लेखक की कलम

खरगे की खीझ से उपजा विवाद

कांग्रेस ने अपनी राष्ट्रीय बागडोर मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप रखी है। उनके बेटे प्रियांक खरगे कर्नाटक के आईटी विभाग में मंत्री हैं। उनके अपने राज्य में ही कांग्रेस अनुशासनहीनता की सारी हदें पार कर गयी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की लड़ाई सड़क तक आ जाती है। इसलिए प्रियांक खरगे को अनुशासनबद्ध संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से ईष्र्या हो रही होगी। उन्हांेनंे आरएसएस की तुलना शैतान से की है। यह खीझ की शब्दावली है। प्रियांक के इस प्रकार के आरोप उनके अपने बुद्धि के स्तर को प्रदर्शित करते हैं। वह भाजपा को आरएसएस की परछाईं बताते हैं इसके साथ ही कहते हैं कि हमंे सीधे-सीधे शैतान से लड़ना चाहिए, उसकी परछाई से नहीं। उन्हांेने आरएसएस पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया लेकिन कोई ठोस तर्क नहीं दिया है। सच्चाई यही है कि आरएसएस पर ऐसा संगठन है जिसको पाकर कोई भी राजनीतिक दल बुलंदियों पर पहुंच सकता है। प्रियांक खरगे की पार्टी के पास ऐसा कोई संगठन क्यों नहीं है? इस पर उन्हंे चिंतन करना चाहिए। इसके साथ ही आरएसएस से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। गत 7 फरवरी को मुंबई मंे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नये क्षितिज कार्यक्रम मंे संघ के बारे में बताया था। प्रियांक खरगे मानते हैं कि भाजपा को सोच की ताकत संघ से मिलती है। आज देश भर मंे भाजपा का भगवा लहरा रहा है तो कांग्रेस भी आपनी सोच की ताकत को क्यों नहीं बढ़ा पाती है। उसके पास तो राजनीति मंे सब कुछ था लेकिन छिन गया है। अब खीझ मंे विवादास्पद बयानबाजी उचित नहीं है।
कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने एक बार फिर आरएसएस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरएसएस की तुलना शैतान से की और बेजपी को शैतान की परछाई बताया है। गत 15 फरवरी एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)की तुलना “शैतान” से की और भाजपा को इसकी “परछाई” बताया। साथ ही, उन्होंने संगठन पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों का आरोप लगाया और इसके लीगल स्टेटस पर सवाल भी उठाए। खरगे ने कहा कि भाजपा अपनी सोच की ताकत आरएसएस से लेती है और इसीलिए राजनीतिक विरोधियों को भाजपा की बजाय सीधे आरएसएस से लड़ना चाहिए। प्रियांक ने कहा कि, “अगर आरएसएस नहीं होता, तो भाजपा, जेडीएस से भी बदतर होती। मैं यह लिखकर दे सकता हूं। यह रीजनल पार्टियों से भी बदतर होती।” “आज हम जो कर रहे हैं, वह शैतान के साये से लड़ रहे हैं। शैतान का साया कौन है? वो भाजपा है। शैतान कौन है? वो आरएसएस है, अगर हम साये से लड़ना बंद करके शैतान से लड़ें, तो हमारा देश अपने आप बेहतर हो जाएगा।” खड़गे ने आरएसएस पर “मनी लॉन्ड्रिंग” में शामिल होने का भी आरोप लगाया और उसके फंड के सोर्स पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि संगठन के पास 2,500 से ज्यादा जुड़े हुए संगठनों का नेटवर्क है, जिनमें से कुछ अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में हैं। उन्होंने मांग की कि दूसरे संगठनों और नागरिकों पर लागू होने वाले कानूनी और संवैधानिक नियम संघ पर भी लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा, “संघ चाहता है हम अच्छे नागरिक बनें, इनकम टैक्स दें, लेकिन वो खुद इससे आजाद रहना चाहते हैं। यह कैसे मुमकिन है? हमें इस पर सवाल उठाना होगा।
प्रियांक खरगे ने कहा- वो (मोहन भागवत) कहते हैं कि हमें रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है क्योंकि हम बॉडी ऑफ इंडिविजुल्स हैं मैं आपसे वादा करता हूं आज नहीं तो कल रजिस्ट्रेशन करवाना ही होगा, मैं करवाके रहूंगा जब तक कानून और संविधान है, ये होकर रहेगा, इसके लिए आपको राजनीतिक इच्छा शक्ति चाहिए और संवैधानिक और कानूनी तरीके से आपको सही
रहना है, बस यही चाहिए, ऐसा करेंगे कि किसी भी तरह की साम्प्रदायिक ताकतों से चाहे वो संघ हो या भाजपा हो या कोई भी हो उन्हें रोका जा सकता है।
खरगे को याद दिला दें कि महाराष्ट्र के मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि संघ को दूर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी। उन्होंने कहा, संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं लेकिन आरएसएस पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। उन्होंने कहा, संघ के स्वयंसेवक लाठी काठी सीखते हैं, लेकिन यह अखिल भारतीय अखाड़ा नहीं है। संघ में घोष की धुन बजती है, व्यक्तिगत गीत होते हैं, संगीत होता है लेकिन संघ अखिल भारतीय संगीतशाला नहीं है। संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी हैं लेकिन संघ राजनीतिक पार्टी नहीं है। उन्होंने कहा था, संघ का जो काम है, संघ के लिए नहीं है। पूरे देश के लिए है, भारतवर्ष के लिए है। संघ किसी दूसरे संगठन के कंपटीशन में नहीं निकला है, संघ किसी एक विशेष परिस्थिति की, रिएक्शन में, प्रतिक्रिया में नहीं चला है, संघ किसी के विरोध में नहीं चला है, हमारा काम है कि किसी का विरोध किए बिना काम करें। संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए, संघ को पावर नहीं चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा था, संघ को देखना है तो संघ की शाखा देखिए, संघ के कार्यकर्ताओं के घर-परिवार देखिए। संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा नहीं करना है, प्रेशर ग्रुप खड़ा नहीं करना है। भाग्य का परिवर्तन देश के समाज के कारण होता है, जितने देश बड़े हुए, कुछ नीचे भी गिर गए, पुरानी बात नहीं कर रहा ,आधुनिक बात कर रहा हूं, अमेरिका है, ब्रिटेन है, फ्रांस है, चीन है ,जर्मनी है, इन सब के उत्थान पतन का 100 वर्ष का इतिहास देख लीजिए, उस पर पुस्तक भी मिलेगी, आपको ध्यान में आएगा वहां का समाज तैयार हुआ ,उसको पहले तैयार किया गया ,बाद में उसका उत्थान हुआ। मोहन भागवत ने कहा, हम कहते हैं कि भारत में हिंदू ही हैं और कोई नहीं, हिंदू हैं यानी क्या, हिंदू कहने से उसे रिलिजन ना मानें, पूजा, बाती, कर्मकांड ना मानें, हिंदू एक विशेष समुदाय का नाम नहीं है, हिंदू संज्ञा नहीं है, नाउन नहीं है, हिंदू विश्लेषण है।
मोहन भागवत ने कहा, बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, संघ के स्वयंसेवक उसमे हैं। सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को कोई दूसरा काम नहीं करना है। प्रियांक खरगे पहले संघ को समझें, तब आलोचना करें।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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