रश्मिका की फिल्म राणा बाली ब्रिटिशकाल को दर्शाएगी

रश्मिका और विजय देवरकोंडा की आने वाली फिल्म ‘राणा बाली’ का नाम, इसका पीरियड सेटअप और ब्रिटिश राज से जुड़ा बैकड्रॉप दर्शकों की उत्सुकता को लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में ‘राणा बाली’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि यह सिर्फ एक एक्शन-ड्रामा नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों से जुड़ी एक गहरी कहानी भी हो सकती है। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का फिल्म के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ‘राणा बाली‘ 19वीं सदी के ब्रिटिश शासन के दौर पर आधारित है। उस समय भारत में न सिर्फ आजादी की लड़ाई चल रही थी, बल्कि कई ऐसे स्थानीय विद्रोह भी हुए थे, जिन्हें इतिहास की मुख्यधारा में ज्यादा जगह नहीं मिल पाई। फिल्म इसी पृष्ठभूमि को छूती नजर आती है, जहां एक आम इंसान अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के खिलाफ खड़ा होता है और धीरे-धीरे विद्रोह की चिंगारी बन जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘राणा बाली’ की कहानी आंध्र प्रदेश के दक्षिणी हिस्से, रायलसीमा के इतिहास से इंस्पायर है। ये पीरियड ड्रामा विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद रायलसीमा की दशा-दुर्दशा को दिखाता है। साम्राज्य के टूटने के बाद इस क्षेत्र में लगातार अनाज की कमी, गरीबी, अचानक मौतें और किसान आत्महत्याएं जैसी समस्याएं देखने को मिलीं। रायलसीमा में स्थानीय नेताओं के लगातार झगड़े, राजनीतिक संघर्ष, घोर गरीबी और अपराधों की वजह से रायलसीमा को एक ‘श्रापित भूमि’ के रूप में जाना जाने लगा। असल में, 20वीं सदी में कई राजनेताओं ने इन संघर्षों का फायदा उठाकर वोट बैंक तैयार किया और सत्ता हासिल की। इन झगड़ों की जड़ अक्सर जाति, वर्ग और लिंग के मुद्दे रहे हैं और साल में 4000 से ज्यादा लोगों की मौत इसी वजह से हुई। बाद में इस क्षेत्र में तरक्की के लिए एक समझौता किया गया, लेकिन इस वादे को पूरा नहीं किया गया और इससे ब्रिटिश राज के दौरान क्षेत्र में और झगड़े पैदा होने लगे। जमींदार का दबदबा बढ़ा, जिन्होंने जमीनें, संसाधन और लोगों पर सारा कंट्रोल कर लिया।
विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की पीरियड ड्रामा फिल्म ‘राणा बाली’, 11 सितंबर 2026 को थिएटर्स में रिलीज होने जा रही है। (हिफी)



