मायने नहीं रखते हैं। अजित पवार ने कहा, राज ठाकरे का भाषण नकल लगता है। इससे कुछ समय के लिए मनोरंजन तो मिलता है, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं होगा। राज और उद्धव दोनों ही सफल नहीं होंगे। फडणवीस ने कहा कि एक रिपोर्ट से पता चला कि पुणे का ट्रैफिक 32 सड़कों पर चलता है। इन सड़कों पर ट्रैफिक की मात्रा उनकी क्षमता से डेढ़ से ढाई गुना ज्यादा है। पुणे की 32 सड़कों को जाम-मुक्त किया जाएगा। इसमें अतिक्रमण हटाना, सिग्नल सिस्टम को बेहतर बनाना और सड़कों पर अन्य रुकावटों को हटाना शामिल होगा। पुणे में 23 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे, जिनमें से 8 पर काम पहले ही शुरू हो चुका है। पुणे में 56 सुरंगें बनाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट पर 32,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और डिजाइन पहले ही तैयार हो चुके हैं। रिंग रोड पूरा होने के बाद पुणे का 40 प्रतिशत ट्रैफिक जाम कम हो जाएगा। इसी तरह पुणे की पानी की समस्या भी जल्द ही हल हो जाएगी। अभी पुणे में पानी की कमी नहीं है, लेकिन भविष्य में पुणे के लिए पानी के नए स्रोत विकसित करने होंगे।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



