
इस साल जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां पक्ष-विपक्ष में भिड़ंत कुछ अलग तरीके से दिख रही है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों से ज्यादा उन मुद्दों को उठा रहा है जिससे वोट की राजनीति मजबूत होती हो और विपक्ष भी तिकड़म वाले मामले उठाने का प्रयास करता है। पश्चिम बंगाल और असम में यह बात साफ तौर पर देखी जा सकती है। कोलकाता में एक फर्म (आई-पैक) के कार्यालय और उसके निदेशक के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से मारा गया छापा बताया। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने मुख्य विपक्षी दल भाजपा को सीधे-सीधे चुनौती दी कि वह तृणमूल को लोकतांत्रिक मंच पर पराजित करके दिखाये।अब मणिपुर अजय भल्ला के हवाले
इसी प्रकार असम में भी मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को मुख्य विपक्षी कांग्रेस के नेता और राज्य इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सत्ता से हटाने की मुहिम चला रखी है। गोगोई ने विपक्षी दलों को एक साथ जोड़ रखा है। उधर, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गोगोई की पत्नी और बच्ची की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर मुहिम खोल रखी है। विश्व शर्मा कहते हैं कि गोगोई की पत्नी पाकिस्तान की खुफिया एजंेसी आईएसआई की एजेंट है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई के पाकिस्तानी संबंधों का विवरण इसी महीने के भीतर सामने आ जाएगा। सीएम हेमंत शर्मा ने विपक्षी नेता की पत्नी और बच्चों की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर भी उनकी कड़ी आलोचना की है। सीएम हेमंत शर्मा ने दावा किया कि असम के लोग ऐसे व्यक्ति को कभी भी अपने बोर घोर (पवित्र स्थान) में प्रवेश नहीं करने देंगे। सीएम शर्मा और भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई पर यह आरोप लगाते हुए लगातार निशाना साध रहे हैं कि उनकी पत्नी के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संबंध हैं।
बता दें कि गौरव गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं। गौरव गोगोई राज्य में कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं। वे कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता विपक्ष हैं।सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को लगाई कड़ी फटकार
गोगोई असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। जनवरी 2026 में वे असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय हैं, जहां वे विपक्षी एकता को मजबूत करने और बीजेपी सरकार पर हमला बोल रहे हैं।बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले असम की सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है। यहां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्षी दल गोलबंद हो रहे हैं। सभी दल बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इसका ऐलान राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने किया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए विपक्षी दल 2026 असम विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ेंगे। गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने (विपक्षी दलों ने) विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की। असम के लोगों को भाजपा के अत्याचार और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के अन्याय से मुक्त कराने के लिए हम सभी एकजुट हैं। हम 2026 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अन्य मुद्दे भी हैं, जिनके बारे में आने वाले दिनों में धीरे-धीरे जनता को जानकारी दी जाएगी। आठ पार्टियों में कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा), रायजोर दल, असम जातीय परिषद, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी- लेनिनवादी) लिबरेशन, जातीय दल-असोम (जेडीए) और कार्बी आंगलोंग स्थित ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (एपीएचएलसी) शामिल है। बैठक को लेकर रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने बताया कि आने वाले समय में सभी विपक्षी दल सभी प्रमुख मुद्दों पर समन्वित दृष्टिकोण अपनाएंगे। विपक्षी दलों के साझा घोषणापत्र पर विचार-विमर्श होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इस विपक्षी एकता में एआईयूडीएफ बिल्कुल भी शामिल नहीं होगी। यह भाजपा की तरह ही सांप्रदायिक पार्टी है। यह विपक्षी गठबंधन किसी भी प्रकार की सांप्रदायिकता के सख्त खिलाफ है।
