मीना कुमारी को लेकर धर्मेन्द्र से जलते थे कमाल अमरोही

फिल्ममेकर कमाल अमरोही और बेमिसाल अदाकारा मीना कुमारी के इश्क और रुसवाइयों की दास्तान से दुनिया वाकिफ है। इसी कहानी में धर्मेंद्र भी शामिल हैं। धर्मेंद्र, जो कि फिल्मी पर्दे पर अपने फैन्स के लिए ही-मैन कहे जाते थे, तो पर्दे के पीछे मीना कुमारी के आशिक और शायराना मिजाज के कलाकार बताए जाते रहे। एक ही शख्सियत के भीतर ताकत और तरन्नुम का ऐसी तरलता बहुत कम ही बार देखने और पढ़ने को मिली। जिस कहानी में कमाल अमरोही की प्रेजेंस मोहब्बत और नफरत की दो नावों पर सवार एक लाचार शख्स की लगती है। पूरी कहानी जानेंगे लेकिन उससे पहले कमाल अमरोही की शख्सियत की कुछ बेमिसाल बातें जो उन्हें एक कमाल के फिल्मकार भी साबित करती हैं। कमाल अमरोही को उनकी चार फिल्मों के लिए याद किया जाता है। ये चारों क्लासिक और कल्ट मूवी का दर्जा रखती हैं। सन् 1949 की महल- अशोक कुमार और मधुबाला की यादगार फिल्म। महल आज भी क्लासिक थ्रिलर में खास स्थान रखती है। देश आजाद हुए महज दो साल ही हुए थे। आजादी की नई-नई फिजां में लता मंगेशकर की बहुत ही पतली आवाज में गाना गूंजा- आएगा, आएगा, आएगा आने वाला, आएगा आएगा गाने पर मधुबाला के पिक्चराइजेशन में जितना रहस्यबोध था, उतना ही सौंदर्यबोध भी। जाहिर है इसके पीछे गीतकार नक्शब जर्चावी, लता मंगेशकर, संगीतकार खेमचंद्र प्रकाश तो थे ही, साथ ही थे- पहली बार निर्देशन कर रहे कमाल अमरोही। कोई हैरत नहीं कि इस फिल्म और इस गाने ने उन्हें मकबूल बना दिया।
गौरतलब है कि कमाल अमरोही ने मीना कुमारी से सन् 1952 में तीसरी शादी की थी। पहली पत्नी बिल्कीस बानो और दूसरी पत्नी मेहमूदी थीं। आपको बताएं कि कमाल ने मीना से मोहब्बत करके शादी की थी। उम्र में दोनों के बीच काफी फासला था। कमाल के तीन बच्चे पहले से ही थे। मीना कुमारी भी कमाल अमरोही से बहुत मोहब्बत करती थीं और पिता से विद्रोह करके यह निकाह किया था। तब वह महज अठारह साल की थीं और कमाल करीब चैंतीस साल के लेकिन मीना का वहम तब चकनाचूर होने लगा जब कुछ ही सालों के बाद कमाल के व्यवहार रुखे और खुरदरे होने लगे और उसके पिता की तरह ही दकियानूस भी। तकरीबन दसेक सालों के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। क्योंकि कमाल को मीना कुमारी की न तो गुलजार से नजदीकी पसंद थी और न ही धर्मेंद्र से। (हिफी)



