सुक्खू के सामने भाजपा चित

सियासत की दुनिया में भाजपा देश भर मंे कांग्रेस को नचा रही है लेकिन हिमाचल मंे कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुखविन्दर ंिसह सुक्खू ने भाजपा को चारो खाने चित कर दिया। हिमाचल प्रदेश के राज्यसभा चुनाव मंे कांग्रेस के अनुराग शर्मा निर्विरोध विजयी रहे हैं। यहां भाजपा ने अपना प्रत्याशी तक नहीं उतारा। भाजपा ने यहां पर प्रत्याशी न उतार कर अपनी इज्जत बचायी है। भाजपा की पराजय निश्चित थी क्योंकि 68 सदस्यीय विधानसभा मंे राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 31 विधायक चाहिए और भाजपा के पास सिर्फ 28 विधायक हैं। इसके अलावा क्रास वोटिंग हो जाती तो भाजपा की थुक्का-फजीहत ज्यादा होती। कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं और उन्हें तोड़ पाना इस समय भाजपा के लिए मुश्किल था। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश मंे भाजपा ने कांग्रेस को यह मुद्दा तो नहीं दिया कि उसने भाजपा को पराजित कर दिया है लेकिन सुक्खू ने विपक्ष के साथ अपनी पार्टी को भी यह संदेश दिया कि उनकी रणनीति कारगर है। सुक्खू ने राज्यसभा के लिए अनुराग शर्मा को टिकट दिया था जो अपेक्षाकृत कम चर्चित हैं। कांगे्रस मंे सुखविन्दर के विरोधियों की जुबान भी बंद हो गयी है। कांग्रेस ने राज्यसभा प्रत्याशी के नाम का फैसला काफी बाद मंे किया था। पहले यह टिकट आनंद शर्मा को दिया जाना था।
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने मैदान में उम्मीदवार ही नहीं उतारा और कांग्रेस का उम्मीदवार निर्विरोध जीत गया। कांग्रेस के अनुराग शर्मा को यह जीत मिली, वो भी एकतरफा। केंद्र और अपने सहयोगियों के साथ 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में मौजूद भाजपा ने यहां बिना मुकाबले के मैदान छोड़ दिया? दरअसल, इसका सबसे बड़ा कारण विधानसभा का सीधा सियासी गणित है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुल 68 सीटें हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। मौजूदा स्थिति में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास सिर्फ 28 विधायक हैं।
भाजपा को यह साफ दिख रहा था कि अगर वह उम्मीदवार उतार देती तो भी जीत की संभावना बेहद कम रहती। पार्टी के पास न तो जरूरी संख्या थी और न ही ऐसा कोई समीकरण दिख रहा था, जिससे उसे एक्स्ट्रा वोट मिल सकें। लिहाजा, रणनीतिक तौर पर भाजपा ने चुनावी मुकाबले से दूरी बनाए रखने का फैसला किया। इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला और पार्टी के उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिये गए। विधानसभा सचिवालय की ओर से उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ इलेक्शन भी सौंप दिया गया है। वह मौजूदा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्यसभा में शपथ लेंगे। अनुराग शर्मा कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं और कांग्रेस की जिला कांगड़ा इकाई के अध्यक्ष हैं। पेशे से वह ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार हैं। उनके पास बसों समेत करीब 30 वाहनों का बेड़ा हैं और उन्हें राज्य सरकार की ओर से कई निर्माण कार्यों के ठेके भी मिले हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा के चुनाव न लड़ने के पीछे सिर्फ संख्या का गणित ही नहीं, बल्कि कुछ और रणनीतिक कारण भी हो रहे हैं। इनमंे पहला है हार से बचने की रणनीति। अगर भाजपा उम्मीदवार उतारती और हार जाती, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश बन जाता। इसलिए पार्टी ने गैर जरूरी हार से बचने की रणनीति अपनाई और कैंडिडेट ही नहीं उतारा। भाजपा को लग रहा था कि क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है। पिछले कुछ राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग ने नतीजे बदल दिए थे, लेकिन हिमाचल में इस बार ऐसा कोई माहौल नहीं दिख रहा था। कांग्रेस के पास साफ बहुमत होने के कारण भाजपा के लिए समीकरण बनाना मुश्किल था। कांग्रेस के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि पार्टी ने अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे अनुराग शर्मा को टिकट दिया था। इसके बावजूद उनका निर्विरोध सांसद बनना पार्टी संगठन के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। राज्यसभा पहुंचने के बाद अनुराग शर्मा ने अपने संबोधन में भगवान शिव और मां चामुंडा का आशीर्वाद लेने के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया। कांग्रेस को पिछले राज्यसभा चुनाव में मिली हार का डर था, जहां 40 विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बावजूद कांग्रेस, भाजपा से हार गई थी। फरवरी 2024 में हुए पिछले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन ने कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी को हराया था। कांग्रेस के छह विधायकों ने भाजपा के पक्ष में वोट दिया था, जिससे मुकाबला बराबर हो गया था। तीनों निर्दलीय विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया था और दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे। इस बार शिमला में होली पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार प्रदेश से ही होगा। राज्यसभा के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च थी और वोटिंग 16 मार्च को होनी थी। साल 2020 में निर्विरोध चुनी गईं भाजपा नेता इंदु गोस्वामी का छह साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है, इसी वजह से ये चुनाव हुआ। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से चैंकाने वाला फैसला लिया गया। कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को प्रत्याशी के तौर पर उतारा गया। इस बीच कांग्रेस के पूर्व दिग्गज मंत्री आनंद शर्मा प्रत्याशी के ऐलान को लेकर चर्चा में आ गए। यहां तक कि उन्होंने इस चयन के लिए इशारों-इशारों में कांग्रेस हाईकमान पर भी तंज कस दिया। दरअसल, राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशी के ऐलान को लेकर कांग्रेस पार्टी ने नामांकन के आखिरी दिन तक पत्ते नहीं खोले थे। पांच मार्च को कांग्रेस ने सुबह प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर सभी को चैंका दिया। इससे पहले जब दिल्ली से आनंद शर्मा हिमाचल प्रदेश पहुंचे तो इस चर्चा को बल मिला कि आनंद शर्मा को टिकट मिलने जा रहा है और वह सोलन के कसौली से शिमला के लिए रवाना हुए लेकिन शिमला पहुंचते-पहुंचते सब कुछ बदल गया। राहुल गांधी नया नाम चाहते थे और ऐसा ही हरियाणा में भी देखने को मिला। वहां पर भी नया ही नाम राज्यसभा के लिए उतारा गया।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



