अशांति व अराजकता के झंझावात में विश्व

आज विश्व हिंसा और अशांति के दौर से गुजर रहा है। दुनिया के बड़े भूभाग पर अशांति और ताकतवर देशों की अराजकता बढ़ रही है। कहीं सीधी जंग में मिसाइल हमले और एयरस्ट्राइक की जा रही हैं तो कहीं प्रॉक्सीवार के जरिए टकराव हो रहा है। युद्ध मानव सभ्यता के साथ
पर्यावरण के लिए भी हानिकारक होता है। विस्फोट, रासायनिक हथियार और भारी सैन्य गतिविधियां प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर देती हैं। भूमि बंजर हो जाती है और जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।
आग की लपटों को देखें तो 24 फरवरी 2022 से रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध और इसी साल 7 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच सीमित सैन्य संघर्ष के बाद अब इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में परिस्थितियां गंभीर और जटिल बनी हुई हैं। इस समय दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है और दोनों देशों की सेनाएं प्रत्यक्ष सैन्य आक्रमणों में उलझी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध और अब अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध का संघर्ष यह दर्शाते हैं कि युद्ध का दंश सीमाओं से परे जाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति को बुरी तरह प्रभावित करता है।
इसे हाल ही में अमरीका और इजरायल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू की गई भारी सैन्य कार्रवाई ने और बढ़ा दिया है। अब तक ईरान में ही इस युद्ध के कारण 555 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस जंग में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी के मुताबिक, ईरान में 780 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इनमें कथित तौर पर एक स्कूल पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमले में मारी गईं 165 लड़कियां और स्टाफ भी शामिल हैं।
युद्ध के कारण शरणार्थियों की समस्या भी उत्पन्न होती है जो अन्तराष्ट्रिय स्तर पर मानवीय संकट का रूप ले लेती है। यह भी विडंबना है कि युद्ध प्रायः सत्ता, वर्चस्व और वैचारिक मतभेदों के कारण होते हैं जबकि युद्ध की कीमत आम जनता चुकाती है। आज के परमाणु और अत्याधुनिक हथियारों के युग में युद्ध का अर्थ केवल सीमित संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक विनाश हो सकता है।
विश्व भर में जारी कुछ अन्य युद्धों का सिलसिला भी जारी है। आपको बता दें 2014 से जारी यमन के गृह युद्ध में लाखों लोग प्रभावित और हजारों लोगों की मौतें हो चुकी हैं। यह गृह युद्ध यमन के पूर्व और वर्तमान राष्ट्रपतियों के वफादार गुटों के बीच चल रहा है। यमन की राजधानी सना स्थित होऊथी योद्धाओं जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के वफादार योद्धाओं का समर्थन प्राप्त है, और अदन में स्थित मंसूर हादी की सरकार के बीच यह युद्ध चल रहा है।
गत 21 फरवरी, 2026 को होऊथी सेनाओं द्वारा राजधानी सना में हादी को उनके आवास पर नजरबंद करने के एक महीने बाद ही हादी वहां से भाग निकलने में सफल रहे और अदन आ गए और कहा कि होऊथी अधिग्रहण अवैध था और वह अब भी यमन के संवैधानिक राष्ट्रपति हैं।
उधर, इथोपिया में 2020 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अबी अहमद द्वारा विपक्षी पार्टी एल.पी.टी.एफ. के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाई के कारण शुरू हुए गृह युद्ध से लाखों लोग विस्थापित हुए और सैंकड़ों लोग मारे गए। हालांकि नवम्बर, 2022 में हुए शांति समझौते के बाद झगड़े कम हुए हैं परंतु तनाव अभी बना हुआ है।
म्यांमार में 1 फरवरी, 2021 को वहां के मिलिट्री जुंटा ने आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। इसके तुरंत बाद ही जुंटा कहलाने वाले सैन्य शासकों का भी विरोध शुरू हो गया और इसने एक भीषण गृहयुद्ध का रूप ले लिया है। इस खूनी गृहयुद्ध में पिछले 5 वर्षों के दौरान 73,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
24 फरवरी, 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पांचवें वर्ष में दाखिल हो चुका है। इस युद्ध में अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के अनुसार दोनों पक्षों के सैनिकों और नागरिकों को मिलाकर लाखों लोगों की मौत तथा लाखों लोग घायल और विस्थापित हुए हैं।
7 अक्तूबर, 2023 को इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जमीन, राजनीतिक स्वामित्व और धार्मिक दावों से सम्बन्धित दशकों पुराना विवाद हमास द्वारा इजरायल पर बड़ा हमला किए जाने के बाद अधिक तेजी से भड़क उठा। दोनों पक्ष एक-दूसरे की भूमि पर कब्जे और एक-दूसरे पर परस्पर सुरक्षा खतरे के आरोप लगाते आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार इजरायली हमलों के कारण गाजा का बड़ा हिस्सा बुरी तरह तबाह हो चुका है जिसके पुनर्निर्माण में 20 वर्ष से भी अधिक समय लगने का अनुमान है। इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए हैं।
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद तेज हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकी संगठन पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं और इन हमलों में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं।
अफ्रीकी देश सुडान भी सूडानी सशस्त्र सेनाओं (एस.ए.एफ.) तथा अर्द्ध सैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आर.एस.एफ.) के बीच 2023 से जारी युद्ध के कारण इतिहास के सर्वाधिक उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है।
इस कारण यहां की जनता पूरी तरह तबाह और बर्बाद हो गई है और उसकी मुसीबतों को गरीबी आदि ने और भी बढ़ा दिया है तथा लगभग 2 लाख 80 हजार लोग अपने घर छोड़ कर दूसरे स्थानों को जा चुके हैं।
उक्त सारे संघर्ष वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। कुल मिला कर आज विभिन्न देशों के नेताओं की सत्ता की भूख और निजी स्वार्थों के कारण दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी नजर आ रही है।
युद्ध की विभीषिका हमें यह सिखाती है कि हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। मानवता का वास्तविक विकास शांति, सहयोग और पारस्परिक सहयोग में ही निहित है।
यदि विश्व समुदाय ने इतिहास से सबक नहीं लिया तो भविष्य और भी भयावह हो सकता है। समय की
मांग है कि राष्ट्र अपने मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाएँ और विश्व शांति को सर्वोपरि रखें। यदि अभी भी उन्होंने सबक न सीखा तो आजकल के हथियार पहले से बेहतर होने के कारण तीसरे विश्व युद्ध
की स्थिति में नुक्सान पिछले विश्व युद्धों में हुए नुक्सान से कहीं अधिक होगा और मानवता त्राहि-त्राहि कर उठेगी।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)


