ओवैसी की शरारत या सियासत

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 10 जनवरी को सोलापुर में एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भी बनेगी भारत की प्रधानमंत्री। इतना ही नहीं उन्होंने भारत-पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था की भी तुलना की। ओवैसी ने कहा संविधान में सभी नागरिकों की समानता पर जोर दिया गया है। महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव के लिए प्रचार के दौरान ओवैसी ने यह बयान दिया। उनके इस एक बयान ने सियासत में भूचाल मचा दिया है। चर्चां इस बात की है कि ओवैसी का यह बयान साम्प्रदायिक शरारत है अथवा विशुद्ध सियासत। महाराष्ट्र के निगम चुनाव प्रचार में एक के बाद एक विवादित मुद्दे सामने आ रहे हैं। पहले मराठी-हिंदू का मुद्दा उठा। उसके बाद मुस्लिम मेयर और हिंदू मेयर का मुद्दा। फिर 20 बच्चे पैदा करने का मुद्दा आने के बाद अब हिजाब वाली महिला प्रधानमंत्री बन सकती है वाला बयान एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने दिया है। सोलापुर में प्रचार के दौरान ओवैसी ने कहा- एक दिन ऐसा आएगा कि हिजाब पहने हुए हमारी महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के संविधान का जिक्र भी किया।
एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, पाकिस्तान के संविधान में एक ही समाज का व्यक्ति राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है मगर, भारत के संविधान में सभी समाज के लोगों को समान अधिकार है। पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि पाकिस्तान का प्रधानमंत्री एक ही धर्म का बनेगा। मगर, बाबा साहब आंबेडकर का संविधान कहता है कि कोई भी भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब भारत का प्रधानमंत्री हिजाब पहने महिला बनेगी। एक दिन ऐसा आएगा हम नहीं रहेंगे आप नहीं रहोगे, हो सकता है कि कब्र में हमारी हड्डियां भी गल जाएं। मगर एक दिन ऐसा आएगा कि हिजाब पहनने वाली हमारी महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी। अरे नफरत करने वालो तुम कितनी नफरत करोगे।ओवैसी ने कहा, इनसे पूछो तेल के दाम सोलापुर में 105 रुपये है तो कहते है वो देखो बांग्लादेशी। इनसे कहो काम नहीं हो रहा तो कहते हैं कि देखो वहां बांग्लादेशी। अरे क्या आपके अब्बा बताने आए थे कि वो बांग्लादेशी हैं। ओवैसी के इस बयान का कैबिनेट मंत्री नितेश राणे और बीजेपी नेता अमित साटम ने विरोध किया है। एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी पर हमलावर बीजेपी नेताओं (नितेश राणे और अमित साटम) ने कहा, 2047 में हम चाहते हैं कि देश हिंदू राष्ट्र हो लेकिन ओवैसी जैसे लोग क्या चाहते हैं, ये सुन लो। ये हिजाब वाली महिला को पीएम बनाना चाहते हैं और देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
बीएमसी चुनाव में बीजेपी का एक भी प्रत्याशी मुस्लिम समाज से नहीं हैं, हालांकि पार्टी ने एक जगह से उम्मीदवार उतारा था। मुंबई में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 25.6 प्रतिशत जबकि उपनगरों में 19.19 प्रतिशत है। साल 2017 के चुनाव में सभी दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 360 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे। जबकि इस बार 334 प्रत्याशी मैदान में हैं। सभी की नजर देश के सबसे अमीर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव पर ही टिकी है। इस बार बीएमसी चुनाव में धार्मिक माहौल ज्यादा दिखाई दे रहा है, बावजूद इसके मुस्लिम उम्मीदवारों का औसत प्रतिनिधित्व लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है। इस बार मुंबई में अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 334 मुस्लिम उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।बीएमसी चुनाव में सबसे अधिक मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम सबसे आगे रही। इसी तरह समाजवादी पार्टी और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भी जमकर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट बांटे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया है जबकि शिवसेना के दोनों घटकों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। इस बार कुल 1700 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, और इनमें से 334 उम्मीदवार (करीब 19 प्रतिशत) मुस्लिम समुदाय से आते हैं।हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि मुस्लिम बहुल कई वार्डों में इस बार महिला आरक्षण लागू होने की वजह से पुरुष उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है। मुंबई में कुल 45 वार्ड मुस्लिम बहुल हैं, जिनमें से 30 वार्डों में मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं।
बीएमसी चुनाव में ओवैसी ने सबसे अधिक टिकट मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। उन्होंने 32 प्रत्याशी मैदान में उतारे जिसमें 25 मुस्लिम प्रत्याशी है। इस तरह से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले 78 फीसद प्रत्याशी मुस्लिम समाज से आते हैं। इसके बाद समाजवादी पार्टी का नंबर आता है। पार्टी के 70 उम्मीदवारों में से 50 प्रत्याशी मुस्लिम हैं और यह कुल संख्या का 71फीसद बैठता है।
इसके बाद नंबर आता है अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस का। इसके 94 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं जिसमें 24 फीसद यानी 23 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने भी 21 फीसदी टिकट मुस्लिम प्रत्याशियों को दिए हैं। पार्टी 150 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और इसमें से 33 मुस्लिम प्रत्याशी हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने बीएमसी चुनाव में 137 प्रत्याशी उतारे, लेकिन एक भी मुस्लिम प्रत्याशी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में नहीं है जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना ने अपने 91 प्रत्याशियों में से 10 फीसदी यानी 10 मुस्लिम समाज के लोगों को टिकट दिया, जबकि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले शिवसेना ने 163 उम्मीदवार उतारे और इसमें से 8 प्रत्याशी मुस्लिम हैं। इस तरह से पार्टी ने 5 फीसद टिकट मुसलमानों को दिया। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी बीएमसी चुनाव में 53 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सिर्फ 2 मुस्लिम प्रत्याशियों (4 फीसद) को ही टिकट दिया है। राजनीतिक दलों के अलावा 334 में से 91 मुस्लिम प्रत्याशी बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इस तरह 45 उम्मीदवार पंजीकृत छोटे दलों से जबकि 198 राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय दलों से मैदान में हैं। ओवैसी के इस बयान पर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया गया। हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गया। भाजपा से जुड़े अन्य नेताओं ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना की है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर) (हिफी)


