
नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के मंच से वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण विचार सामने आए हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने सजग रहने की नसीहत दी। मुख्य अतिथि के रूप में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि दुनिया इस समय शक्ति संतुलन के एक बड़े परिवर्तन से गुजर रही है और आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में “ग्लोबल साउथ” की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने इस संदर्भ में भारत को एक प्रमुख और प्रभावशाली शक्ति के रूप में रेखांकित किया। स्टब ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कई दशकों तक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के प्रभाव में रही, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की बढ़ती आर्थिक शक्ति, जनसंख्या और राजनीतिक सक्रियता के कारण वैश्विक राजनीति का केंद्र धीरे-धीरे ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार भारत इस परिवर्तन का एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह तय करना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी? क्या वह संघर्षपूर्ण बहुध्रुवीय प्रतिस्पर्धा की ओर जाएगी या सहयोग और बहुपक्षीयता पर आधारित एक संतुलित वैश्विक व्यवस्था की ओर। स्टब के अनुसार इस निर्णय में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था है बल्कि वह वैश्विक कूटनीति में भी सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। अपने भाषण में स्टब ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई क्षेत्रीय संघर्ष दुनिया की स्थिरता के लिए चुनौती बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में जारी हिंसक संघर्ष इस बात का संकेत हैं कि यदि इन समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो वे व्यापक अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले सकते हैं। स्टब ने यह भी कहा कि वर्तमान “नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था” दबाव में है, लेकिन इसे समाप्त मान लेना गलत होगा। उनके अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं को कमजोर होने दिया गया, तो उनकी जगह शक्ति-आधारित राजनीति और आक्रामक प्रतिस्पर्धा ले सकती है। ऐसी स्थिति में मजबूत देश अपनी ताकत के आधार पर फैसले लेने लगेंगे, जिससे वैश्विक स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है।उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को अधिक प्रतिनिधिक बनाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को इसमें उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए और एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका के देशों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अत्यधिक उथल-पुथल और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में देशों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति सजग रहें और अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखें। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