अगले साल 2026 में असम में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राज्य में पिछले 10 वर्षों से बीजेपी की अगुवाई में एनडीए की सरकार है। राज्य में विधानसभा की कुल 126 सीटें है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को कुल 74 सीटें मिली थीं। बीजेपी ने 60 सीटों पर जीत हासिल की थी और 33.2 फीसद वोट मिले थे। वहीं असम गण परिषद को 9 सीटें हासिल हुई थीं जबकि यूपीपीएल को 6 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं यूपीए को कुल 50 सीटों मिली जिनमें कांग्रेस ने 29 सीटें हासिल कीं। एआईयूडीएफ को 16 सीटें मिलीं।
लोकसभा में मानसून सत्र के छठे दिन ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा हुई थी। चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। वहीं, विपक्ष की तरफ से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सबसे पहले अपनी बात रखी। गौरव गोगोई ने कहा कि पहलगाम हमले को 100 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक आतंकी पकड़े नहीं गए हैं।
सरकार के पास सभी तरह की सुविधाएं हैं, लेकिन अब तक आतंकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।गौरव गोगोई ने कहा, आखिरकार पहलगाम हमले की जिम्मेदारी कौन लेता है? जम्मू-कश्मीर के एलजी। अगर किसी को जिम्मेदारी लेने की जरूरत है, तो वह केंद्रीय गृह मंत्री हैं। गृह मंत्री और केंद्र सरकार एलजी के पीछे नहीं छिप सकते। सरकार इतनी कमजोर और कायर है कि उसने कहा कि टूर ऑपरेटर लोगों को सरकारी अनुमति या लाइसेंस के बिना बैसारन ले गए। वह हादसे के लिए जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी सऊदी अरब से वापस आ गए, लेकिन उन्होंने पहलगाम का दौरा नहीं किया। उन्होंने एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लिया और बिहार में एक राजनीतिक रैली को संबोधित किया। अगर कोई पहलगाम गया, तो वह हमारे नेता राहुल गांधी थे। इस प्रकार गोगोई ने भाजपा सरकार को घेरा था।
कांग्रेस सांसद ने कहा बैसरन, जहां हमला हुआ था, वहां एम्बुलेंस को पहुंचने में लगभग 1 घंटा लगा। सेना पैदल आई थी। मैं वो दृश्य नहीं भूल सकता, जब एक मां और उसकी बेटी ने एक भारतीय सैनिक को देखा तो वे रोने लगीं। उन्हें लगा कि बैसरन में लोगों को मारने वाला सैनिक की वर्दी पहने आतंकवादी उनका इंतजार कर रहा है। उस सैनिक को कहना पड़ा कि वह एक भारतीय है, और आप सुरक्षित हैं। वहां के लोगों में इस तरह का आतंक था।
इतना ही नहीं असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ मोर्चे को केवल सत्ता, धन, भूमि और सिंडिकेट की परवाह है, जिसकी वजह से गुवाहाटी में विनाशकारी बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। गोगोई ने इस स्थिति के लिए मुख्य कारण सत्तारूढ़ पार्टी के करीबी मंत्रियों और लोगों द्वारा आर्द्रभूमि पर किए गए अतिक्रमण को बताया।लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने शिवसागर से नागांव तक 250 किलोमीटर लंबी यात्रा भी की। यात्रा के दौरान हजारों समर्थकों के साथ उनका काफिला शाम को जोरहाट और गोलाघाट से गुजरा। शिवसागर शहर में ऐतिहासिक शिव दौल (मंदिर) के दर्शन करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए गोगोई ने कहा, यह सरकार सत्ता, धन, भूमि हड़पने और सिंडिकेट में गहराई तक लिप्त है। गौरव गोगोई ने कहा, गुवाहाटी में बीजेपी की नीति धन और जमीन के लालच पर आधारित है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के लंबे समय तक गुवाहाटी के विकास मंत्री रहे। अब उनके करीबी सहयोगी मंत्री हैं, लेकिन बीजेपी के मंत्रियों को जल निकायों के संरक्षण और जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने से ज्यादा अपने घर तक जाने वाली सड़क की चिंता है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर) (हिफी)


