लेखक की कलम

खेमचन्द को मणिपुर की कमान

जातीय संघर्ष में उलझे उत्तर-पूर्व भारत के संवेदनशील राज्य मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। पहले कहा जा रहा था कि 12 फरवरी को वहां जनता के चुने प्रतिनिधियों को सत्ता सौंप दी जाएगी। केन्द्र सरकार ने इस मामले मंे सभी को चैंकाते हुए युमनाम खेमचंद को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने की घोषणा कर दी। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से राजनीति की शुरुआत करने वाले खेमचन्द ने भाजपा मंे शामिल होकर राजनीति की दिशा बदल दी और भाजपा को मणिपुर में सत्ता दिलाने में मदद की। वह 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के चुनाव चिह्न पर विधानसभा पहुंचे थे। मणिपुर विधानसभा के 2017 मंे स्पीकर भी रह चुके हैं। उनकी संगठन में मजबूत पकड़ है और आरएसएस के भी करीबी रहे हैं। उन्हें गत 3 फरवरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था।
मणिपुर में आगामी 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला था। इससे पहले ही एनडीए में सरकार बनाने को लेकर कवायद तेज हो गई थी। इस बीच भाजपा विधायक दल की बैठक में 3 फरवरी को युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया। इसी के साथ युमनाम खेमचंद के मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। केंद्र सरकार ने 4 फरवरी को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया, जिससे युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन की संवैधानिक खानापूरी भी हो गयी। खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उन्होंने राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात कर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं, द्रौपदी मुर्मू, भारत की राष्ट्रपति, मणिपुर राज्य के संबंध में उक्त अनुच्छेद के तहत 13 फरवरी, 2025 को मेरे द्वारा जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी, 2026 से निरस्त करती हूं। पिछले साल 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया था। उस समय राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और संवैधानिक संकट से गुजर रहा था, जिसके चलते केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था।
युमनाम खेमचंद मणिपुर भाजपा के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। 62 वर्षीय युमनाम मौजूदा समय में मणिपुर की राजधानी इंफाल की सिंगजामेई सीट से विधायक हैं। खेमचंद 2012 से ही इस सीट से जीतते आ रहे हैं। हालांकि, उनकी शुरुआत तृणमूल कांग्रेस से हुई। 2012 में वे इसी पार्टी के टिकट पर पहली बार चुनाव जीते थे। बाद में युमनाम भाजपा में शामिल हो गए और 2017 और 2022 में लगातार इसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2017 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें मणिपुर विधानसभा का स्पीकर भी नियुक्त किया और वे राज्य में भाजपा की सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले नेता बने।युमनाम बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी बने। बताया जाता है कि 2022 के विधानसभा चुनाव, जिसमें भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं, उसके नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में होड़ मच गई थी। दरअसल, एन बीरेन सिंह को तब भाजपा के दूसरे नेता थोंगम बिस्वजीत सिंह से चुनौती मिली थी। इस दौरान खबरें आई थीं कि भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को भी दिल्ली बुलाया है और मुख्यमंत्री के तौर पर उनके नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि, बाद में एन. बीरेन सिंह ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और सीएम पद अपने पास रखने में कामयाब हुए। बीरेन सिंह सरकार में खेमचंद को शिक्षा, आवास विकास, निकाय प्रशासन समेत कई मंत्रालय सौंपे गए।
युमनाम खेमचंद सिंह एक 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट ताइक्वांडो मास्टर हैं और उन्हें भारत में इस मार्शल आर्ट को लोकप्रिय बनाने वाले प्रमुख लोगों से एक माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 1978 में 16 वर्ष की आयु में ताइक्वांडो सीखना शुरू किया था। वह 1990 में ताइक्वांडो की बारीकियां सीखने के लिए सियोल, दक्षिण कोरिया गए, जिसे वह इस खेल का श्पावन स्थानश् मानते हैं। उन्होंने सियोल की वर्ल्ड ताइक्वांडो एकेडमी, कुक्कीवोन से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्हें ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन की ओर से पारंपरिक ताइक्वांडो शैली में 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया है। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने 1982 में ऑल-असम ताइक्वांडो एसोसिएशन की स्थापना की और इसके संस्थापक अध्यक्ष रहे। वह भारत में ताइक्वांडो को लोकप्रिय बनाने और ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के गठन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं, जहां उन्होंने उपाध्यक्ष के तौर पर कार्य किया। उन्हें मणिपुर में इस मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने वाले शुरुआती लोगों में गिना जाता है। बताया जाता है कि 1980 के दशक में उन्होंने खुद ताइक्वांडो में ट्रेनिंग हासिल करने के बाद असम पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण दिया था।
मणिपुर हिंसा के दौरान और उसके बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने राहत कार्यों, शांति प्रयासों और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर खेमचंद ने केंद्र सरकार से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों के लिए 7,000 घर बनाने का एक विशेष पैकेज हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने राजधानी इंफाल के एक कॉलेज में सात महीनों से अधिक समय तक मैतेई समुदाय के विस्थापितों के लिए एक राहत शिविर का भी संचालन किया। खेमचंद को मैतेई-कुकी के बीच टकराव से फैली हिंसा से प्रभावित सेरौ और सुगनु जैसे क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित रूप से उनके गांवों में वापस लौटने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है।मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के दो साल बाद जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा तो वे पहले ऐसे प्रमुख मैतेई विधायक रहे जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों (उखरुल और कामजोंग) में स्थित कुकी राहत शिविरों का दौरा किया। उन्होंने इसे शांति की ओर एक छोटा लेकिन अहम कदम
बताया। इस दौरान उन्होंने मैतेई समुदाय से आग्रह किया कि वे वर्तमान संकट को सुलझाने के लिए बड़े भाई की भूमिका निभाएं और कुकी समुदाय के साथ विश्वास की कमी को दूर करें। इस प्रकार खेमचंद मणिपुर को जातीय संघर्ष से बचाने की क्षमता रखते हैं। (अशाक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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